CJI Surya Kant: 'मैंने न मिलने की वजह बता दी है', विपक्षी सांसदों के ज्ञापन अनुरोध पर चीफ जस्टिस का दोटूक जवाब
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने विपक्षी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं, लेकिन विचाराधीन मामलों का समाधान प्रशासनिक ज्ञापन के बजाय न्यायिक प्रक्रिया से ही संभव है।
- विपक्षी नेताओं से मुलाकात से सीजेआई सूर्यकांत का इनकार, बोले, सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं, प्रशासनिक नहीं न्यायिक रास्ता अपनाएं
- विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट मार्च के बीच बोले सीजेआई: नागरिक हों या जनप्रतिनिधि, अदालत ज्ञापन के प्रशासनिक तरीके से नहीं न्यायिक प्रक्रिया से काम करती है
- राहुल गांधी और विपक्षी प्रतिनिधिमंडल के मिलने की अर्जी पर सीजेआई सूर्यकांत का रुख साफ, विचाराधीन मामलों पर प्रशासनिक चर्चा से किया परहेज
नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्षी दलों (INDIA ब्लॉक) के सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है। मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने इस निर्णय की पृष्ठभूमि को स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने विपक्षी नेताओं को न मिलने का कारण औपचारिक रूप से स्पष्ट कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने रेखांकित किया कि देश की शीर्ष अदालत के दरवाजे हर नागरिक और निर्वाचित प्रतिनिधि के लिए सदैव खुले हैं, बशर्ते विषय को प्रशासनिक मुलाकात के बजाय स्थापित न्यायिक प्रक्रिया के तहत लाया जाए।
- न्यायिक प्रक्रिया बनाम प्रशासनिक ज्ञापन: सीजेआई का रुख
मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय की ओर से दिए गए संदेश में स्पष्ट किया गया कि विपक्षी प्रतिनिधिमंडल जिन विषयों, विशेष रूप से चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं और अन्य विवादास्पद मुद्दों, पर चर्चा के लिए समय मांग रहा था, वे या तो नीतिगत हैं अथवा न्यायिक समीक्षा के दायरे में आते हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन सौंपने या चैंबर में चर्चा करने के बजाय न्यायिक कार्यवाही (Judicial Proceedings) के माध्यम से याचिका दाखिल करना ही संवैधानिक और उपयुक्त मार्ग है।
चीफ जस्टिस ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। किसी भी आम नागरिक या चुने हुए निकाय के सदस्य की याचिका का स्वागत है। हर भारतीय नागरिक को अदालत का रुख करने का अधिकार है, और हम उनकी बात सुनेंगे और कानून के तहत जो भी उचित होगा, वह करेंगे। लेकिन मैंने उन्हें मिलने से इनकार करने का कारण पहले ही स्पष्ट कर दिया है।’"
- विपक्ष का अनुरोध और विवाद
विपक्षी गठबंधन के घटक दलों और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया, मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी शिकायतों को लेकर मुख्य न्यायाधीश से व्यक्तिगत रूप से मिलकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपने का समय मांगा था। विपक्षी दलों ने संसद भवन और विजय चौक से सुप्रीम कोर्ट तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की योजना भी बनाई थी।
हालांकि, सीजेआई सचिवालय द्वारा भेजे गए लिखित संदेश में यह स्पष्ट कर दिया गया कि जब कोई मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन हो या न्यायिक परीक्षण का विषय बनता हो, तो सीजेआई से प्रशासनिक तौर पर मिलकर उस पर राजनीतिक ज्ञापन देना न्यायिक परंपराओं और निष्पक्षता के सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है।
- सुप्रीम कोर्ट मार्च पर टिप्पणी से परहेज
विपक्षी दलों द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक किए जा रहे विरोध मार्च और राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था के बीच मुख्य न्यायाधीश ने इस राजनीतिक आंदोलन पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने केवल संस्थागत गरिमा और संवैधानिक मर्यादा का हवाला देते हुए दोहराया कि अदालत का कार्य सड़क के आंदोलन या राजनीतिक प्रतिनिधिमंडलों से प्रभावित होकर निर्णय लेना नहीं है। यदि किसी दल या नागरिक को संवैधानिक अधिकारों अथवा चुनावी पारदर्शिता को लेकर कोई विधिक शिकायत है, तो वे उचित कानूनी प्रारूप में याचिका दाखिल करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
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