Deoband: किसानों को दिल्ली जाने से रोकना लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा- भगत सिंह वर्मा
ग्राम गंगदासपुर जट में भारतीय किसान यूनियन वर्मा व पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा
देवबंद: ग्राम गंगदासपुर जट में भारतीय किसान यूनियन वर्मा व पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा को उनके घर पर कल देर रात से ही हाउस अरेस्ट करके रखा और उन्हें दिल्ली किसान घाट पर देश बचाओ मोर्चा के किसान आंदोलन में भाग लेने नहीं जाने दिया गया अपने घर पर हाउस अरेस्ट के दौरान किसान नेता भगत सिंह वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तानाशाही रवैया अपना रहे हैं।प्रधानमंत्री को देश के अन्नदाता किसानों से दिल्ली में वार्ता करके किसानो की समस्याओं को हल करना चाहिए। किसानों को दिल्ली जाने से रोकना ब्रिटिश हुकूमत की याद दिलाता है। देश के अन्नदाता किसान दिल्ली कोई सत्ता में भागीदारी करने के लिए नहीं जाना चाहता है।वह तो केवल अपनी समस्याओं को हल कराने के लिए दिल्ली किसान घाट पर देश के महान नेता पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी के किसानों के लिए किए गए कार्यों को याद दिलाकर अपनी समस्याओं को हल कराना चाहता है।
भारतीय किसान यूनियन वर्मा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को समझना चाहिए कि देश का अन्नदाता किसान बचेगा तो देश बचेगा देश के अन्नदाता किसानों की क्रय शक्ति बढ़ाने से ही देश विकसित भारत बन सकता है।भगत सिंह वर्मा ने कहा कि देश के किसानों पर वर्ष 2000 में एक लाख करोड रुपए कर्ज था।जो सरकार की गलत नीति के कारण 2026 में बढ़कर 25 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी जी के कार्यकाल में देश के किसानों पर सबसे अधिक कर्ज हो गया है। मोदी जी ने कहा था कि हम वर्ष 2022 में किसानों की आय दोगुनी कर देंगे। किसानो की आय तो दोगुनी नहीं हुई है।लेकिन कर्ज जरूर उन पर कई गुना हो गया है।राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने कहा कि देश के अन्नदाता किसानों को बचाने के लिए किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी मूल्य दिलाया जाए।किसानों के सभी कर्ज समाप्त कराए जाएं।एम एस पी को लाभकारी बनाकर गारंटी कानून बनाया जाए। मनरेगा योजना को सीधा खेती से जोड़कर किसानों को मजदूर उपलब्ध कराये जाए। 58 वर्ष से अधिक बुजुर्ग किसानों मजदूरों को ₹10000 प्रति माह वृद्धावस्था पेंशन दिलाई जाए। किसान विरोधी भारत अमेरिका समझौते को रद्द किया जाए।किसानो की भूमि को बाजार मूल्य पर चार गुना दाम पर अधिग्रहण किया जाए।
गन्ना देश और प्रदेशों की आर्थिक रीढ है। गन्ने से प्रतिवर्ष प्रदेश और देश की सरकार को लाखों करोड़ रुपए का टैक्स जाता है। इसलिए गन्ने का लाभकारी मूल्य कम से कम ₹700 कुंतल चीनी मिलों से गन्ना किसानों को दिलाया जाए। चीनी मिलों से गन्ना किसानों को नकद गन्ना भुगतान दिलाया जाए।और पिछले वर्षों में देरी से किए गए गन्ना भुगतान पर लगा ब्याज देश के गन्ना किसानों को तुरंत दिलाया जाए। देश और प्रदेशों में किए गए विकास कार्यों में हो रही भारी लूट को रोका जाए। प्रदेश और केंद्र सरकार श्वेत पत्र जारी करके देश की जनता को बताएं कि विकास कार्यों में कितना धन खर्च हुआ है।और कितना कमीशन में गया है। देश की आजादी के बाद 2014 तक भारतवर्ष पर 55 लाख करोड रुपए कर्ज था। जो आज बढ़कर 230 लाख करोड रुपए हो गया है।इसका हिसाब भी प्रधानमंत्री जी को देश की जनता को देना चाहिए। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि जब देश के चंद कॉर्पोरेट घरानो के 16 लाख करोड रुपए कर्ज समाप्त किये जा सकते हैं।तो देश के अन्नदाता किसानों के 25 लाख करोड रुपए समाप्त क्यों नहीं हो सकते हैं। भगत सिंह वर्मा ने जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन चला रहे बेरोजगार युवाओं पर लाठी चार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ना लोकतंत्र देश में शर्मनाक घटना है।देश के प्रधानमंत्री को इतना क्रूर नहीं होना चाहिए।और तत्काल प्रभाव से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करके उनकी समस्याओं को हल करना चाहिए। दिल्ली लुटियंस जोन में बैठे हुए नेताओं को सत्ता का इतना अहंकार नहीं करना चाहिए। सत्ता तो यह देश के अन्नदाता किसान कभी भी बदल सकते हैं। अब शायद सत्ता बदलने का समय आ गया है। अब ज्यादा दिन तक उत्तर प्रदेश और केंद्र की सरकार किसानों को उनके घरों में कैद नहीं कर सकेगी।
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