UP Advocate Welfare: यूपी के अधिवक्ताओं को मिलेगा 5 लाख तक कैशलेस इलाज, सीएम योगी ने चैंबर, टैबलेट और कल्याण निधि बढ़ाने का किया ऐलान

प्रयागराज में आयोजित हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिवक्ताओं के लिए 5 लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा और कल्याण निधि विस्तार की घोषणा की।

By INA News Desk
Sep 14, 2026 - 22:11
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UP Advocate Welfare: यूपी के अधिवक्ताओं को मिलेगा 5 लाख तक कैशलेस इलाज, सीएम योगी ने चैंबर, टैबलेट और कल्याण निधि बढ़ाने का किया ऐलान
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में सीएम योगी की बड़ी घोषणाएं: वकीलों को मेडिकल इंश्योरेंस, 700 करोड़ से तैयार हुए 10 हजार चैंबर
  • अधिवक्ता कल्याण निधि बढ़कर हुई 5 लाख: सीएम योगी बोले- 'फ्यूचर रेडी बार' से ही मजबूत होगी 'फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम' की नींव
  • प्रयागराज में वकीलों के लिए खुला सौगातों का पिटारा: 400 विधि अधिकारियों को टैबलेट, 50% बढ़ी फीस, निधन पर सहायता उम्र सीमा अब 70 वर्ष

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था को सशक्त करने और विधिक समुदाय के सामाजिक व आर्थिक संबल को बढ़ाने के उद्देश्य से कई बड़े नीतिगत फैसलों की घोषणा की है। प्रयागराज में आयोजित इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक आधुनिक और भविष्योन्मुखी न्याय प्रणाली (फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम) का निर्माण केवल एक सक्षम और सशक्त बार (फ्यूचर रेडी बार) के सहयोग से ही संभव है। उन्होंने प्रदेश के उच्च न्यायालय तथा सभी जिला न्यायालयों में नियमित रूप से वकालत कर रहे अधिवक्ताओं के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक के कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस की सुविधा लागू करने का बड़ा ऐलान किया।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं के कार्यस्थल को आधुनिक बनाने, राज्य विधि अधिकारियों के मानदेय में संशोधन करने तथा अधिवक्ता कल्याण निधि की सुरक्षा सीमा को दोगुने से अधिक करने की महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि न्याय की अवधारणा केवल अदालती फैसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित को समय पर न्याय दिलाना और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति का संविधान पर भरोसा बनाए रखना बार और बेंच की साझा जिम्मेदारी है।

चैंबर इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल अपग्रेडेशन पर जोर

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि प्रदेश सरकार ने प्रयागराज में लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से 10 हजार से अधिक वकीलों के बैठने के लिए अत्याधुनिक चैंबरों का निर्माण पूरा कराया है। इन बहुमंजिला चैंबर परिसरों में मल्टीलेवल वाहन पार्किंग, डिजिटल लाइब्रेरी, डाइनिंग हॉल और महिला अधिवक्ताओं के लिए कॉमन रूम जैसी जरूरी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। मुख्यमंत्री ने मंच से अधिवक्ता भवन की औपचारिक चाबी भी बार के प्रतिनिधियों को सौंपी।

उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इन नवनिर्मित चैंबरों में फर्नीचर, कंप्यूटर और अन्य आवश्यक उपकरण लगाने के संबंध में न्यायपालिका या बार एसोसिएशन की ओर से जो भी संयुक्त प्रस्ताव प्राप्त होगा, शासन उसके लिए पूर्ण वित्तीय सहयोग प्रदान करेगा। इसके अलावा, राज्य सरकार की ओर से पैरवी करने वाले 400 राज्य विधि अधिकारियों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए सरकार द्वारा टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही राज्य विधि अधिकारियों की वर्तमान फीस दरों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि करने के निर्णय को भी औपचारिक मंजूरी दे दी गई है।

अधिवक्ता कल्याण निधि और सहायता पात्रता में बड़ा बदलाव

विधिक पेशे से जुड़े परिवारों की सामाजिक सुरक्षा को विस्तार देते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अधिवक्ता कल्याण निधि (Advocate Welfare Fund) के तहत दी जाने वाली अनुग्रह राशि को वर्तमान 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है।

इसके साथ ही, किसी अधिवक्ता के असमय निधन की स्थिति में आश्रित परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता के नियमों में ढील देते हुए पात्रता आयु सीमा को 60 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष कर दिया गया है। विधिक प्रतिनिधियों ने लंबे समय से यह मांग उठाई थी कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं की आयु सीमा कम होने के कारण कई जरूरतमंद परिवार इस कल्याणकारी योजना के लाभ से वंचित रह जाते थे, जिसे सरकार ने अब संशोधित कर दिया है।

2017 से पहले और अब: न्यायिक व पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर की तुलना

मुख्यमंत्री ने राज्य के प्रशासनिक और न्यायिक ढांचे में पिछले वर्षों के दौरान आए परिवर्तनों का ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पूर्व प्रदेश के 10 जिलों में अधीनस्थ अदालतें किराए के जर्जर भवनों अथवा अस्थायी शेडों में चलने को मजबूर थीं। प्रदेश की पुलिस व्यवस्था में 45 से 50 प्रतिशत पद रिक्त पड़े थे और वार्षिक पुलिस प्रशिक्षण क्षमता महज 3,000 कर्मियों की थी, जिसे अब बढ़ाकर 60,000 कार्मिक प्रतिवर्ष तक पहुंचा दिया गया है।

उन्होंने अधीनस्थ अदालतों की संरचना का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य के 10 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 'इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स' का निर्माण तेजी से जारी है। इन परिसरों में एक ही छत के नीचे अदालत कक्ष, न्यायाधीशों के आवास, अधिवक्ताओं के चैंबर, बैंक, पोस्ट ऑफिस, कैंटीन और इनडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जैसी समग्र नागरिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में 900 नई जनपदीय अदालतों और फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के गठन की प्रक्रिया को भी हरी झंडी दी गई है।

डिजिटलाइजेशन और तकनीकी सुधार

न्यायिक प्रक्रिया में देरी को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश में 'न्याय श्रुति' प्रणाली को लागू किया गया है। इसके माध्यम से जेलों और जिला अदालतों को हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी और सुरक्षित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़कर गवाहियों को वर्चुअली दर्ज किया जा रहा है। अपराधियों को पेशी पर लाने-ले जाने के जोखिम को कम करने के साथ ही विटनेस प्रोटेक्शन (गवाह सुरक्षा) योजना को मजबूती से लागू किया गया है, जिसके चलते गंभीर आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि (कनविक्शन रेट) के आंकड़ों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है।

मुख्यमंत्री ने युवा वकीलों से आह्वान किया कि वे केवल मुकदमों के निस्तारण तक सीमित न रहें, बल्कि तेजी से उभरती नई कानूनी चुनौतियों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, डेटा प्राइवेसी, फिनटेक, बौद्धिक संपदा अधिकार और क्लाइमेट लिटिगेशन के अध्ययन पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक और तकनीकी परिवेश में वकालत का स्वरूप भी बदल रहा है, जिसके लिए निरंतर अध्ययन अनिवार्य है।

कार्यक्रम में इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली, वरिष्ठ न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, महाधिवक्ता अजय मिश्रा और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडे व महासचिव अखिलेश कुमार शर्मा सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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