UP News: मिलावटखोरी और नकली दवाओं पर सख्ती! मुख्य सचिव ने दिए प्रभावी कार्रवाई के निर्देश
मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में
- मुख्य सचिव की अध्यक्षता में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की बैठक सम्पन्न
- जन-स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता, मिलावटखोरी एवं नकली औषधियों पर हो सख्त कार्रवाई
- खाद्य पदार्थों में मिलावट और नकली दवाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए दीर्घकालीन रणनीति तैयार करें
- मिलावट को जड़ से समाप्त करने के लिए रॉ मैटेरियल से लेकर निर्माण इकाइयों तक हो प्रभावी कार्रवाई
लखनऊ। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में खाद्य पदार्थों एवं औषधियों की गुणवत्ता, सुरक्षा, मिलावट की रोकथाम, प्रवर्तन कार्यवाही, प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण तथा उपभोक्ता जागरूकता सहित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि आमजन का स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जन-स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध प्रभावी एवं सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि अपमिश्रित खाद्य पदार्थों तथा नकली, अधोमानक, अपमिश्रित एवं मिथ्याछाप औषधियों के निर्माण एवं विक्रय की रोकथाम के लिए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप दीर्घकालीन रणनीति तैयार कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों एवं औषधियों में मिलावट और अधोमानकता के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ाने के लिए उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों, उपलब्ध शिकायत तंत्र तथा नियामकीय प्रावधानों की जानकारी व्यापक रूप से उपलब्ध कराई जाए। फूड कनेक्ट एप का भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि मिलावट अथवा खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर आशंका होने पर उपभोक्ता आसानी से अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। साथ ही, खाद्य कारोबारकर्ताओं को भी निर्धारित मानकों, गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं एवं उनके दायित्वों के प्रति निरंतर जागरूक किया जाए।
मुख्य सचिव ने पूर्व से स्थापित खाद्य प्रयोगशालाओं के आवश्यकतानुसार उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ नमूना विश्लेषण की क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 8 नवनिर्मित प्रयोगशालाओं को आवश्यक मानव संसाधन की नियुक्ति करते हुए आगामी 31 अक्टूबर तक संचालित किया जाए। नवनिर्मित प्रयोगशालाओं तथा पूर्व से निर्मित शेष प्रयोगशालाओं का चरणबद्ध ढंग से जून, 2027 तक NABL Accreditation कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने खाद्य एवं औषधि सुरक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि खाद्य कारोबारकर्ता, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, अभिहित अधिकारी एवं खाद्य सुरक्षा आयुक्त सहित सभी संबंधित हितधारकों को एक मंच पर लाने के लिए ऑनलाइन इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म विकसित किया जाए। इस पोर्टल के माध्यम से लिए गए नमूनों की जांच की स्थिति, विश्लेषण परिणाम तथा संबंधित कार्रवाई की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेगी। मुख्य सचिव ने कहा कि मिलावट को जड़ से समाप्त करने के लिए केवल तैयार खाद्य पदार्थों तक सीमित न रहते हुए रॉ मैटेरियल पर विशेष फोकस किया जाए तथा खाद्य पदार्थवार उनकी निर्माण इकाइयों पर प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई की जाए। जैविक खाद्य उत्पादों की जांच के लिए तैयार की गई निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। फल, सब्जियों एवं अन्य जैविक खाद्य उत्पादों की निःशुल्क जांच के लिए राज्य कृषि उत्पादन मंडी द्वारा समय-समय पर नमूने भेजे जाएं।
औषधियों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा के संबंध में मुख्य सचिव ने कहा कि अवैध एवं नकली औषधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाए तथा दवाओं की बेहतर ट्रैकिंग एवं सप्लाई चेन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। अवैध औषधि निर्माण एवं संगठित सिंडिकेट के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। बिना लाइसेंस औषधियों के निर्माण, भंडारण एवं बिक्री पर प्रभावी रोकथाम के साथ-साथ फर्जी इनवाइसिंग एवं डमी फर्मों के विरुद्ध भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। दवाओं की अनैतिक एवं अवैध बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण तथा नारकोटिक्स एवं मनःप्रभावी (NDPS) औषधियों के दुरुपयोग की रोकथाम के लिए ठोस कार्रवाई की जाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश फार्मास्यूटिकल एवं चिकित्सा उपकरण उद्योग नीति, 2023 के अंतर्गत निवेश को प्रोत्साहित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों के नमूने असुरक्षित पाए जाने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन के प्रति स्पष्ट संदेश जाए और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की प्रभावी सुरक्षा हो सके।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 36 सचल खाद्य प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। मंडलों एवं जनपदों द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इन सचल प्रयोगशालाओं के माध्यम से खाद्य नमूनों की जांच, खाद्य कारोबारकर्ताओं के प्रशिक्षण तथा जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे मौके पर ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के साथ-साथ उपभोक्ताओं एवं कारोबारकर्ताओं को खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। बैठक में खाद्य लाइसेंस एवं पंजीकरण की स्थिति की समीक्षा के दौरान बताया गया कि विगत 10 वर्षों में इनमें उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2016-17 में सक्रिय खाद्य लाइसेंसों की संख्या 36,984 थी, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर 1,18,118 हो गई है। इसी प्रकार सक्रिय खाद्य पंजीकरणों की संख्या वर्ष 2016-17 में 1,99,711 से बढ़कर वर्ष 2026-27 में 8,69,122 हो गई है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026-27 में 31 अगस्त तक 10,931 छापे मारे गए तथा 14,283 नमूने संग्रहीत किए गए, जिनमें से 6,791 नमूने मानक के विपरीत पाए गए। इसी अवधि में न्याय निर्णयन अधिकारी न्यायालय में 8,279 वाद तथा न्यायिक न्यायालय में 1,212 वाद दायर किए गए। न्याय निर्णयन अधिकारी न्यायालय द्वारा 5,672 तथा न्यायिक न्यायालय द्वारा 195 वादों में निर्णय दिया गया। निर्णीत वादों में 19.66 करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाया गया तथा 138 मामलों में सजा सुनाई गई। न्यायिक न्यायालय द्वारा 0.35 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।
दूध एवं दुग्ध उत्पादों के संबंध में बताया गया कि 1 अप्रैल, 2026 से 31 अगस्त, 2026 तक दूध के संबंध में 1,332 छापे तथा दुग्ध उत्पादों के संबंध में 3,245 छापे मारे गए। दूध से संबंधित निर्णीत 1,121 वादों में 3.21 करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाया गया तथा 18 मामलों में कारावास की सजा हुई। इसी प्रकार दुग्ध उत्पादों से संबंधित निर्णीत 1,808 वादों में 5.79 करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाया गया तथा 11 मामलों में सजा सुनाई गई। बैठक में सचिव एवं आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन रौशन जैकब सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण तथा विभिन्न एसोसिएशन के पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।
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