UP Vehicle Scrap Policy: यूपी में कबाड़ हुए 1.95 लाख से ज्यादा पुराने वाहन, नया वाहन खरीदने पर रोड टैक्स में भारी छूट
UP Vehicle Scrap Policy: यूपी में 1.95 लाख से अधिक पुराने वाहन कबाड़ किए गए। नई गाड़ी खरीदने पर रोड टैक्स में 15% तक की छूट और कबाड़ की कीमत भी मिलेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में लागू की गई व्हीकल स्क्रैप नीति के बेहद शानदार नतीजे सामने आ रहे हैं. इस नीति के जरिए राज्य में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव दिख रहा है. सरकार के इस कदम से प्रदेश की सड़कों से करीब 1.95 लाख से ज्यादा खटारा और पुराने वाहनों को हटाया जा चुका है, जिनका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया गया. इनमें लगभग 1.85 लाख निजी गाड़ियां और 10 हजार से अधिक सरकारी वाहन शामिल हैं. इस व्यवस्था से न सिर्फ प्रदूषण पर लगाम लग रही है, बल्कि रीसाइक्लिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर में नए निवेश व रोजगार के बड़े अवसर भी बन रहे हैं.
परिवहन विभाग ने इस पूरी व्यवस्था को पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया है ताकि आम जनता को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें. राज्य में अब तक 101 व्हीकल स्क्रैपिंग केंद्रों का पंजीकरण किया जा चुका है, जिनमें से 50 केंद्र पूरी तरह सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं. यह सारा काम केंद्र सरकार के वी-स्क्रैप पोर्टल और वाहन सॉफ्टवेयर के जरिए संचालित होता है. गाड़ियों की फिटनेस की जांच के लिए आधुनिक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन बनाए गए हैं, जहां बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के कंप्यूटर से जांच होती है. मानकों पर फेल होने वाले वाहनों को कबाड़ घोषित कर स्क्रैपिंग प्रक्रिया में भेज दिया जाता है. सरकार अब इस नेटवर्क को और बड़ा करने के लिए 30 नए केंद्र खोलने की तैयारी में भी है.
इस नीति के तहत वाहन स्वामियों के आर्थिक फायदे का भी खास ख्याल रखा गया है. जब कोई व्यक्ति अपनी पुरानी गाड़ी को अधिकृत केंद्र पर सौंपता है, तो उसे एक प्रमाण पत्र मिलता है. इस प्रमाण पत्र की मदद से नया वाहन खरीदने पर निजी गाड़ियों के रोड टैक्स में 15 प्रतिशत और व्यावसायिक गाड़ियों के रोड टैक्स में 10 प्रतिशत तक की बड़ी छूट मिलती है. इसके अलावा पुरानी गाड़ी के कबाड़ की सही कीमत भी मालिक को दी जाती है. यदि कोई तुरंत नई गाड़ी नहीं खरीदना चाहता, तो वह इस प्रमाण पत्र को किसी दूसरे व्यक्ति को बेच भी सकता है. इस नीति से उद्योगों को लोहा, एल्युमिनियम और रबर जैसी निर्माण सामग्रियां कम लागत में मिल रही हैं, जिससे नए रोजगार पैदा हो रहे हैं.
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