यूपी में चकबंदी विभाग का प्रमोशन बैकलॉग खत्म: 1544 कर्मचारियों को मिली पदोन्नति, पुराने गांवों के मामले सुलझे
उत्तर प्रदेश चकबंदी विभाग में पदोन्नति का बैकलॉग खत्म कर दिया गया है। आठ वर्षों में 1,544 पदोन्नतियां हुईं और 10 वर्ष से पुराने गांवों के भूमि विवाद निपटाए गए।
उत्तर प्रदेश में चकबंदी व्यवस्था को पारदर्शी और चुस्त-दुरुस्त बनाने के साथ-साथ विभागीय कर्मचारियों के सेवा हितों को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक सुधार दर्ज किया गया है। चकबंदी निदेशालय द्वारा जारी विवरण के अनुसार, विभाग में वर्षों से लंबित पदोन्नति के बैकलॉग को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। बीते आठ वर्षों के दौरान विभिन्न संवर्गों में कुल 1,544 कर्मचारियों और अधिकारियों को पदोन्नति प्रदान की गई है। इसके साथ ही एक दशक से अधिक समय से लंबित पड़े चकबंदी गांवों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने में उल्लेखनीय सफलता मिली है।
विभागीय कार्यक्षमता को गति देने के लिए मानव संसाधन के सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया गया। आंकड़ों के अनुसार जहां वर्ष 2017 में मात्र 67 पदोन्नतियां हुई थीं, वहीं पारदर्शी नीतियों के चलते वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर 1,544 तक पहुंच गई। इन पदोन्नतियों के जरिए निचले स्तर से लेकर उच्च प्रशासनिक पदों तक रिक्तियों को भरा गया। पदोन्नत होने वालों में 1,025 चकबंदी लेखपाल, 344 चकबंदीकर्ता, 97 सहायक चकबंदी अधिकारी, 64 चकबंदी अधिकारी, 11 बंदोबस्त अधिकारी, दो उप संचालक चकबंदी और एक संयुक्त संचालक चकबंदी शामिल हैं। इस कदम से लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मियों के करियर को नई गति मिली है।
प्रशासनिक मशीनरी के सक्रिय होने का सीधा प्रभाव जमीन पर वर्षों से अटकी चकबंदी प्रक्रियाओं पर पड़ा है। निदेशालय ने लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण के लिए समयबद्ध रूपरेखा तैयार की। वर्ष 2017 में 10 वर्ष से अधिक पुरानी श्रेणी में 1,166 गांव दर्ज थे, जिनकी संख्या वर्ष 2025 में घटकर 586 रह गई। इस प्रकार एक दशक से अधिक पुराने 580 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूर्ण कराया गया।
इसी प्रकार पांच वर्ष से कम अवधि वाले लंबित गांवों की संख्या 2,468 से घटकर 1,132 और पांच से दस वर्ष की श्रेणी वाले गांवों की संख्या 861 से घटकर 680 रह गई है। पुराने गांवों में भूमि विभाजन और सीमाओं के निर्धारण को प्राथमिकता पर रखकर किसानों के भूमि विवादों का तेजी से निस्तारण किया जा रहा है। विभागीय व्यवस्था में सुधार और कार्मिकों की समय पर पदोन्नति से ग्रामीण क्षेत्रों में चकबंदी कार्यों को गति और पारदर्शिता दोनों मिली है।
What's Your Reaction?

