UP Consolidation News: चकबंदी में बेवजह योजना निरस्त करने पर रोक, आयुक्त ने जारी किए सख्त दिशा-निर्देश
यूपी में चकबंदी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने और किसानों को मुकदमों से बचाने के लिए चकबंदी आयुक्त ने योजना निरस्तीकरण और निगरानियों के निस्तारण पर कड़े नियम तय किए।
यूपी में चकबंदी प्रक्रियाओं में मनमाने फैसलों पर अंकुश, किसानों को मुकदमों से बचाने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी
उत्तर प्रदेश में चकबंदी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने तथा काश्तकारों को अनावश्यक कानूनी विवादों से बचाने के लिए चकबंदी निदेशालय ने सख्त रुख अपनाया है। चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और राजस्व मामलों के समयबद्ध निस्तारण के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
नए निर्देशों के तहत अब चकबंदी अधिकारी, बंदोबस्त अधिकारी अथवा उप संचालक बिना ठोस और पर्याप्त आधार के प्रारंभिक या परिष्कृत चकबंदी योजना को निरस्त कर गांव को दोबारा शुरुआती स्तर पर नहीं भेज सकेंगे। ऐसी कार्यप्रणाली से प्रक्रिया में अनावश्यक देरी होती है और किसानों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे आपत्ति अथवा अपील की सुनवाई के दौरान स्वयं अपने स्तर पर योजना में सुधार का प्रयास करें। यदि योजना में स्थापित नियमों से बहुत अधिक विचलन हो और सुधार संभव न दिखे, तो सभी संबंधित खातेदारों का पक्ष सुनना अनिवार्य होगा। इसके उपरांत जिलाधिकारी सह जिला उप संचालक चकबंदी की संस्तुति सहित प्रस्ताव भेजकर चकबंदी आयुक्त की लिखित पूर्वानुमति मिलने के बाद ही प्रत्यावर्तन का आदेश दिया जा सकेगा।
इसके अलावा जिन 267 गांवों में कब्जा परिवर्तन का कार्य पूरा हो चुका है, वहां अंतिम अभिलेख तैयार करने और चक निगरानियों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी उप संचालकों को निर्देशित किया गया है कि वे बंदोबस्त अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर संबंधित गांवों की कार्यवाही पुस्तकों के आधार पर लंबित निगरानियों का निस्तारण समयसीमा के भीतर सुनिश्चित करें। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य व्यवस्था में गति लाना, पारदर्शिता बढ़ाना और किसानों के हितों की रक्षा करते हुए भू-अभिलेखों को समय पर अंतिम रूप देना है।
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