UP International Trade Show: मेरठ की रेवड़ी, गजक और नानखटाई ने जीता दिल, ओडीओसी फूड कोर्ट में विदेशी मेहमान बोले- वाह!

ग्रेटर नोएडा के यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 'एक जनपद एक व्यंजन' (ODOC) के तहत मेरठ की रेवड़ी, गजक और नानखटाई की धूम रही। विदेशी खरीदारों ने स्वाद चखकर पैकेजिंग और आपूर्ति की जानकारी ली।

By INA News Desk
Sep 25, 2026 - 21:48
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UP International Trade Show: मेरठ की रेवड़ी, गजक और नानखटाई ने जीता दिल, ओडीओसी फूड कोर्ट में विदेशी मेहमान बोले- वाह!

ग्रेटर नोएडा। जनपद गौतमबुद्ध नगर के ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में राज्य के औद्योगिक और तकनीकी कौशल के साथ-साथ पारंपरिक व्यंजनों की मिठास भी अंतरराष्ट्रीय पटल पर छा गई है। 25 से 29 सितंबर तक चलने वाले इस प्रतिष्ठित व्यापार मेले में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पहल 'एक जनपद एक व्यंजन' (वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन - ओडीओसी) के तहत विशेष फूड कोर्ट स्थापित किया गया है। इस फूड कोर्ट में मेरठ के पारंपरिक खाद्य उत्पादों विशेष रूप से प्रसिद्ध रेवड़ी, तिल-गुड़ की गजक और कुरकुरी नानखटाई के स्टाल पर पहले ही दिन से देशी और विदेशी आगंतुकों का तांता लगा रहा।

पारंपरिक तरीके से तैयार इन स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वाद चखने के बाद कई विदेशी प्रतिनिधियों और राष्ट्रीय व्यापारियों ने खुले दिल से प्रशंसा करते हुए कहा, "वाह मेरठ!" स्थानीय कारीगरों द्वारा सदियों से तैयार की जा रही इस मिठास को पहली बार इतने बड़े पैमाने पर वैश्विक खरीदारों के सामने प्रस्तुत किया गया है।

मेरठ के तीन प्रमुख उत्पादकों को मिला अंतरराष्ट्रीय मंच

ट्रेड शो में मेरठ के पारंपरिक खाद्य उत्पादों का प्रतिनिधित्व करने के लिए जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से तीन प्रतिष्ठित फर्मों का चयन किया गया है। इनमें एमएच स्वीट सेंटर से हाशिम, स्वीट शॉप से सद्दाम और रेवड़ी-गजक के पारंपरिक निर्माता यामीन शामिल हैं।

जिला प्रशासन और उद्योग विभाग की ओर से इन तीनों उद्यमियों को ट्रेड शो के ओडीओसी पवेलियन में निःशुल्क स्टाल आवंटित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य सूक्ष्म और मध्यम स्तर के पारंपरिक खाद्य निर्माताओं को बिचौलियों के बिना सीधे बड़े राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय वितरकों, निर्यातकों और खुदरा श्रृंखलाओं से जोड़ना है।

स्वाद के साथ पैकेजिंग और शेल्फ-लाइफ पर विदेशी खरीदारों का ध्यान

स्टाल पर केवल खुदरा बिक्री ही नहीं हो रही, बल्कि बड़े व्यापारिक सौदों की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया और खाड़ी देशों से आए व्यापारिक प्रतिनिधियों ने रेवड़ी और गजक का स्वाद लेने के बाद उत्पादों की निर्माण विधि, सामग्री की गुणवत्ता, शुद्धता, पैकेजिंग मानकों और विभिन्न मौसमों में उत्पाद के सुरक्षित रहने की अवधि (शेल्फ-लाइफ) के बारे में विस्तृत पूछताछ की।

  • गजक और रेवड़ी का आकर्षण: सर्दियों के मौसम में उत्तर भारत का प्रमुख पौष्टिक आहार मानी जाने वाली तिल और गुड़/चीनी से बनी गजक तथा खस्ता रेवड़ी विदेशी आगंतुकों के लिए एक बिल्कुल नया और अनूठा स्वाद अनुभव साबित हुई। स्वास्थ्य के प्रति सचेत खरीदारों ने इसमें प्रयुक्त प्राकृतिक गुड़ और तिल के पोषण मूल्य की विशेष सराहना की।

  • नानखटाई का पारंपरिक स्वरूप: मेरठ के हाशिम ने बताया कि शहर की नानखटाई का स्वाद दशकों से अनूठा रहा है। इसे चखने वाले खरीदारों ने बेकरी उत्पादों के वैश्विक बाजार में इसकी मांग की संभावनाओं पर चर्चा की और आधुनिक गिफ्ट हैंपर पैकेजिंग में इसकी उपलब्धता जानी।

स्थानीय उत्पादकों की प्रतिक्रिया: "लोकल से ग्लोबल बनने का बड़ा अवसर"

स्टाल संचालक सद्दाम ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सामान्यतः उनका कारोबार मेरठ और आसपास के जनपदों तक ही सीमित रहता था। लेकिन इंटरनेशनल ट्रेड शो में सीधे विदेशी मेहमानों और बड़े कॉर्पोरेट खरीदारों का आना एक अभूतपूर्व अनुभव है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की इस पहल ने छोटे पारंपरिक कारीगरों को वह दृश्यता दी है, जिसके लिए पहले लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे।

वहीं उत्पादक यामीन का कहना था कि लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया से उनका हौसला कई गुना बढ़ गया है। कई आगंतुकों ने उत्पाद का स्वाद चखने के बाद अपने व्यापारिक कार्ड साझा किए हैं और आगामी त्योहारी तथा शीतकालीन सीजन के लिए थोक आपूर्ति (बल्क ऑर्डर) को लेकर बातचीत शुरू की है। छोटे कारोबारियों का मानना है कि यदि उत्पाद की आधुनिक वैक्यूम पैकेजिंग और आकर्षक ब्रांडिंग पर थोड़ा और काम किया जाए, तो मेरठ की रेवड़ी और गजक को दुनिया के प्रमुख सुपरमार्केट्स तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है।

ओडीओसी नीति और उद्योग विभाग का रणनीतिक सहयोग

मेरठ के उपायुक्त उद्योग अमरेश पांडे ने इस संबंध में बताया कि शासन की मंशा केवल बड़े उद्योगों या भारी मशीनरी को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और कस्बाई स्तर पर पीढ़ियों से चल रहे पारंपरिक खाद्य हुनर को भी वैश्विक बाजार से जोड़ना है। इसी क्रम में ओडीओसी के तहत चयनित उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय ट्रेड शो में बिना किसी शुल्क के मंच उपलब्ध कराया गया है।

उन्होंने बताया कि विभाग का प्रयास है कि इन पारंपरिक उत्पादकों को भविष्य में बेहतर पैकेजिंग तकनीक, गुणवत्ता प्रमाणन (एफएसएसएआई मानक) और डिजिटल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जोड़ने के लिए जरूरी वित्तीय व तकनीकी सहायता दी जाए, ताकि स्थानीय स्वाद अंतरराष्ट्रीय ब्रांड का रूप ले सके।

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