Rohna Toll Corruption: रोहना टोल भ्रष्टाचार बनेगा 2027 का बड़ा चुनावी मुद्दा? देवबंद तक टोल मुक्त करने पर सपा कर सकती है बड़ा दांव
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच सहारनपुर और मुजफ्फरनगर की सीमा पर स्थित रोहना टोल
देवबंद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच सहारनपुर और मुजफ्फरनगर की सीमा पर स्थित रोहना टोल प्लाजा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे महंगे टोल प्लाजाओं में शुमार रोहना टोल को लेकर लंबे समय से स्थानीय लोगों में नाराजगी रही है। अब यह मुद्दा आगामी विधानसभा चुनाव में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से शामिल करने पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि सहारनपुर के स्थानीय नेताओं ने सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को फीडबैक दिया है कि रोहना टोल टैक्स आम जनता, किसानों, व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और दैनिक यात्रियों के लिए बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
सूत्रों का दावा है कि पार्टी नेतृत्व इस सुझाव पर गंभीरता से मंथन कर रहा है। चर्चा है कि यदि समाजवादी पार्टी सत्ता में आती है तो देवबंद क्षेत्र तक रोहना टोल को टोल-मुक्त करने या आम लोगों को राहत देने जैसी घोषणा चुनावी घोषणा पत्र में शामिल की जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सहारनपुर और मुजफ्फरनगर के बीच रोजाना हजारों लोग रोजगार, व्यापार, शिक्षा और अन्य कार्यों के लिए आवाजाही करते हैं। ऐसे में टोल शुल्क का मुद्दा सीधे आम जनता से जुड़ा हुआ है और चुनावी माहौल में इसका असर देखने को मिल सकता है।
सूत्र यह भी बता रहे हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दौरे के दौरान अखिलेश यादव इस मुद्दे को सार्वजनिक मंच से उठा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो रोहना टोल का मुद्दा 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रमुख चुनावी बहस का विषय बन सकता है।
फिलहाल सभी की निगाहें समाजवादी पार्टी की चुनावी रणनीति और घोषणा पत्र पर टिकी हैं। यदि रोहना टोल को लेकर कोई बड़ा वादा किया जाता है, तो यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई विधानसभा सीटों, विशेषकर देवबंद क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
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