Uttarakhand PWD Action: टोंस नदी पुल की एप्रोच रोड टूटने पर शासन का बड़ा प्रहार, PWD के तीन इंजीनियर निलंबित
Uttarakhand PWD Suspension: उत्तराखंड शासन ने टोंस नदी पुल की एप्रोच रोड टूटने के मामले में लापरवाही बरतने पर लोक निर्माण विभाग (PWD) के तीन इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है।
- उत्तराखंड में टोंस पुल की एप्रोच रोड टूटने पर बड़ा एक्शन, PWD के तीन इंजीनियर निलंबित
- Uttarakhand PWD Suspension: टोंस नदी पुल एप्रोच रोड मामले में तीन इंजीनियर सस्पेंड, शासन की सख्त कार्रवाई
- Uttarakhand News: टोंस पुल की एप्रोच रोड धंसने पर शासन का कड़ा रुख, PWD के 3 इंजीनियरों पर गिरी गाज
- Uttarakhand PWD Action: टोंस पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने पर PWD के 3 अधिकारी निलंबित, जांच के आदेश
उत्तराखंड शासन ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों की लापरवाही और निर्माण गुणवत्ता में खामी पर बड़ा प्रशासनिक चाबुक चलाया है। शनिवार, 8 अगस्त 2026 को टोंस नदी पर बने महत्वपूर्ण पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होकर टूटने के मामले में शासन ने लोक निर्माण विभाग के तीन इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बारिश के कारण एप्रोच रोड धंसने से कई गांवों का संपर्क कट गया था और स्थानीय ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। शासन ने प्रथम दृष्टया निर्माण गुणवत्ता की अनदेखी और समय पर सुध न लेने का दोषी मानते हुए यह कड़ी कार्रवाई की है। इस निलंबन के साथ ही पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में मानसूनी बारिश के कारण नदियों के उफान पर होने से बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है। इसी क्रम में टोंस नदी पर निर्मित पुल की संपर्क सड़क (एप्रोच रोड) अचानक धंसकर नदी के तेज बहाव में बह गई। संपर्क मार्ग टूटने के कारण पुल से होने वाला यातायात पूरी तरह ठप हो गया, जिससे कई क्षेत्रों का संपर्क कट गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग के उच्च अधिकारियों ने तत्काल संज्ञान लिया। शुरुआती जांच में निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के साथ-साथ देखरेख में लापरवाही पाई गई। इसके बाद शासन ने विभाग के अधिशासी अभियंता (EE), सहायक अभियंता (AE) और कनिष्ठ अभियंता (JE) स्तर के तीन अधिकारियों को निलंबित करने का सख्त आदेश जारी कर दिया।
पहाड़ी इलाकों में हुई तेज बारिश के बाद टोंस नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया था। नदी के तेज बहाव के दबाव के कारण पुल को जोड़ने वाली एप्रोच रोड का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने जब सड़क को बहते देखा, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस और विभागीय अधिकारियों को दी। गनीमत यह रही कि एप्रोच रोड धंसने के समय कोई वाहन वहां से नहीं गुजर रहा था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
एप्रोच रोड टूटने की खबर जैसे ही शासन तक पहुंची, मुख्यमंत्री कार्यालय और लोनिवि सचिव ने विभागीय उच्च अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की। प्राथमिक जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि मानसून से पूर्व सुरक्षा उपाय और सुरक्षा दीवार (रिटेनिंग वॉल) का निर्माण सही मानकों के अनुरूप नहीं किया गया था। लापरवाही स्पष्ट होने पर संबंधित कार्य के प्रभारी अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता को उत्तरदायी ठहराते हुए तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। इसके साथ ही, क्षतिग्रस्त मार्ग को सुचारू करने और यातायात बहाल करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। भारी मशीनों को मौके पर तैनात कर सुरक्षात्मक कार्य शुरू कर दिया गया है।
शासन की इस सख्त कार्रवाई पर लोक निर्माण विभाग के सचिव ने स्पष्ट कहा कि बुनियादी ढांचे के निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य में बन रहे पुलों और सड़कों की गुणवत्ता से समझौता करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने शासन के इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि एप्रोच रोड का निर्माण हाल ही में कराया गया था या इसकी मरम्मत की गई थी, लेकिन पहली ही तेज बारिश में इसका बह जाना स्पष्ट रूप से निर्माण सामग्री की घटिया गुणवत्ता को दर्शाता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि केवल निलंबन ही नहीं, बल्कि ठेकेदार और दोषी अधिकारियों के खिलाफ वित्तीय वसूली की कार्रवाई भी की जानी चाहिए।
इस घटना का सीधा असर टोंस नदी के आसपास बसे दर्जनों गांवों की आवाजाही पर पड़ा है। स्कूली बच्चों, मरीजों और दैनिक यात्रियों को कई किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। आपातकालीन सेवाओं और दूध-सब्जी जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी बाधित हुई है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से इस कार्रवाई का बड़ा असर देखने को मिल रहा है। उत्तराखंड शासन द्वारा PWD के तीन अधिकारियों पर एक साथ की गई इस गाज से पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है। मानसून सीजन के दौरान राज्य भर में चल रहे अन्य निर्माण कार्यों और पुलों की सुरक्षा समीक्षा को लेकर अन्य अधिकारी भी अलर्ट मोड पर आ गए हैं।
राज्य सरकार ने लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को निर्देश दिया है कि वे प्रदेश भर में नदियों के किनारे बने पुलों और उनकी एप्रोच रोड का तुरंत सेफ्टी ऑडिट कराएं। इसके अलावा, टोंस पुल की एप्रोच रोड टूटने के मामले में एक जांच समिति गठित कर दी गई है, जो तय समय सीमा के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी। स्थानीय प्रशासन का प्रयास है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर क्षतिग्रस्त एप्रोच रोड की जगह अस्थायी मार्ग बनाकर पैदल और हल्के वाहनों की आवाजाही शुरू कराई जाए। स्थायी निर्माण कार्य मानसून का असर कम होने के बाद नए सुरक्षा मानकों के तहत शुरू किया जाएगा।
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