8th Pay Commission: क्या सिर्फ फिटमेंट फैक्टर तय करेगा वेतन? जानिए 283% बढ़ोतरी वाले मास्टर फॉर्मूले का गणित
8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में केवल फिटमेंट फैक्टर नहीं, बल्कि एक्रॉयड फॉर्मूला तय कर सकता है वेतन। जानिए बेसिक सैलरी में 283% वृद्धि की पूरी रिपोर्ट।
- 8th Pay Commission Salary Hike: एक्रॉयड फॉर्मूले से न्यूनतम बेसिक सैलरी में 283% का उछाल? समझें पूरा कैलकुलेशन
- 8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर और DA से अलग 'मास्टर फॉर्मूला' आया चर्चा में, बेसिक सैलरी में 283% की बड़ी छलांग संभव
- 8th Pay Commission Update: 8वें वेतन आयोग में न्यूनतम बेसिक सैलरी पर बड़ा प्रस्ताव, मास्टर फॉर्मूले से 283% तक बढ़ोतरी की चर्चा
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के संभावित वेतन ढांचे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आमतौर पर वेतन संशोधन को केवल फिटमेंट फैक्टर और महंगाई भत्ते (DA) के समायोजन के चश्मे से देखा जाता है, लेकिन वेतन आयोग की कार्यप्रणाली में वास्तविक आधार 'डॉ. एक्रॉयड फॉर्मूला' (Aykroyd Formula) होता है। कर्मचारी संगठनों की ओर से इस बार जीवन-यापन की मौजूदा लागत, पौष्टिक आहार, वस्त्र और सामाजिक आवश्यकताओं के आधार पर न्यूनतम वेतन की नई गणना की मांग की जा रही है। यदि इस मास्टर फॉर्मूले के अद्यतन मानकों को पूरी तरह स्वीकार किया जाता है, तो सातवें वेतन आयोग के 18,000 रुपये के मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे में लगभग 283 प्रतिशत तक की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज हो सकती है।
आगामी 8वें वेतन आयोग के गठन और उसकी सिफारिशों को लेकर कर्मचारी यूनियनों और वित्तीय विश्लेषकों के बीच मंथन जारी है। केंद्रीय कर्मचारियों का वेतन केवल किसी यादृच्छिक फिटमेंट गुणक से तय नहीं होता, बल्कि इसके निर्धारण की मूल जड़ 'एक्रॉयड फॉर्मूला' है, जिसे भारतीय श्रम सम्मेलन के 15वें सत्र में न्यूनतम मजदूरी के आधार के रूप में स्वीकार किया गया था। इस फॉर्मूले के तहत एक परिवार की बुनियादी जीवन आवश्यकताओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाता है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि यदि मौजूदा बाजार मूल्य और उपभोग सूचकांक को आधार बनाकर इस फॉर्मूले को लागू किया जाए, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी मौजूदा 18,000 रुपये से बढ़कर 50,000 रुपये के पार पहुंच सकती है, जो कि लगभग 283 प्रतिशत का सीधा उछाल होगा।
वेतन निर्धारण का मास्टर फॉर्मूला
वेतन आयोगों के इतिहास में न्यूनतम वेतन तय करने के लिए डॉ. वालेस एक्रॉयड के पोषण मानकों को आधार बनाया जाता रहा है। इसके अंतर्गत प्रति कार्यशील व्यक्ति के लिए 2,700 कैलोरी दैनिक आहार, प्रति वर्ष 66 मीटर कपड़ा, बुनियादी आवास किराया, बिजली, ईंधन और बच्चों की शिक्षा व चिकित्सा जैसी अनिवार्य आवश्यकताओं की लागत को जोड़ा जाता है। इसके बाद एक मानक परिवार (पति, पत्नी और दो बच्चे या 3 कंजम्पशन यूनिट) की कुल लागत निकालकर न्यूनतम वेतन तय होता है।
सातवें वेतन आयोग के समय भी इसी फॉर्मूले के आधार पर न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये तय की गई थी और 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। वर्तमान में महंगाई की वास्तविक दर और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में आए भारी बदलाव के कारण कर्मचारी यूनियनें मांग कर रही हैं कि एक्रॉयड बास्केट में शामिल वस्तुओं के अद्यतन खुदरा मूल्यों के आधार पर नई बेसिक पे तय की जाए। इसके अतिरिक्त, सातवें वेतन आयोग के संचित महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक पे में समाहित कर नए सिरे से फिटमेंट फैक्टर तय करने की प्रक्रिया भी इस फॉर्मूले से ही जुड़ी है।
कर्मचारी संगठनों की मांग
केंद्रीय कर्मचारी परिसंघ और नेशनल काउंसिल (JCM) के प्रतिनिधियों का कहना है कि सातवें वेतन आयोग के बाद से जीवन स्तर की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि फिटमेंट फैक्टर 2.86 से 3.68 के बीच होना चाहिए ताकि कर्मचारियों की वास्तविक क्रय शक्ति सुरक्षित रह सके। वहीं, वित्त मंत्रालय और आर्थिक विश्लेषकों का दृष्टिकोण राजकोषीय संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि न्यूनतम वेतन में अत्यधिक तीव्र वृद्धि से केंद्र और राज्य सरकारों के राजकोषीय घाटे पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए आयोग कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों और सरकार की वित्तीय क्षमता के बीच मध्य मार्ग अपना सकता है।
यदि एक्रॉयड फॉर्मूले के आधार पर न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ा सुधार होता है, तो इसका सीधा असर देश भर के 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों पर पड़ेगा। बेसिक वेतन बढ़ने से अन्य भत्ते जैसे मकान किराया भत्ता (HRA) और यात्रा भत्ता (TA) भी उसी अनुपात में बढ़ेंगे। इससे मध्यम वर्ग की डिस्पोजेबल आय में उल्लेखनीय इजाफा होगा, जिससे बाजार में उपभोक्ता मांग, ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट और रिटेल सेक्टर में भारी तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि, सरकारों को इसके लिए अपने गैर-योजनागत व्यय में व्यापक बजटीय प्रावधान करने होंगे।
वेतन आयोग अपनी प्रक्रिया के तहत विभिन्न मंत्रालयों, कर्मचारी संघों, उपभोक्ता संगठनों और अर्थशास्त्रियों से ज्ञापन प्राप्त करेगा। आयोग जीवन-यापन की लागत के वास्तविक आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद अपनी अंतिम सिफारिशों का मसौदा तैयार करेगा। इसके बाद कैबिनेट की उच्चस्तरीय व्यय समिति इन प्रस्तावों की वित्तीय व्यावहारिकता की समीक्षा करेगी। कैबिनेट से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही आधिकारिक पे-मैट्रिक्स और संशोधित न्यूनतम वेतन की अधिसूचना जारी की जाएगी।
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