UP News: सरकारी अस्पतालों में अब हथकरघा उत्पादों की होगी आपूर्ति, बुनकरों को मिलेगा स्थायी बाजार

यूपी के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में अब हथकरघा निर्मित बेडशीट व गॉज बैंडेज की आपूर्ति होगी। मंत्री राकेश सचान ने अधिकारियों को कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए हैं।

By INA News Desk
Sep 15, 2026 - 21:42
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UP News: सरकारी अस्पतालों में अब हथकरघा उत्पादों की होगी आपूर्ति, बुनकरों को मिलेगा स्थायी बाजार
  • योगी सरकार का फैसला: मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में बिछेंगी हथकरघे की चादरें, बुनकर समितियों को बड़ा काम
  • UP Handloom Sector: अस्पतालों को मिलेंगे हथकरघा बेडशीट व गॉज बैंडेज, मंत्री राकेश सचान ने दिए समयबद्ध आपूर्ति के निर्देश
  • UP Weaver Welfare: हथकरघा निगम के जरिए सरकारी संस्थानों में पहुंचेगा बुनकरों का सामान, आजीविका को मिलेगा नया संबल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पारंपरिक बुनकरी कला को आर्थिक सुरक्षा देने और स्थानीय कारीगरों को संस्थागत खरीदार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में हथकरघा उत्पादों के उपयोग का निर्णय लिया है। प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों, स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों और विशिष्ट चिकित्सा संस्थानों में अब हथकरघा से बनी बेडशीट, तकिया कवर तथा उपचार में प्रयुक्त होने वाले गॉज बैंडेज की अनिवार्य खरीद की जाएगी। इस कदम का सीधा लाभ प्रदेश के हजारों बुनकर परिवारों और हथकरघा सहकारी समितियों को नियमित आय एवं निरंतर कार्य के रूप में प्राप्त होगा।

मंगलवार को राजधानी लखनऊ के डालीबाग (तिलक मार्ग) स्थित खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने इस अंतर-विभागीय कार्ययोजना को शीघ्र अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा हथकरघा विभाग के बीच सामंजस्य बनाकर आपूर्ति श्रृंखला को बिना किसी अवरोध के संचालित करने पर सहमति बनी।

सरकारी अस्पतालों के जरिए सीधा बाजार

राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र में हर साल लाखों मीटर कपड़ा केवल बिस्तरों की चादरों, तकिया कवर और सर्जिकल पट्टियों (गॉज बैंडेज) के रूप में उपयोग में लाया जाता है। अब तक अधिकांश चिकित्सा संस्थान इस प्रकार की खरीद स्थानीय टेंडरों या खुले बाजार के जरिए करते रहे हैं, जिससे आपूर्ति की गुणवत्ता में भिन्नता रहती थी और पारंपरिक बुनकरों को इस मांग का प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिल पाता था।

नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम लिमिटेड इस पूरी आपूर्ति श्रृंखला के लिए केंद्रीय एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। स्वास्थ्य विभाग अपनी वार्षिक और त्रैमासिक मांग का आकलन कर निगम को भेजेगा। निगम इस मांग को प्रदेशभर में सक्रिय बुनकर सहकारी समितियों और व्यक्तिगत बुनकरों में वितरित करेगा। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और उत्पादकों को उनकी मेहनत का उचित व सीधा पारिश्रमिक प्राप्त हो सकेगा।

गुणवत्ता और चिकित्सीय मानकों पर रहेगा विशेष जोर

चिकित्सा संस्थानों में उपयोग होने वाले वस्त्रों के लिए कड़े मानक निर्धारित होते हैं। अस्पतालों में लगातार धुलाई, संक्रमण रोधी प्रक्रियाओं (ऑटोक्लेविंग) और कीटाणुशोधन के कारण चादरों और तकिया कवर का टिकाऊ होना अनिवार्य है। इसी प्रकार सर्जिकल उपयोग में आने वाले गॉज बैंडेज का चिकित्सीय रूप से शुद्ध, अवशोषक और विसंक्रमित होना आवश्यक होता है।

विभागीय समीक्षा बैठक में मंत्री राकेश सचान ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि हथकरघा निगम यह सुनिश्चित करे कि बुनकरों से प्राप्त होने वाले उत्पादों की तकनीकी गुणवत्ता में कोई शिथिलता न रहे। सूत के धागे की मोटाई, कपड़े की बुनाई की सघनता और रंग की स्थायित्वता के लिए कड़े मानक तय किए जाएंगे। गुणवत्ता परीक्षण के बाद ही उत्पादों की खेप संबंधित अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को भेजी जाएगी।

बुनकर सहकारी समितियों को मिलेगा नया जीवन

उत्तर प्रदेश के वाराणसी, मऊ, आजमगढ़, बाराबंकी, सीतापुर, गोरखपुर, मेरठ और संतकबीरनगर जैसे जिले पारंपरिक बुनाई के प्रमुख केंद्र रहे हैं। हालांकि, बड़े औद्योगिक टेक्सटाइल मिलों से मिल रही प्रतिस्पर्धा और बाजार के अभाव के कारण कई सहकारी समितियां निष्क्रियता की स्थिति में पहुंच गई थीं।

सरकारी अस्पतालों की निरंतर मांग इन समितियों के लिए एक स्थिर आर्थिक संबल साबित होगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में पूरे वर्ष वस्त्रों की खपत बनी रहती है, जिससे बुनकरों को मौसमी उतार-चढ़ाव का सामना नहीं करना पड़ेगा। नियमित कार्य मिलने से कारीगरों का पलायन रुकेगा और नई पीढ़ी का जुड़ाव भी इस पुश्तैनी हुनर से बना रहेगा।

समयबद्ध आपूर्ति और पारदर्शी भुगतान व्यवस्था

बैठक में यह बिंदु प्रमुखता से उठा कि अस्पतालों में चिकित्सीय सामग्री की कमी से मरीज सेवाएं प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए मंत्री ने निर्देश दिया कि मांग पत्र मिलने के साथ ही निर्धारित समय-सीमा के भीतर सामग्री का वितरण पूरा किया जाए।

साथ ही, बुनकरों के भुगतान में देरी न हो, इसके लिए एक पारदर्शी वित्तीय चक्र स्थापित करने पर चर्चा की गई। चिकित्सा विभाग द्वारा सामग्री स्वीकृति के उपरांत हथकरघा निगम के माध्यम से बुनकरों के बैंक खातों में सीधे भुगतान की व्यवस्था की जाएगी। इससे सरकारी तंत्र के प्रति ग्रामीण कारीगरों का विश्वास सुदृढ़ होगा।

बैठक के दौरान प्रमुख सचिव हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग अनिल सागर, विशेष सचिव शेषमणि पांडेय और संयुक्त आयुक्त पीसी ठाकुर सहित चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। विभागीय स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार कर लिए गए हैं, जिन्हें मंत्रिमंडल और संबंधित विभागों की औपचारिक संस्तुति के बाद प्रदेशव्यापी स्तर पर लागू किया जाएगा।

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