वाराणसी में जलभराव पर शासन की बड़ी कार्रवाई, जल निगम के अधिशासी अभियंता निलंबित, जांच शुरू
वाराणसी में भारी बारिश के दौरान पंप बंद रखने और जलभराव की लापरवाही पर उत्तर प्रदेश जल निगम के अधिशासी अभियंता पवन कुमार गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है।
वाराणसी। जनपद में मूसलाधार वर्षा के दौरान सीवेज पंपों के बंद रहने और शहर के निचले इलाकों में गंभीर जलभराव की समस्या को शासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। जनसमस्याओं के समाधान में शिथिलता और पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने पर उत्तर प्रदेश जल निगम नगरीय के निर्माण खंड (विद्युत/यांत्रिक) में पदस्थ अधिशासी अभियंता पवन कुमार गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक अनुशासन एवं अपील नियमावली के तहत औपचारिक जांच प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
प्राप्त विवरण के मुताबिक मुख्यालय स्थित मुख्य अभियंता (क्रय), उत्तर प्रदेश जल निगम नगरीय को इस मामले में पदेन जांच अधिकारी नामित किया गया है। प्राथमिक विभागीय जांच में पाया गया कि चौकाघाट स्थित सीवेज पंपिंग स्टेशन पर नदी के जल के उल्टे बहाव को थामने के लिए आवश्यक सुरक्षा गेट या अवरोधक लगाने की पूर्व कार्ययोजना तैयार नहीं की गई थी। इसके अलावा प्रशासनिक स्तर से समय-समय पर जारी तकनीकी दिशा-निर्देशों की भी अनदेखी की गई। जांच रिपोर्ट में यह बात भी पुष्ट हुई कि भारी वर्षा के समय चौकाघाट पंपिंग स्टेशन और गोईठहां सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) के मुख्य पंप बंद रखे गए थे।
बारिश के दौरान समय पर पंपिंग संयंत्रों का संचालन न होने से भूमिगत सीवर लाइनों पर दबाव अचानक कई गुना बढ़ गया, जिसके चलते शहर की कई सघन बस्तियों और निचले रिहायशी इलाकों में पानी भर गया। इस विकट स्थिति से हजारों नागरिकों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ा और जनसुविधाओं की व्यवस्था चरमरा गई। नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने जनपद प्रवास के दौरान जलभराव प्रभावित बस्तियों का स्वयं स्थलीय निरीक्षण किया था और व्यवस्था में पाई गई खामियों पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए लापरवाह तंत्र पर सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया था।
शासन के आदेशानुसार निलंबन अवधि के दौरान संबंधित अधिशासी अभियंता को मुख्य अभियंता कानपुर क्षेत्र, उत्तर प्रदेश जल निगम नगरीय कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है, जहां वे नियमों के अधीन जीवन निर्वाह भत्ते के हकदार होंगे। शासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जनहित के कार्यों में कोताही बरतने वाले किसी भी कार्मिक को बख्शा नहीं जाएगा।
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