Sambhal: कामिल-फाजिल पर रोक से होगा बड़ा नुकसान: मौलाना वसी अशरफ बोले— मदरसे आतंक नहीं, देशभक्त पैदा करते हैं
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मदरसों में फाजिल और कामिल की पढ़ाई को लेकर लिए गए फैसले पर मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना वसी
उवैस दानिश, सम्भल
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मदरसों में फाजिल और कामिल की पढ़ाई को लेकर लिए गए फैसले पर मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना वसी अशरफ ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि फिलहाल इस संबंध में जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार मामला उच्च न्यायालय के 2024 के एक फैसले से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले अदालत के आदेश का अध्ययन किया जाएगा, उसके बाद ही विस्तृत टिप्पणी की जा सकेगी।
मौलाना वसी अशरफ ने कहा कि यदि कैबिनेट ने फाजिल और कामिल की पढ़ाई बंद करने का फैसला मंजूर किया है, तो इसका असर उन हजारों छात्रों और लोगों पर पड़ेगा जो इन डिग्रियों के आधार पर शिक्षा और रोजगार से जुड़े हुए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित न हो और उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि मदरसों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले अनेक छात्र आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। उनके मुताबिक हर छात्र के लिए विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करना संभव नहीं होता, इसलिए मदरसे उच्च शिक्षा का एक सुलभ माध्यम रहे हैं। यदि यह व्यवस्था समाप्त होती है तो गरीब छात्रों के सामने नई मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने मदरसों को आतंकवादियों की फैक्ट्री बताया था, मौलाना वसी अशरफ ने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि यह बयान भावनाओं में दिया गया प्रतीत होता है। उनका कहना था कि देश की आजादी की लड़ाई में अनेक उलेमा ने अपने प्राणों की आहुति दी और अंग्रेजों के अत्याचार सहे। उन्होंने दावा किया कि मदरसे देशभक्ति और शिक्षा का संदेश देते हैं, आतंकवाद का नहीं। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी में सुन्नी-सूफी मदरसों से पढ़ा कोई व्यक्ति आतंकवाद के मामलों में पकड़ा गया हो, ऐसा उदाहरण सरकार भी नहीं बता सकती। फाजिल और कामिल की पढ़ाई को लेकर सरकार के फैसले और इस पर उठी प्रतिक्रियाओं के बीच यह मुद्दा अब शिक्षा, रोजगार और राजनीति के स्तर पर नई बहस का विषय बनता नजर आ रहा है।
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