UP Food Safety Rules: पैक्ड खाद्य पदार्थों पर अब वास्तविक विनिर्माण तिथि लिखना अनिवार्य, FSDA का कड़ा निर्देश

यूपी में पैक्ड खाद्य पदार्थों पर अब वास्तविक विनिर्माण तिथि लिखना अनिवार्य कर दिया गया है। पैकिंग डेट को उत्पादन तिथि बताकर उपभोक्ताओं को गुमराह करने पर एफएसडीए सख्त कार्रवाई करेगा।

By INA News Desk
Sep 20, 2026 - 23:44
10 Views
UP Food Safety Rules: पैक्ड खाद्य पदार्थों पर अब वास्तविक विनिर्माण तिथि लिखना अनिवार्य, FSDA का कड़ा निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बाजार में बिकने वाले पैकेज्ड खाद्य उत्पादों की शुद्धता, गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) विभाग ने एक बड़ा विनियामक निर्णय लिया है। विभाग द्वारा जारी नए आधिकारिक आदेश के अनुसार, अब उत्तर प्रदेश की भौगोलिक सीमा के भीतर पैक और प्रसंस्कृत किए जाने वाले सभी खाद्य उत्पादों के लेबल पर वास्तविक विनिर्माण तिथि (Actual Date of Manufacturing) अंकित करना अनिवार्य होगा। विनिर्माता अब पैकेजिंग की तिथि (Date of Packing) को उत्पाद की मूल विनिर्माण तिथि के रूप में प्रदर्शित नहीं कर सकेंगे।

इस व्यवस्था का उल्लंघन करने वाले खाद्य कारोबारियों, री-पैकरों और री-लेबलरों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कड़ी विधिक कार्रवाई की जाएगी। विभाग का यह कदम उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों की वास्तविक आयु और उनकी सुरक्षित उपयोग अवधि (शेल्फ लाइफ) की सटीक जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है।

विशेष जांच अभियानों में उजागर हुई विनिर्माताओं की मनमानी

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त द्वारा यह कड़ा आदेश राज्य भर में खाद्य निर्माण एवं प्रसंस्करण इकाइयों के हालिया विशेष औचक निरीक्षणों के बाद जारी किया गया है। विभागीय प्रवर्तन टीमों द्वारा की गई विस्तृत पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि कई विनिर्माण इकाइयां बड़े पैमाने पर खाद्य सामग्री का उत्पादन कर उसे महीनों तक थोक गोदामों में भंडारित रखती हैं।

इसके बाद, जब बाजार में मांग पैदा होती है अथवा आपूर्ति की आवश्यकता पड़ती है, तब उसी पुराने भंडारित माल को छोटे खुदरा पैकेटों में भरा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान पैकेट के बाहरी लेबल पर उस दिन की तारीख डाल दी जाती है जिस दिन पैकिंग हुई, न कि वह तारीख जब वास्तव में सामग्री तैयार की गई थी। इस तकनीकी हेरफेर के कारण कई महीने पुराना उत्पाद खुदरा बाजार में उपभोक्ता को बिल्कुल नया और ताजा प्रतीत होता है। री-पैकिंग और री-लेबलिंग करने वाली एजेंसियों में भी यही प्रवृत्ति बड़े पैमाने पर पाई गई, जिससे उत्पाद के वास्तविक भंडारण समय को लेकर उपभोक्ता पूरी तरह अनभिज्ञ रहते थे।

विनिर्माण से तय होती है शेल्फ लाइफ, पैकिंग से नहीं

वैज्ञानिक और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार, किसी भी खाद्य पदार्थ की जैविक और रासायनिक स्थिरता उसके वास्तविक प्रसंस्करण या निर्माण के क्षण से ही घटने लगती है। खाद्य पदार्थ की एक निश्चित शेल्फ लाइफ होती है, जो हवा, नमी, तापमान और समय के प्रभाव से लगातार प्रभावित होती है। यदि किसी खाद्य वस्तु का निर्माण जनवरी में हुआ और उसे गोदाम में रखकर छह महीने बाद जून में पैक किया गया, तो जून की पैकिंग तारीख अंकित करने से उपभोक्ता धोखे में रहता है।

समय बीतने के साथ खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों की कमी आने लगती है, वसा में ऑक्सीकरण (रैंसिडिटी) के कारण दुर्गंध या स्वाद में परिवर्तन हो सकता है, और सूक्ष्मजीवी संदूषण का जोखिम बढ़ जाता है। विशेषकर आटा, दालें, मसाले, खाद्य तेल, बेकरी सामग्री और रेडी-टू-ईट उत्पादों में पुराना माल लंबे समय बाद पैक किए जाने पर उपभोक्ताओं के पाचन तंत्र और समग्र स्वास्थ्य पर सीधा प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

औद्योगिक खाद्य श्रृंखला में मिलावट और जोखिम पर अंकुश

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह समस्या उस समय और भी गंभीर रूप धारण कर लेती है जब ऐसे पैकेज्ड उत्पादों का इस्तेमाल अन्य खाद्य पदार्थों में प्राथमिक घटक (इंग्रीडिएंट) के रूप में किया जाता है। होटल, रेस्टोरेंट, औद्योगिक कैंटीन और कन्फेक्शनरी निर्माता अक्सर पैकेज्ड सामग्री को अपने व्यंजनों में अवयव के रूप में शामिल करते हैं।

यदि किसी कच्चे माल की वास्तविक विनिर्माण तिथि स्पष्ट नहीं होगी, तो खाद्य श्रृंखला (फूड चेन) में ऐसे अवयवों के अनजाने में इस्तेमाल होने की प्रबल आशंका बनी रहती है जिनकी गुणवत्ता समाप्त हो चुकी है या जो एक्सपायरी के कगार पर पहुंच चुके हैं। नई व्यवस्था लागू होने से खाद्य प्रसंस्करण की पूरी कड़ी में ‘ट्रेसेबिलिटी’ (स्रोतों की पड़ताल) सुनिश्चित होगी और खराब या बासी माल का पुनर्चक्रण पूरी तरह बंद हो सकेगा।

खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 के तहत सख्त कानूनी प्रावधान

आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने यह आदेश 'खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006' (FSS Act 2006) में निहित उपभोक्ता संरक्षण, पारदर्शिता और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी प्रावधानों के आधार पर जारी किया है। कानून के अंतर्गत उपभोक्ताओं को भ्रामक जानकारी देना, उत्पाद की गुणवत्ता छिपाना अथवा गलत लेबलिंग करना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि सभी खाद्य व्यवसाय संचालक (FBOs) अपने उत्पादों के पैकेज पर वास्तविक विनिर्माण तिथि को अनिवार्य और प्रमुखता से दर्ज करें। यदि कोई कारोबारी पैकिंग की तारीख को ही विनिर्माण की तारीख बताकर उत्पाद बेचते पाया गया, तो इसे उत्पाद को 'मिसब्रांडेड' (Misbranded) माना जाएगा। ऐसे मामलों में भारी आर्थिक दंड लगाने के साथ-साथ खाद्य लाइसेंस निलंबन अथवा निरस्तीकरण की कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।

फील्ड अधिकारियों को सघन जांच और रिकॉर्ड मिलान के निर्देश

इस नए नियम का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में तैनात अभिहित अधिकारियों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। प्रवर्तन टीमों को यह जिम्मा सौंपा गया है कि वे खाद्य विनिर्माण इकाइयों में जाकर केवल अंतिम पैकेट की लेबलिंग ही न देखें, बल्कि कारखाने के कच्चे माल के खरीद रजिस्टर, प्रोसेसिंग बैच रिकॉर्ड, स्टोरेज स्टॉक रजिस्टर और पैकेजिंग लॉग बुक का भी मिलान करें।

विभाग ने उपभोक्ताओं से भी सजग रहने की अपील की है। उपभोक्ताओं को किसी भी पैक्ड खाद्य सामग्री को खरीदते समय लेबल पर वास्तविक उत्पादन तिथि, बैच नंबर और उपभोग की समय सीमा को ध्यानपूर्वक जांचना चाहिए। यदि किसी उत्पाद पर तिथियों को लेकर कोई अस्पष्टता या ओवरराइटिंग दिखाई दे, तो इसकी सूचना तत्काल जिला खाद्य सुरक्षा कार्यालय अथवा विभागीय पोर्टल पर दर्ज कराई जा सकती है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow