UP Liquor Export Record: राष्ट्रीय औसत से साढ़े तीन गुना तेज बढ़ा यूपी का मदिरा निर्यात, महाराष्ट्र और पंजाब के बाद तीसरे पायदान पर पहुंचा प्रदेश

उत्तर प्रदेश की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति से राज्य का मदिरा निर्यात राष्ट्रीय औसत से 3.5 गुना तेज बढ़ा है। 4 माह में $1.83 करोड़ का निर्यात कर यूपी देश में तीसरे स्थान पर पहुंचा।

By INA News Desk
Sep 27, 2026 - 22:24
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UP Liquor Export Record: राष्ट्रीय औसत से साढ़े तीन गुना तेज बढ़ा यूपी का मदिरा निर्यात, महाराष्ट्र और पंजाब के बाद तीसरे पायदान पर पहुंचा प्रदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू की गई त्रिवर्षीय 'आबकारी निर्यात नीति (2026-29)' के दूरगामी और उत्साहजनक परिणाम राज्य के औद्योगिक और वित्तीय आंकड़ों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होने लगे हैं। उत्तर प्रदेश ने मदिरा और संबंधित उत्पादों के विदेशी निर्यात में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जहां प्रदेश की निर्यात वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत की तुलना में करीब साढ़े तीन गुना तेज दर्ज की गई है। चालू वित्तीय वर्ष के जुलाई 2026 माह में उत्तर प्रदेश से बोतलबंद मदिरा (Bottled Liquor) का कुल निर्यात 55.2 लाख अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के इसी महीने में दर्ज 29.1 लाख अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89.7 प्रतिशत की अप्रत्याशित वृद्धि दर्शाता है।

उल्लेखनीय है कि इसी समान अवधि के दौरान पूरे देश का समग्र मदिरा निर्यात 25.7 प्रतिशत की दर से बढ़ा। इस लिहाज से उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत के सामने बेहद मजबूत रहा। इस शानदार छलांग के साथ ही भारत के कुल मदिरा निर्यात में उत्तर प्रदेश की मासिक हिस्सेदारी 8.3 प्रतिशत से बढ़कर 12.5 प्रतिशत हो गई है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के दम पर उत्तर प्रदेश अब महाराष्ट्र और पंजाब के बाद देश में तीसरा सबसे बड़ा मदिरा निर्यातक राज्य बन गया है।

व्हिस्की और वोदका के निर्यात में अभूतपूर्व उछाल

राज्य से निर्यात होने वाले विभिन्न एल्कोहॉलिक बेवरेजेज में प्रीमियम स्पिरिट्स ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जबरदस्त पैठ बनाई है। आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि जुलाई माह में उत्तर प्रदेश से होने वाले व्हिस्की के निर्यात में 78.8 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई, जबकि वोदका के निर्यात में शत-प्रतिशत (100%) का उछाल दर्ज किया गया।

मात्रा (वॉल्यूम) के दृष्टिकोण से देखें तो उत्तर प्रदेश का निर्यात 230 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि इसी अवधि में राष्ट्रीय स्तर पर यह मात्रात्मक वृद्धि मात्र 90 प्रतिशत पर सीमित रही। यह आंकड़ा इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के उत्पादन में राज्य की आसवनियां (Distilleries) वैश्विक बाजार में अपनी ठोस पहचान बना रही हैं।

चार महीनों में 183 लाख डॉलर का निर्यात और अतिरिक्त विदेशी मुद्रा

चालू वित्तीय वर्ष के पहले चार महीनों (अप्रैल से जुलाई 2026) के संचयी आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश ने कुल 183 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.83 करोड़ डॉलर) का निर्यात दर्ज किया है। पिछले वर्ष की इसी समान अवधि में यह आंकड़ा 117 लाख डॉलर था। इस प्रकार इन चार महीनों में प्रदेश ने 56.4 प्रतिशत की विकास दर हासिल की, जबकि इस दौरान राष्ट्रीय निर्यात वृद्धि दर 20.4 प्रतिशत रही।

इस तेज विस्तार के माध्यम से राज्य ने 66 लाख अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा अर्जित कर देश के विदेशी मुद्रा भंडार को समृद्ध किया है। राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की हिस्सेदारी 9.7 प्रतिशत से सुधरकर 12.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जिससे प्रदेश चौथे स्थान से उछलकर तीसरे स्थान पर आसीन हो गया। इस अवधि में निर्यात उत्पादों की विविधता (एक्सपोर्ट लाइंस) 29 से बढ़कर 39 हो गई है और प्रदेश के उत्पादों की रवानगी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बंदरगाहों की संख्या 7 से बढ़कर 10 हो गई है।

नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और बंद संयंत्रों की बहाली

आबकारी निर्यात नीति के तहत दी जा रही प्रक्रियाओं की सुगमता और रियायतों ने बड़े कॉर्पोरेट घरानों को राज्य में पूंजी निवेश के लिए आकर्षित किया है। प्रमुख मदिरा निर्माता 'यूनाइटेड ब्रुअरीज' जनपद उन्नाव में और 'माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज' हरदोई में अपनी नई अत्याधुनिक उत्पादन इकाइयां स्थापित कर रही हैं। इसके साथ ही 'वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स' ने फर्रुखाबाद में अपनी यूनिट चालू की है, जबकि 'एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स' ने मुरादाबाद स्थित लंबे समय से बंद पड़े अपने संयंत्र का पुनरुद्धार कर उत्पादन पुनः शुरू कराया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 'कियान डिस्टिलरी' ने पेय आसवनी और ब्रुअरी की स्थापना के लिए औपचारिक आवेदन किया है।

आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने नीति की सफलता को किसानों की समृद्धि से जोड़ते हुए कहा कि इसका सीधा लाभ राज्य के अन्नदाताओं तक पहुंच रहा है। एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ENA) के उत्पादन में भारी तेजी आने से चीनी मिलों के उप-उत्पाद शीरे (Molasses) की मांग बढ़ी है, जिससे मिलों की तरलता में सुधार हुआ है। वहीं दूसरी ओर, ग्रेन-बेस्ड (अनाज आधारित) आसवनियों की क्षमता बढ़ने से मक्का और टूटे चावल जैसे मोटे अनाजों की सीधी खरीद में भारी वृद्धि हुई है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि नीति में यह कड़ा प्रावधान शामिल है कि यदि किसी आसवनी स्वामी या उससे संबंधित चीनी मिल पर किसानों के गन्ना मूल्य भुगतान का कोई भी वसूली प्रमाण-पत्र (RC) लंबित होगा, तो उसे इस निर्यात नीति के तहत मिलने वाली किसी भी छूट या प्रोत्साहन का लाभ नहीं दिया जाएगा।

पश्च-संबद्धता से कांच, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स को पंख

आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि जुलाई माह में जहां एक ओर देशभर में बोतलबंद मदिरा के कुल निर्यात में 11.7 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, वहीं इसके विपरीत उत्तर प्रदेश ने 55.2 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज कर सबको चौंका दिया। इसके चलते बोतलबंद श्रेणी में राज्य की राष्ट्रीय हिस्सेदारी 7.9 प्रतिशत से सीधे बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई।

डॉ. आदर्श सिंह के अनुसार, इस निर्यात वृद्धि का सकारात्मक प्रभाव पूरे सहायक पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ रहा है। कांच की बोतलों, एल्युमीनियम कैप्स, कॉर्क, लेबल्स, नालीदार कार्डबोर्ड डिब्बों (कोरोगेटेड बॉक्स), भंडारण और शीतलन परिवहन से जुड़े स्थानीय एमएसएमई उद्योगों को बड़े पैमाने पर नए ऑर्डर मिल रहे हैं। इसके अतिरिक्त बस्ती जनपद से 25 हजार कुंतल शीरे का अंतरराष्ट्रीय निर्यात सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिससे 5 लाख अमेरिकी डॉलर की पृथक विदेशी मुद्रा अर्जित की गई।

यूपी के मॉडल को केंद्र की टास्क फोर्स ने सराहा

उत्तर प्रदेश की इस आबकारी निर्यात नीति का प्रभाव अब केवल राज्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर भी एक अनुकरणीय मॉडल बन गया है। भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा विभिन्न राज्यों के लिए एक समान 'आदर्श निर्यात नीति' (Model Export Policy) तैयार करने हेतु एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसमें कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हैं। टास्क फोर्स ने हालिया समीक्षा बैठक में उत्तर प्रदेश की व्यावहारिक और पारदर्शी नीति की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रीय मॉडल नीति का मसौदा तैयार करते समय यूपी के सफल अनुभवों और नीतिगत ढांचे को मुख्य आधार बनाया जाए।

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