UP Mediation Training: बीमा अधिकारियों के लिए 40 घंटे का मध्यस्थता प्रशिक्षण शुरू, 2 लाख MACT मामलों का होगा त्वरित निस्तारण
यूपी विधिक सेवा प्राधिकरण में बीमा अधिकारियों के लिए 40 घंटे का मध्यस्थता प्रशिक्षण शुरू। 2 लाख से अधिक लंबित एमएसीटी मुकदमों के जल्द निस्तारण की पहल।
उत्तर प्रदेश में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के समक्ष लंबित मुकदमों के शीघ्र और सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (यूपीएसएलएसए) ने बड़ी पहल की है। लखनऊ स्थित प्राधिकरण सभागार में बीमा कंपनियों के नामित और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए 5 दिवसीय गहन मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है।

सर्वोच्च न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (एमसीपीसी) के तत्वावधान में आयोजित यह 40 घंटे का पाठ्यक्रम अधिकारियों को आधुनिक विवाद समाधान तकनीकों में दक्ष बनाएगा।

वर्तमान में प्रदेश भर के अधिकरणों में 2 लाख से अधिक दुर्घटना दावे लंबित हैं, जिनमें बीमा कंपनियां मुख्य पक्षकार हैं। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के कारण दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिजनों को क्षतिपूर्ति राशि प्राप्त करने में सालों का इंतजार करना पड़ता है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा के दिशा-निर्देशों के तहत शुरू हुए इस अभियान का मूल उद्देश्य अदालत के बाहर मुकदमों का आपसी सहमति से निपटारा कराना है।

कार्यक्रम के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के मास्टर प्रशिक्षक बीमा प्रतिनिधियों को बातचीत के आधुनिक तौर-तरीकों, पक्षकारों के बीच संवाद कायम करने और कानूनी पेचीदगियों को दूर कर व्यावहारिक समझौते तक पहुंचने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा ने अधिकारियों का आह्वान करते हुए कहा कि व्यक्तिगत दावेदार वित्तीय रूप से कमजोर होते हैं और वे लंबे मुकदमों का खर्च नहीं उठा सकते। ऐसे में संस्थागत रूप से मजबूत बीमा कंपनियों को निष्पक्ष और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाकर पीड़ित परिवारों को गरिमापूर्ण तरीके से समय पर आर्थिक राहत पहुंचानी चाहिए।
What's Your Reaction?



