UPITS 2026: ग्रेटर नोएडा में दिखा वाराणसी के युवा का कमाल, AI आधारित 'पेनटेस्टरेडार' से 15 मिनट में पकड़ में आएंगी डिजिटल सुरक्षा खामियां
ग्रेटर नोएडा यूपीआईटीएस में वाराणसी के युवा एथिकल हैकर मृत्युंजय सिंह का एआई आधारित साइबर सुरक्षा टूल 'पेनटेस्टरेडार' छाया रहा। पेटीएम के विजय शेखर शर्मा ने भी की सराहना।
उत्तर प्रदेश की आर्थिक और औद्योगिक पहचान में अब पारंपरिक शिल्पों के साथ-साथ अगली पीढ़ी के तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप्स भी तेजी से जुड़ते जा रहे हैं। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS-2026) में इस बदलते तकनीकी परिदृश्य की एक सशक्त मिसाल देखने को मिल रही है। धर्म और संस्कृति की प्राचीन नगरी वाराणसी से आए युवा साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और एथिकल हैकर मृत्युंजय सिंह द्वारा विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सुरक्षा मंच ‘पेनटेस्टरेडार’ (PentestRadar) इस वैश्विक आयोजन में तकनीकी दिग्गजों और निवेशकों का विशेष ध्यान आकर्षित कर रहा है।
यह अभिनव डिजिटल प्लेटफॉर्म किसी भी वेबसाइट, मोबाइल ऐप्लिकेशन या संगठनात्मक डिजिटल बुनियादी ढांचे में मौजूद सुरक्षा संबंधी कमियों और तकनीकी खामियों (वल्नरेबिलिटी) की स्वचालित तरीके से पहचान करने में सक्षम है। स्टार्टअप का दावा है कि यह सिस्टम न केवल 50 से अधिक श्रेणियों की जटिल सुरक्षा कमजोरियों को स्कैन करता है, बल्कि उनकी गंभीरता का वर्गीकरण करते हुए तकनीकी टीम को उसे तुरंत ठीक करने के लिए व्यावहारिक और विस्तृत सुधारात्मक रिपोर्ट भी उपलब्ध कराता है।
पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने की सराहना
पेनटेस्टरेडार के स्टॉल को उस समय और अधिक राष्ट्रीय सुर्खियां मिलीं, जब व्यापार मेले के उद्घाटन दिवस पर फिनटेक क्षेत्र की अग्रणी कंपनी 'पेटीएम' के संस्थापक विजय शेखर शर्मा विशेष रूप से इस युवा स्टार्टअप की कार्यप्रणाली को देखने पहुंचे। उन्होंने मंच के तकनीकी आर्किटेक्चर को समझा और वाराणसी से निकले इस युवा नवाचार की सराहना करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक तकनीकी उत्पाद की सफलता भर नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे उस मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम का प्रमाण है, जहां पूर्वांचल और अवध जैसे गैर-महानगरीय क्षेत्रों के युवा भी अत्याधुनिक वैश्विक चुनौतियों के समाधान तैयार कर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत कर रहे हैं।
नासा से लेकर मेटा तक: बग बाउंटी से मिला सुरक्षा अनुभव
संस्थापक मृत्युंजय सिंह का साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में यह सफर विशुद्ध जमीनी तकनीकी अन्वेषण से शुरू हुआ। उन्होंने वैश्विक स्तर पर एथिकल हैकिंग और बग हंटिंग के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वे नासा (NASA), गूगल (Google), मेटा (Meta) और एप्पल (Apple) जैसी दिग्गज वैश्विक संस्थाओं के आधिकारिक 'बग बाउंटी' कार्यक्रमों से जुड़े रहे।
नासा के डिजिटल नेटवर्क में सुरक्षा खामी को चिन्हित करने का उनका अनुभव विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जाता है। इस वैश्विक व्यावहारिक अनुभव ने उन्हें यह गहराई से सिखाया कि किसी भी डिजिटल प्रणाली पर साइबर अपराधियों के हमले से पहले ही उसकी संभावित कमजोरियों को ढूंढ निकालना कितना जीवन-मरण का प्रश्न हो सकता है।
जमीनी सरोकार: 'शैतान सेना' और '360 फ्लैश ड्राइव' का नवाचार
मृत्युंजय की तकनीकी यात्रा केवल सॉफ्टवेयर कोड तक सीमित नहीं रही। आम नागरिकों को डिजिटल ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के जाल से बचाने के लिए उन्होंने 'शैतान सेना' नामक एक जन-जागरूकता और सहायता अभियान की नींव रखी। साइबर अपराध के पीड़ितों की वास्तविक समस्याओं और वित्तीय क्षति को प्रत्यक्ष रूप से देखने के बाद उन्होंने छोटे कारोबारियों के लिए किफायती सुरक्षा समाधान विकसित करने का संकल्प लिया।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने हार्डवेयर सुरक्षा के क्षेत्र में '360 फ्लैश ड्राइव' नामक एक सुरक्षित डेटा स्टोरेज उपकरण भी डिजाइन किया, जिसमें अनधिकृत एक्सेस को रोकने के लिए अंतर्निहित सुरक्षा तंत्र जोड़े गए थे। इस उत्पाद के डिजाइन को भारतीय डिजाइन पेटेंट प्राप्त हुआ तथा ब्रिटेन में भी इसे डिजाइन स्वीकृति मिलने की जानकारी सामने आई है। इस हार्डवेयर प्रयोग ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और उन्हें एक संपूर्ण स्वचालित सॉफ्टवेयर उत्पाद की ओर अग्रसर किया।
एमएसएमई हैकाथॉन से मिली ₹15 लाख की वित्तीय उड़ान
एक व्यावहारिक विचार को व्यावसायिक उत्पाद में बदलने की दिशा में केंद्र सरकार का 'एमएसएमई आइडिया हैकाथॉन 4.0' एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ। राष्ट्रीय स्तर की इस कठिन प्रतियोगिता में मृत्युंजय के साइबर सुरक्षा मॉडल को शीर्ष नवाचारों में चुना गया। इसके तहत उत्पाद के प्रोटोटाइप निर्माण और तकनीकी विकास के लिए लगभग 15 लाख रुपये का नवाचार अनुदान स्वीकृत किया गया।
वर्तमान में मृत्युंजय सिंह अपने स्टार्टअप को आगे बढ़ाने के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के प्रतिष्ठित 'अटल इन्क्यूबेशन सेंटर' (AIC-BHU) से जुड़े हुए हैं। बीएचयू के इन्क्यूबेशन नेटवर्क से मिलने वाले मेंटरशिप, तकनीकी मार्गदर्शन और लैब संसाधनों ने पेनटेस्टरेडार को एक मजबूत और भरोसेमंद व्यावसायिक रूप दिया है।
10-15 दिनों की जटिल प्रक्रिया को 15 मिनट में समेटने का लक्ष्य
पारंपरिक तौर पर किसी भी आईटी कंपनी या वेबसाइट की विस्तृत पेनेट्रेशन टेस्टिंग (Penetration Testing) कराने में कुशल साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को 10 से 15 दिनों का समय लगता है, जो विशेष रूप से छोटे उद्योगों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई (MSME) इकाइयों के लिए वित्तीय रूप से अत्यधिक खर्चीला और समय लेने वाला होता है।
पेनटेस्टरेडार का मुख्य तकनीकी दावा यह है कि यह एआई एल्गोरिदम और ऑटोमेशन के संयोजन से इस पूरी प्रक्रिया को लगभग 15 मिनट के भीतर स्वचालित रूप से पूरा कर सकता है। यह प्रणाली एक पेशेवर एथिकल हैकर के सोचने और हमला करने के तरीके का सिमुलेशन करती है, जिससे प्रणाली की हर सूक्ष्म खामी मिनटों में उजागर हो जाती है। हालांकि, तकनीकी विश्लेषकों का यह भी कहना है कि वास्तविक व्यावसायिक उपयोग में किसी भी ऑटोमेटेड टूल की विश्वसनीयता उसकी सटीकता, फॉल्स पॉजिटिव्स की न्यूनतम दर और जटिल लॉजिकल सुरक्षा खामियों को पकड़ने की दक्षता पर ही तय होगी।
'लोकल टैलेंट से ग्लोबल समाधान' का मॉडल
उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में पेनटेस्टरेडार की यह सशक्त उपस्थिति इस बात का प्रतीक है कि राज्य अब केवल हस्तशिल्प, कालीन या कृषि उत्पादों का निर्यातक भर नहीं है, बल्कि यहां का युवा साइबर सुरक्षा, डेटा प्रोटेक्शन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक बाजार में भारत की ओर से अपनी सशक्त दावेदारी पेश कर रहा है।
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