बलिया: बांसडीह में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर संगोष्ठी, विशेषज्ञों ने माना भारत को वैश्विक संतुलन की धुरी
बलिया के बांसडीह पीजी कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने भारत की विदेश नीति, ब्रिक्स की सफलता और अमेरिका-ईरान संघर्ष के प्रभाव पर चर्चा की।
Reporter-Syed Asif Hussain Zaidi
बलिया जिले के बांसडीह स्थित स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भारत की विदेश नीति, सामरिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर केंद्रित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। संगोष्ठी के समापन सत्र में देश भर से आए शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने "युद्ध, व्यापार और सामाजिक आकलन - अमेरिका-ईरान संघर्ष का भारत सहित दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों पर आर्थिक एवं सामाजिक प्रभाव" विषय पर गहन विचार-विमर्श किया। सभी वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि मौजूदा भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत एक प्रमुख संतुलनकारी ताकत के रूप में सामने आया है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद ने मुख्य अतिथि के रूप में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स सम्मेलन की अभूतपूर्व सफलता ने वैश्विक मंच पर देश की साख को मजबूती दी है। भारत ने अपनी सशक्त कूटनीति के दम पर दुनिया के सामने अपनी प्राथमिकताओं और शर्तों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत हमेशा से सभी देशों के साथ शांतिपूर्ण और दोस्ताना व्यापारिक संबंध चाहता है, लेकिन अमेरिका द्वारा आयात शुल्क बढ़ाए जाने से आपसी विश्वास को चोट पहुंची है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन की बढ़ती एकतरफा हिस्सेदारी को भी उन्होंने एक गंभीर आर्थिक चुनौती बताया।

संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे सिंघानिया विश्वविद्यालय राजस्थान के पूर्व कुलपति डॉक्टर अशोक कुमार सिंह ने मानवीय मूल्यों और वैयक्तिक स्वतंत्रता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर इंसान को स्वाभिमान और आजादी के साथ जीवन जीने, खान-पान चुनने, अपनी आस्था के अनुसार धर्म का पालन करने तथा वैवाहिक निर्णय लेने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, जिसमें किसी भी बाहरी ताकत का दखल नहीं होना चाहिए।

विशिष्ट वक्ता के रूप में नई दिल्ली से आए भारतीय वैश्विक परिषद (आईसीडब्ल्यूए) के रिसर्च एसोसिएट डॉक्टर सुबोध चंद्र भारती ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक प्रतिबंधों और टैरिफ के दबाव के बावजूद भारत अपनी संप्रभुता और आर्थिक हितों से समझौता किए बिना निरंतर आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में बुद्धा पीजी कॉलेज कुशीनगर के प्राचार्य प्रोफेसर विनोद मिश्र ने मुख्य वक्ता के तौर पर अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के समीकरणों पर प्रकाश डाला।
इस अकादमिक आयोजन के संरक्षक और प्रबंध समिति के अध्यक्ष ललन सिंह तथा संयोजक व महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर फिरोज खां ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में प्राध्यापक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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