3 हजार से अधिक पुलिस अधिकारियों और RAC की 12 कंपनियों की तैनाती के साथ छावनी में तब्दील हुआ इलाका, 24 घंटों के लिए इंटरनेट बंद

राजस्थान की राजधानी जयपुर के मालवीय नगर और जगतपुरा संभाग के अंतर्गत आने वाले नंदपुरी क्षेत्र में सोमवार की

Jun 8, 2026 - 14:26
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3 हजार से अधिक पुलिस अधिकारियों और RAC की 12 कंपनियों की तैनाती के साथ छावनी में तब्दील हुआ इलाका, 24 घंटों के लिए इंटरनेट बंद
3 हजार से अधिक पुलिस अधिकारियों और RAC की 12 कंपनियों की तैनाती के साथ छावनी में तब्दील हुआ इलाका, 24 घंटों के लिए इंटरनेट बंद
  • जयपुर के मालवीय नगर और जगतपुरा क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण परियोजना को लेकर प्रशासनिक मुस्तैदी, नूरानी मस्जिद सहित पांच धार्मिक स्थलों को हटाने की बड़ी कार्रवाई
  • सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर राजधानी के कई संवेदनशील इलाकों में चौबीस घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप, सोशल मीडिया पर पैनी नजर

राजस्थान की राजधानी जयपुर के मालवीय नगर और जगतपुरा संभाग के अंतर्गत आने वाले नंदपुरी क्षेत्र में सोमवार की सुबह से ही भारी प्रशासनिक हलचल और तनाव का माहौल देखा जा रहा है। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने मिलकर एक बड़े और लंबे समय से लंबित पड़े सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए अतिक्रमण हटाओ अभियान की शुरुआत कर दी है। इस महा-अभियान के तहत नंदपुरी अंडरपास के समीप मुख्य सड़क सीमा के भीतर आने वाले कुल पांच अवैध धार्मिक ढांचों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसमें पैंतालीस वर्ष पुरानी नूरानी मस्जिद, दो स्थानीय मंदिर, एक सत्संग भवन और एक मजार शामिल हैं। प्रशासन की इस अचानक और व्यापक बुलडोज़र कार्रवाई के कारण पूरे शहर में किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति या कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो, इसके लिए रविवार की देर रात से ही सुरक्षा के कड़े और अभूतपूर्व इंतजाम लागू कर दिए गए हैं।

इस बेहद संवेदनशील प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई को पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने और जन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जयपुर के संभागीय आयुक्त ने एक कड़ा और बड़ा आदेश जारी किया है। इस विशेष आदेश के तहत समूचे प्रभावित और उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को आगामी चौबीस घंटे यानी सोमवार की मध्यरात्रि तक के लिए पूरी तरह से निलंबित कर दिया गया है। इंटरनेट पाबंदी के इस दायरे में सभी प्रमुख निजी और सरकारी दूरसंचार कंपनियों द्वारा प्रदान की जाने वाली 2G, 3G, 4G और 5G मोबाइल डेटा सेवाएं, बल्क एसएमएस और एमएमएस की सुविधाएं पूरी तरह शामिल हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की संवेदनशील कार्रवाइयों के दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाहों, भड़काऊ संदेशों और भ्रामक जानकारियों को फैलने से रोकना बेहद आवश्यक है, क्योंकि ऐसी चीजें बहुत तेजी से सार्वजनिक शांति और कानून व्यवस्था को भंग कर सकती हैं।

प्रोजेक्ट की जमीनी हकीकत और इसकी अनिवार्यता पर प्रकाश डालते हुए जयपुर विकास प्राधिकरण के सतर्कता विंग के उप महानिरीक्षक ने स्पष्ट किया कि नंदपुरी अंडरपास से रेलवे लाइन के समानांतर जाने वाली यह मुख्य सड़क वर्तमान में कई स्थानों पर अत्यधिक संकरी है। इसकी वर्तमान चौड़ाई बमुश्किल पच्चीस से तीस फीट के आसपास ही बची है, जिसके कारण इस पूरे मार्ग पर हर दिन हजारों वाहन चालकों को भीषण जाम और यातायात की समस्याओं से जूझना पड़ता है। मास्टर प्लान और भूमि अभिलेखों के अनुसार, इस स्वीकृत मार्ग की वास्तविक और वैधानिक चौड़ाई अस्सी फीट निर्धारित है। इस महत्वपूर्ण मार्ग के चौड़ा हो जाने से न केवल जगतपुरा और मालवीय नगर के बीच की दूरी और कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व सुधार होगा, बल्कि प्रधान मार्ग, एपेक्स सर्किल और हरे कृष्णा मार्ग पर वाहनों का अत्यधिक दबाव भी काफी हद तक कम हो जाएगा, जिससे क्षेत्र की लगभग पचास से अधिक रिहायशी कॉलोनियों में रहने वाले लाखों नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।

अतिक्रमण हटाने की क्रमिक प्रक्रिया

जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने के लिए काफी समय पहले से ही कानूनी रूप से तैयारियां की जा रही थीं। इसी कड़ी के तहत पूर्व में इस चिन्हित मार्ग पर कुल 143 अवैध निर्माणों और मकानों को नोटिस जारी किए गए थे, जिनमें से 134 सामान्य आवासीय और व्यावसायिक अतिक्रमणों को पिछले महीने यानी 22 मई को ही भारी बुलडोज़र कार्रवाई के जरिए पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया था। उस समय धार्मिक आस्थाओं और संवेदनशीलता का सम्मान करते हुए इन पांच धार्मिक स्थलों को स्वतः हटाने के लिए प्रबंधन समितियों को अतिरिक्त समय दिया गया था, जिसकी समय सीमा समाप्त होने के बाद ही यह सीधी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू की गई है।

इस कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था को पूरी तरह अपने नियंत्रण में रखने के लिए जयपुर पुलिस कमिश्नरेट ने पूरे नंदपुरी और जगतपुरा इलाके को एक अभेद्य पुलिस छावनी के रूप में तब्दील कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालने के लिए जमीन पर 3 हजार से अधिक सशस्त्र पुलिस कर्मियों और अधिकारियों को तैनात किया गया है, जिसमें राजस्थान सशस्त्र कांस्टेबुलरी (आरएसी) की 12 से अधिक विशेष कंपनियां भी शामिल हैं। इसके अलावा कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए जयपुर रेंज के साथ-साथ कोटा और भरतपुर रेंज से भी अतिरिक्त पुलिस बलों और विशेष दस्तों को आकस्मिक ड्यूटी के लिए जयपुर बुलाया गया है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है, जिसके कारण पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एक स्थान पर एकत्रित होने, सभा करने या किसी भी प्रकार का जुलूस निकालने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।

प्रशासनिक स्तर पर की गई इस कार्रवाई और भारी पुलिस बल की तैनाती को लेकर स्थानीय स्तर पर तीखी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं। क्षेत्र के स्थानीय कांग्रेस विधायक रफीक खान ने इस ध्वस्तीकरण अभियान की टाइमिंग और इसकी त्वरित अनिवार्यता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने तर्क दिया है कि जब मामला किसी भी धर्म के प्राचीन पूजा स्थलों या इबादतगाहों से जुड़ा होता है, तो प्रशासन को केवल बल प्रयोग का रास्ता चुनने के बजाय सभी संबंधित पक्षों, धार्मिक समितियों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों के साथ बैठकर आपसी संवाद और सर्वसम्मति के जरिए कोई बीच का और शांतिपूर्ण रास्ता निकालने का प्रयास करना चाहिए था। कुछ स्थानीय धार्मिक संगठनों और मस्जिद कमेटी के पदाधिकारियों ने भी इस कार्रवाई पर गहरी आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें नोटिस का जवाब देने और कानूनी उपचार तलाशने के लिए पर्याप्त और उचित समय नहीं दिया गया, और वे इस कार्रवाई को अदालत के माध्यम से चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

दूसरी तरफ, जयपुर विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने इन सभी आरोपों और आपत्तियों को पूरी तरह से निराधार और वैधानिक नियमों के विपरीत बताया है। अधिकारियों का कहना है कि सड़क सीमा में आने वाले इन सभी ढांचों के प्रबंधकों को कानून के दायरे में बहुत पहले ही लिखित नोटिस तामील करा दिए गए थे और उन्हें अपने स्तर पर इन ढांचों को स्थानांतरित करने के लिए पर्याप्त समय सीमा भी दी गई थी। जब निर्धारित समयावधि बीत जाने के बाद भी अतिक्रमण को स्वेच्छा से नहीं हटाया गया, तभी प्रशासन को जनहित में और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए इस तरह का कड़ा और प्रत्यक्ष कदम उठाना पड़ा। जेडीए की टीम मौके पर आधा दर्जन से अधिक बड़े बुलडोज़रों, उत्खनन मशीनों (एक्स्कवेटर्स) और मलबे को हटाने वाले बड़े डंपरों के साथ पूरी तैयारी से मुस्तैद है और पूरे मलबे को साफ करने का काम युद्ध स्तर पर चल रही सुरक्षा घेराबंदी के बीच किया जा रहा है।

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