देश का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बना यूपी: 24 हजार स्टार्टअप्स पंजीकृत, लखनऊ-नोएडा में बनेंगे यू-हब
उत्तर प्रदेश देश का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बनकर उभरा है। 24 हजार से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप्स के साथ लखनऊ और नोएडा में यू-हब स्थापित किए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश में युवाओं को नौकरी की तलाश करने वाले के बजाय रोजगार प्रदाता बनाने की दिशा में लागू की गई नीतियों के ठोस परिणाम सामने आने लगे हैं। प्रभावी औद्योगिक नीतियों, वित्तीय अनुदान और मजबूत संस्थागत सहयोग के दम पर उत्तर प्रदेश आज देश के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। केंद्र सरकार के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के पोर्टल पर राज्य के 24 हजार से अधिक स्टार्टअप्स पंजीकृत हो चुके हैं, जबकि 3,500 से ज्यादा उद्यम 'स्टार्ट-इन-यूपी' पहल से सीधे जुड़े हैं। यह व्यापक आंकड़ा राज्य में तेजी से फलते-फूलते तकनीकी और उद्यमशील परिवेश को दर्शाता है।
राज्य में स्टार्टअप संस्कृति को औपचारिक गति देने के लिए तैयार की गई नीतियों की सफलता के बाद, बदलती वैश्विक आवश्यकताओं को देखते हुए नई स्टार्टअप नीति-2026 अधिसूचित की गई है। इसके तहत प्रशासनिक तंत्र को प्रभावी बनाने के लिए 'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन निदेशालय' के गठन को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही डीप-टेक और शोध आधारित उद्यमों को विश्वस्तरीय मंच देने के लिए नोएडा और लखनऊ में अत्याधुनिक 'यू-हब' (डीप-टेक हब) विकसित करने की योजना को भी कैबिनेट से हरी झंडी मिल चुकी है। ये हब अत्याधुनिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और निवेशकों के बीच समन्वय का केंद्र बनेंगे।
राज्य सरकार ने केवल सामान्य स्टार्टअप्स तक सीमित न रहकर उच्च तकनीकी और अनुसंधान आधारित क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया है। इसके अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में आठ 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित करने की दिशा में कार्य हुआ है। वर्तमान में एसजीपीजीआई लखनऊ में मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हेल्थ टेक्नोलॉजी तथा आईआईटी कानपुर के नोएडा परिसर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। इसके अतिरिक्त एआई एवं मशीन लर्निंग, मेडिटेक, ड्रोन तकनीक, 5जी/6जी दूरसंचार, ब्लॉकचेन और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों के लिए सात नए केंद्रों को स्वीकृति दी जा चुकी है।
वित्तीय सहायता के मोर्चे पर अब तक प्रदेश में स्टार्टअप्स और इन्क्यूबेटर्स को कुल 38.34 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का संवितरण किया जा चुका है। इसमें 150 उद्यमों को भरण-पोषण भत्ता, 440 को सीड कैपिटल व विपणन सहायता और 111 स्टार्टअप्स को प्रोटोटाइप विकास अनुदान दिया गया है। साथ ही 75 इन्क्यूबेटर्स को पूंजीगत और परिचालन व्यय अनुदान उपलब्ध कराया गया है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने 107 स्टार्टअप्स और नौ इन्क्यूबेटर्स को प्रोत्साहन राशि प्रदान करते हुए योजनाओं को सुलभ बनाने के लिए 'यूपी स्टार्टअप मिशन' वेबसाइट का भी शुभारंभ किया।
इस तंत्र की सबसे बड़ी शक्ति महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी बनकर उभरी है, जहां पंजीकृत इकाइयों में से 11 हजार से अधिक उद्यमों का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। वर्तमान में राज्य के 88 मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटर्स आईटी, फिनटेक, कृषि और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचार को दिशा दे रहे हैं, जबकि 48 स्टार्टअप्स को सिडबी के माध्यम से प्रत्यक्ष वित्तीय पोषण मिल रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर 'टॉप परफॉर्मर' की रैंकिंग हासिल करने के बाद अब राज्य का लक्ष्य डीप-टेक और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनना है।
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