ग्रामीणों के लिए बड़ी खुशखबरी! आज से लागू हुआ नया कानून, साल में 125 दिन रोजगार के साथ मिलेगी ₹400 तक दिहाड़ी
केंद्र सरकार ने ग्रामीण इलाकों के लिए नया रोजगार कानून VB-G RAM G Act लागू कर दिया है। अब ग्रामीणों को साल में 100 की जगह 125 दिन काम और ₹400 तक दिहाड़ी मिलेगी।
- VB G RAM G Act: ग्रामीण भारत में आज से लागू हुआ नया रोजगार गारंटी कानून, अब मिलेंगे 125 दिन काम और अधिक मजदूरी
- विकसित भारत रोजगार गारंटी मिशन: मनरेगा से कितना अलग है नया VB-G RAM G कानून? जानें फायदे और मजदूरी दर
- देश के गांवों में आज से नया रोजगार कानून लागू, मनरेगा की जगह अब VB-G RAM G Act के तहत मिलेंगे 125 दिन काम
देश के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक और सामाजिक बदलाव लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने आज यानी 1 जुलाई 2026 से एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने देश भर के ग्रामीण क्षेत्रों में नया रोजगार कानून 'VB-G RAM G Act' (विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन) आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है। इस नए कानून के तहत अब प्रत्येक ग्रामीण परिवार को साल में कम से कम 125 दिन के सुनिश्चित रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। यह महत्वाकांक्षी योजना पूर्व में चल रही मनरेगा (MGNREGA) व्यवस्था में एक बड़ा और व्यापक सुधार है, जहां पहले केवल 100 दिनों के रोजगार का प्रावधान था। सरकार का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकना, स्थानीय स्तर पर आजीविका के मजबूत साधन मुहैया कराना और गांवों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। आज से लागू हुए इस कानून के बाद अब ग्रामीण विकास मंत्रालय जमीनी स्तर पर इसके क्रियान्वयन की निगरानी शुरू कर चुका है।
- नया कानून क्या है और इसके मुख्य प्रावधान
केंद्र सरकार द्वारा लागू किया गया 'VB-G RAM G Act' यानी "विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन", ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए तैयार किया गया एक व्यापक कानूनी ढांचा है। इस कानून की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसने ग्रामीण परिवारों के काम के अधिकारों का दायरा बढ़ा दिया है।
अब तक देश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन का रोजगार मिलता था, लेकिन अब नए कानून के तहत इसे स्थायी रूप से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इसके अलावा, इस योजना के अंतर्गत मिलने वाली दैनिक मजदूरी दरों में भी महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है, ताकि ग्रामीण मजदूरों की क्रय शक्ति और जीवन स्तर में सुधार हो सके।
- मनरेगा से तुलना
देश में लंबे समय से ग्रामीण रोजगार की समीक्षा और इसमें बदलाव की मांग की जा रही थी। वैश्विक और घरेलू आर्थिक बदलावों को देखते हुए केंद्र सरकार ने ग्रामीण परिवारों की न्यूनतम आय सुनिश्चित करने के लिए इस नए विधेयक को अमलीजामा पहनाया, जो आज 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गया है।
अगर इसकी तुलना पुरानी व्यवस्था (MGNREGA) से करें, तो यह बदलाव केवल कार्यदिवसों तक सीमित नहीं है:
कार्यदिवस: मनरेगा में जहां साल भर में 100 दिनों का काम सुनिश्चित था, वहीं VB-G RAM G Act में अब हर परिवार को 125 दिन काम मिलेगा। यानी सीधे तौर पर 25 दिनों का अतिरिक्त रोजगार।
मजदूरी दर: पुरानी व्यवस्था में विभिन्न राज्यों में मजदूरी दरें काफी कम थीं। नए कानून के तहत न्यूनतम मजदूरी को आकर्षक बनाया गया है और कई राज्यों में दिहाड़ी को ₹300 से बढ़ाकर ₹400 तक तय कर दिया गया है।
काम की प्रकृति: जहां पहले केवल श्रम आधारित कार्यों पर जोर था, वहीं इस मिशन में आजीविका के स्थायी स्रोतों और ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण को प्राथमिकता दी गई है।
इस नए कानून के लागू होने पर देश के आर्थिक विशेषज्ञों, समाजशास्त्रियों और नीति निर्माताओं की मिली-जुली और मुख्य रूप से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
ग्रामीण विकास मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि कार्यदिवसों में 25 दिनों की बढ़ोतरी और मजदूरी में करीब 25 से 33 फीसदी तक का इजाफा ग्रामीण बाजार में नकदी के प्रवाह (Liquidity) को बढ़ाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में एफएमसीजी (FMCG) और अन्य आवश्यक वस्तुओं की मांग में तेजी आएगी, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा। वहीं, जमीनी स्तर पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार के इस कदम की सराहना की है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी सचेत किया है कि योजना की सफलता पूरी तरह से इसके पारदर्शी क्रियान्वयन, समय पर मजदूरी भुगतान और भ्रष्टाचार मुक्त तंत्र पर निर्भर करेगी।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर इसका प्रभाव
VB-G RAM G Act का प्रभाव केवल रोजगार देने तक सीमित नहीं रहने वाला है। सरकार ने इस कानून के माध्यम से गांवों के 'टिकाऊ और स्थायी विकास' (Sustainable Development) का खाका खींचा है। इस योजना के तहत होने वाले कार्यों को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में देखा जा सकता है:
जल संरक्षण और संवर्धन: इसके अंतर्गत गांवों में नए तालाबों का निर्माण, पुराने जलाशयों का जीर्णोद्धार और जल संचयन प्रणालियों को विकसित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण भारत में सिंचाई की समस्याओं को दूर किया जा सके।
स्थायी बुनियादी ढांचा: ग्रामीण संपर्क सड़कों का निर्माण, पंचायत भवनों और कृषि भंडारण केंद्रों जैसी स्थायी सरकारी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाएगा।
पलायन पर रोक: गांवों में ही 125 दिन का रोजगार और ₹400 तक की अच्छी दिहाड़ी मिलने से रोजगार की तलाश में शहरों की ओर होने वाले अंधाधुंध पलायन में भारी कमी आने की उम्मीद है।
- कार्यान्वयन की चुनौतियां
आज से कानून लागू होने के बाद अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी राज्य सरकारों और स्थानीय ग्राम पंचायतों पर आ गई है। आगे की राह में सबसे महत्वपूर्ण कदम यह होगा कि सभी पात्र ग्रामीण परिवारों के जॉब कार्ड्स को नए नियमों के अनुरूप अपडेट किया जाए।
सरकार के सामने मुख्य चुनौती यह सुनिश्चित करने की होगी कि बढ़ी हुई मजदूरी दर का भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में बिना किसी देरी के पहुंचे। इसके लिए डिजिटल ट्रैकिंग और जियो-टैगिंग (Geo-tagging) जैसी तकनीकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। यदि इसका क्रियान्वयन सही ढंग से होता है, तो यह कानून विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
Also Read- "बिकाऊ है वफादारी..." शिवसेना के बागी सांसदों पर क्यों भड़क गए आदित्य ठाकरे? जानें पूरा मामला
What's Your Reaction?




