UP ATS Policy 2026: वाहनों की फिटनेस जांच के लिए नई नीति मंजूर, हर जिले में खुलेंगे 3 ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने स्वचालित परीक्षण स्टेशन (ATS) के लिए राज्य नीति-2026 को मंजूरी दी। हर जिले में 3 केंद्र खुलेंगे, 6 करोड़ नेटवर्थ की शर्त खत्म और जमीन 1 एकड़ की गई।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सड़कों पर अनफिट वाहनों के संचालन पर पूर्ण अंकुश लगाने और सड़क सुरक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने के लिए राज्य सरकार ने वाहन फिटनेस जांच प्रणाली में आमूलचूल बदलाव किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को संपन्न हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश भर में 'स्वचालित परीक्षण स्टेशन' (ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन - एटीएस) की स्थापना और नियमन के लिए 'नवीन राज्य नीति-2026' के प्रस्ताव को औपचारिक स्वीकृति दे दी गई। इस नीति के लागू होने के साथ ही 2 अगस्त 2023 को जारी पूर्ववर्ती सरकारी आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत अब वाहनों की फिटनेस जांच मानवीय दृष्टि या आरटीओ अधिकारियों के व्यक्तिगत निरीक्षण के बजाय पूरी तरह कम्प्यूटरीकृत स्वचालित मशीनों द्वारा की जाएगी। जांच प्रक्रिया से मानवीय हस्तक्षेप पूरी तरह समाप्त होने से जहां पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, वहीं गलत या फर्जी फिटनेस प्रमाणपत्र जारी होने की आशंका भी खत्म हो जाएगी।
हर जनपद में 3 केंद्र, एक स्टेशन पर 24 हजार वाहनों की जांच क्षमता
कैबिनेट बैठक के बाद परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने इस नई नीति के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में अब कम से कम तीन स्वचालित परीक्षण स्टेशन (एटीएस) स्थापित किए जाने की अनुमति प्रदान की गई है।
नीति के तहत प्रत्येक केंद्र की कार्यक्षमता का मानक निर्धारित किया गया है, जिसके अनुसार एक एटीएस सेंटर पर वार्षिक रूप से अधिकतम 24,000 वाहनों के फिटनेस परीक्षण का कार्य किया जा सकेगा। जिलों में तीन-तीन केंद्र स्थापित होने से वाहन स्वामियों को लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी और अपने ही जनपद में समय पर जांच कराने की सुविधा उपलब्ध होगी।
जमीन और नेटवर्थ के नियमों में भारी ढील: 6 करोड़ की बाध्यता समाप्त
राज्य में निजी पूंजी निवेश को आकर्षित करने और स्थानीय उद्यमियों को इस क्षेत्र में लाने के लिए सरकार ने स्थापना की बुनियादी शर्तों में व्यापक रियायत दी है:
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भूमि की अनिवार्यता घटी: 2 अगस्त 2023 की पुरानी नीति के तहत एटीएस स्थापित करने के लिए न्यूनतम 2.5 एकड़ जमीन का स्वामित्व या पट्टा होना अनिवार्य था। नई नीति-2026 में इस सीमा को घटाकर मात्र 1 एकड़ कर दिया गया है। इससे शहरों के निकट उपयुक्त भूमि का चयन आसान होगा।
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नेटवर्थ की शर्त समाप्त: पूर्व के नियमों में केंद्र खोलने के इच्छुक उद्यमियों के लिए 6 करोड़ रुपये की वित्तीय नेटवर्थ होना अनिवार्य किया गया था। इस कड़े नियम के चलते कई सक्षम तकनीकी निवेशक आगे नहीं आ पा रहे थे। योगी कैबिनेट ने इस 6 करोड़ रुपये की नेटवर्थ अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
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शुरुआती संचालन में राहत: नए स्थापित होने वाले एटीएस केंद्रों को अपनी तकनीकी कार्यप्रणाली, सॉफ्टवेयर समन्वय और कर्मचारियों की कार्यकुशलता को सुव्यवस्थित करने के लिए पहले 6 महीने तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से छूट प्रदान की जाएगी।
केंद्रीय मोटर यान नियमावली से हुआ सामंजस्य, सरकारी खजाने पर शून्य भार
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), भारत सरकार द्वारा 23 सितंबर 2021, 31 अक्टूबर 2022, 14 मार्च 2024 और 8 मई 2024 को जारी विभिन्न अधिसूचनाओं के जरिए केंद्रीय मोटर यान नियमावली 1989 के अध्याय-11 में संशोधन किया गया था। इन संशोधनों के जरिए देश भर में एटीएस के विनियमन, ऑडिट और तकनीकी नियंत्रण की नई रूपरेखा तय की गई थी।
उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती 2023 की नीति में इन सभी नवीनतम केंद्रीय परिपत्रों का समावेश नहीं था। इसलिए राज्य सरकार ने केंद्रीय नियमों के अनुरूप अपनी नीति का नया संशोधित प्रारूप तैयार किया। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस नीति को लागू करने से उत्तर प्रदेश सरकार के खजाने पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा, क्योंकि इन परीक्षण स्टेशनों की स्थापना और संचालन का संपूर्ण व्यय निजी निवेशकों और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर आधारित होगा। यह नीति गजट में अधिसूचित होने की तिथि से ही पूरे प्रदेश में लागू मानी जाएगी।
तकनीकी रोजगार के नए अवसर और सड़क दुर्घटनाओं पर रोक
प्रदेश के हर जिले में तीन-तीन आधुनिक स्टेशनों की स्थापना से बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मैकेनिकल इंजीनियर, ऑटोमोबाइल इंजीनियर, आईटी और डेटा ऑपरेटर, लैब टेक्नीशियन और प्रशासनिक कर्मचारियों के रूप में तकनीकी व गैर-तकनीकी युवाओं को स्थानीय स्तर पर काम मिलेगा।
इसके साथ ही, सड़क सुरक्षा के मोर्चे पर यह कदम निर्णायक सिद्ध होगा। वर्तमान में ब्रेक फेल होने, हेडलाइट्स या टेललाइट्स की खराबी, स्टीयरिंग में तकनीकी खामी, टायरों के अत्यधिक घिस जाने या सस्पेंशन टूटने के कारण अनगिनत मार्ग दुर्घटनाएं होती हैं। स्वचालित परीक्षण में रोलर ब्रेक टेस्टर, सस्पेंशन टेस्टर, हेडलाइट एलाइनर, स्पीडोमीटर टेस्टर और उत्सर्जन जांच उपकरण सीधे केंद्रीय सर्वर से जुड़े होते हैं। मशीनी जांच में केवल तकनीकी रूप से 100 प्रतिशत दुरुस्त पाए जाने वाले वाहनों को ही डिजिटल फिटनेस सर्टिफिकेट जारी होगा, जिससे सड़कों पर केवल सुरक्षित गाड़ियां ही चल सकेंगी।
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