UP New Cities Project: लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली में नए शहरों के विकास को मिली रफ्तार, योगी कैबिनेट ने मंजूर की 380 करोड़ की पहली किस्त
मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली में नए शहरों के विकास के लिए ₹380 करोड़ की पहली किस्त मंजूर हुई है। भूमि अर्जन हेतु 50% तक सीड कैपिटल मिलेगी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ती शहरी आबादी और भविष्य की आवासीय जरूरतों के दृष्टिगत राज्य सरकार ने आधुनिक व सुनियोजित नए शहरों के निर्माण की दिशा में ठोस वित्तीय कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर संपन्न हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में 'मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना' के अंतर्गत लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली विकास प्राधिकरणों के क्षेत्राधिकार में प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए 380 करोड़ रुपये की पहली किस्त अवमुक्त करने के प्रस्ताव को औपचारिक स्वीकृति दे दी गई।
इस नीतिगत निर्णय का सीधा प्रभाव लखनऊ राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) के आसपास व्यवस्थित टाउनशिप विकसित करने, भूमि अर्जन की अड़चनों को दूर करने और आम जनता को आधुनिक सुविधाओं से युक्त किफायती आवासीय विकल्प उपलब्ध कराने पर पड़ेगा। शासन द्वारा स्वीकृत यह धनराशि सीधे संबंधित विकास प्राधिकरणों को हस्तांतरित की जाएगी, जिससे वे चिन्हित स्थलों पर किसानों और काश्तकारों से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को बिना वित्तीय संकट के आगे बढ़ा सकें।
बढ़ती आबादी के बीच सुनियोजित शहरीकरण की नीति
उत्तर प्रदेश के प्रमुख महानगरों में अनियंत्रित बसावट और बुनियादी नागरिक सुविधाओं पर बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने 6 अप्रैल 2023 को एक विस्तृत शासनादेश के माध्यम से 'मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना' की शुरुआत की थी। इस योजना की बुनियादी रूपरेखा यह है कि पुराने शहरों के बाहर आधुनिक सुविधाओं से लैस 'सैटेलाइट' या नए शहर बसाए जाएं।
विशेष सचिव आवास राजेश कुमार राय ने मंत्रिपरिषद के निर्णय की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि नगरीय क्षेत्रों का वैज्ञानिक और मास्टर प्लान के अनुरूप विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। लखनऊ के चारों ओर जिस तीव्र गति से जनसंख्या का विस्तार हो रहा है, उसे देखते हुए उन्नाव और रायबरेली के सीमावर्ती इलाकों में नए टाउनशिप विकसित करना बेहद आवश्यक हो गया था। इस योजना के माध्यम से जमीन अधिग्रहण से लेकर चौड़ी सड़कों, जल निकासी, सीवरेज नेटवर्क, हरित पट्टियों और बिजली ग्रिड जैसी प्राथमिक अवस्थापना सुविधाओं का समग्र ढांचा तैयार किया जा रहा है।
भूमि अर्जन के लिए 50 फीसदी सीड कैपिटल और 20 वर्ष की अवधि
विकास प्राधिकरणों के सामने नए शहरों या आवासीय योजनाओं को धरातल पर उतारने में सबसे बड़ी बाधा भूमि अर्जन पर आने वाला भारी-भरकम खर्च होता है। प्राधिकरणों के पास अक्सर इतना प्रारंभिक बजट उपलब्ध नहीं होता कि वे एकमुश्त सैकड़ों हेक्टेयर जमीन का मुआवजा वितरित कर सकें।
इस व्यावहारिक समस्या का स्थायी समाधान निकालते हुए योजना के तहत यह कड़ा वित्तीय प्रावधान किया गया है कि भूमि अर्जन में आने वाले कुल व्यय का 50 प्रतिशत तक हिस्सा राज्य सरकार स्वयं 'सीड कैपिटल' (शुरुआती पूंजी) के रूप में उपलब्ध कराएगी। इस वित्तीय सहायता की प्रमुख शर्तें निम्नवत हैं:
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वापसी की लंबी अवधि: यह धनराशि विकास प्राधिकरणों को अधिकतम 20 वर्ष की सुगम अवधि के लिए ऋण/वित्तीय सहायता के रूप में दी जाती है, जिससे प्राधिकरणों पर तत्काल वित्तीय भार नहीं पड़ता।
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वित्तीय तरलता: राज्य सरकार से शुरुआती पूंजी मिलने के बाद प्राधिकरण जमीन अधिग्रहण का काम तेज कर सकते हैं और बाद में आवासीय व व्यावसायिक भूखंडों की बिक्री से प्राप्त राजस्व के जरिए धीरे-धीरे इस राशि की प्रतिपूर्ति कर सकते हैं।
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परियोजना में निरंतरता: बजट के अभाव में भूमि अधिग्रहण के बीच में ही अटकने या कानूनी विवादों में फंसने की आशंका समाप्त हो जाती है।
तीनों प्राधिकरणों को 655.76 करोड़ तक की सहायता अनुमन्य
विभागीय मूल्यांकन के अनुसार, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए), उन्नाव विकास प्राधिकरण (यूडीए) और रायबरेली विकास प्राधिकरण (आरडीए) की नई टाउनशिप परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार द्वारा सीड कैपिटल के मद में अधिकतम 655.76 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता अनुमन्य की गई है।
इसी समग्र वित्तीय सीमा के सापेक्ष मंत्रिपरिषद ने प्राथमिकता के आधार पर पहली किस्त के रूप में कुल 380 करोड़ रुपये की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करते हुए इसे जारी करने की अनुमति दी है। इस पहली किस्त से तीनों शहर अपने-अपने चिन्हित क्षेत्रों में भूमि मालिकों से आपसी सहमति या नियमानुसार अर्जन की कार्रवाई शुरू करेंगे।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3,500 करोड़ रुपये का भारी बजटीय प्रावधान
प्रदेश में नए नगरों के निर्माण को केवल कागजों तक सीमित न रखकर एक व्यापक अभियान का रूप देने के लिए राज्य सरकार ने मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में भारी-भरकम वित्तीय संसाधन सुरक्षित किए हैं। सरकार ने इस संपूर्ण वित्तीय वर्ष के लिए 'नए शहरों के समग्र एवं समुचित विकास' मद में 3,500 करोड़ रुपये का विशेष बजटीय प्रावधान किया है।
इस बड़े बजट के माध्यम से प्रदेश भर के दर्जनों विकास प्राधिकरणों को नए शहर बसाने के लिए चरणबद्ध रूप से धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वाले 10 से 15 वर्षों में उत्तर प्रदेश का कोई भी प्रमुख जिला अनियोजित कॉलोनियों और अवैध प्लाटिंग का शिकार न बने।
आम जनता को मिलेंगे किफायती मकान और रोजगार
नए शहरों के अस्तित्व में आने से सबसे बड़ा लाभ मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों को मिलेगा। निजी कॉलोनाइजरों द्वारा बिना लेआउट पास कराए बेची जाने वाली जमीनों में सीवर, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं होतीं। इसके विपरीत, विकास प्राधिकरणों द्वारा विकसित टाउनशिप में:
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मानक के अनुसार पार्क, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और व्यावसायिक बाजार आरक्षित किए जाते हैं।
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प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) और अल्प आय वर्गों (एलआईजी) के लिए पक्के मकानों का प्रावधान होता है।
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निर्माण गतिविधियों, इंजीनियरिंग और सेवा क्षेत्र में स्थानीय श्रमिकों और युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं।
लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली के लिए जारी हुई 380 करोड़ रुपये की पहली किस्त से यह तय हो गया है कि आने वाले समय में इन तीनों शहरों का स्वरूप अधिक आधुनिक, स्वच्छ और सुनियोजित दिखाई देगा।
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