CJP Leaders Bail Conditions: '1 साल तक नहीं करेंगे शांति भंग...' मजिस्ट्रेट कोर्ट ने रखी शर्त, बॉन्ड भरने के बाद रिहा हुए अभिजीत दीपके और साथी
दिल्ली की मजिस्ट्रेट अदालत ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया है। पढ़ें कानूनी शर्तें और विवरण।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके, संगठन के सह-संयोजक सौरव दास और मुख्य वार्ताकार आशुतोष रांका को मजिस्ट्रेट अदालत ने सशर्त रिहा कर दिया है। अदालत ने निवारक हिरासत (Preventive Detention) के तहत पेश किए गए तीनों नेताओं को निजी मुचलके (Personal Bond) पर रिहा करते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी शर्त लगाई है। आदेश के अनुसार, इन नेताओं को शपथ पत्र और मुचलका भरना पड़ा है कि वे अगले एक वर्ष तक राजधानी या देश में किसी भी प्रकार से शांति भंग नहीं करेंगे और कानून-व्यवस्था के सामान्य संचालन में बाधा नहीं डालेंगे।
शनिवार को मुंबई से दिल्ली पहुंची इंडिगो की नियमित उड़ान से रनवे पर ही हिरासत में लिए जाने के 24 घंटे बाद तीनों नेताओं को रविवार, 11 अक्टूबर की सुबह सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। दिल्ली पुलिस ने अदालत के समक्ष दलील दी थी कि लुटियंस दिल्ली के अति-संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्र में बिना किसी पूर्व प्रशासनिक अनुमति के भारी भीड़ जुटाने और सार्वजनिक व्यवस्था को खतरे में डालने की आशंका के मद्देनजर यह निवारक कार्रवाई की गई थी।
मजिस्ट्रेट अदालत का आदेश: क्या हैं रिहाई की शर्तें?
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुना। बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि किसी भी गैर-जमानती या गंभीर संज्ञेय अपराध के सबूत के बिना केवल आशंका के आधार पर नागरिकों को अनिश्चितकाल के लिए कैद नहीं रखा जा सकता।
मजिस्ट्रेट ने कानूनी प्रावधानों की समीक्षा करते हुए निम्नलिखित शर्तों के आधार पर रिहाई का निर्देश दिया:
-
शांति बनाए रखने का बॉन्ड (Peace Bond): भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/129 (पूर्ववर्ती सीआरपीसी धारा 107/116) के अंतर्गत तीनों नेताओं को औपचारिक बॉन्ड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि वे आगामी एक वर्ष की अवधि के दौरान किसी भी गैर-कानूनी जमावड़े या शांति भंग करने वाली गतिविधि में संलिप्त नहीं होंगे।
-
समन पर उपस्थित होने की बाध्यता: जांच अधिकारी या संबंधित अदालत द्वारा किसी भी जांच या सत्यापन के लिए बुलाए जाने पर उन्हें सहयोग करना होगा।
-
शर्तों के उल्लंघन पर कार्रवाई: यदि इस एक वर्ष की अवधि के दौरान शांति भंग करने या कानून तोड़ने की कोई पुनरावृत्ति पाई जाती है, तो जमा कराया गया मुचलका जब्त किया जा सकता है और उनके खिलाफ प्रत्यक्ष कानूनी धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है।
रिहाई के बाद CJP का रुख: 'सशर्त रिहाई, लेकिन विचार अडिग'
अदालत से राहत मिलने के बाद CJP नेतृत्व ने संकेत दिया है कि शांति बनाए रखने के विधिक वचन का अर्थ यह नहीं है कि वे लोकतांत्रिक रूप से सवाल पूछना बंद कर देंगे।
-
'कॉकरोच कभी मरते नहीं': अदालत परिसर से बाहर आने के कुछ ही समय बाद CJP के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से यह चर्चित व्यंग्यात्मक पंक्ति पोस्ट की गई। संगठन का कहना है कि यह उनकी विचारधारा और असहमति की आवाज की दृढ़ता का प्रतीक है।
-
दोपहर 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस: संगठन के प्रमुख रणनीतिकार आशुतोष रांका ने पुष्टि की है कि रविवार दोपहर 2 बजे राष्ट्रीय राजधानी में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है। इसमें संगठन अपनी भावी रणनीति, चुनाव आयोग के खिलाफ उनके मूल दस्तावेज और फ्लाइट के अंदर हुई पुलिसिया कार्रवाई के कानूनी पहलुओं को देश के सामने रखेगा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और कानूनी संदर्भ
गौरतलब है कि शनिवार को ही सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इस मामले पर तल्ख मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि "मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।"
कानूनी जानकारों का कहना है कि पुलिस द्वारा प्रिवेंटिव डिटेंशन की धाराओं का इस्तेमाल किसी नागरिक को दंडित करने के लिए नहीं, बल्कि तात्कालिक कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। एक बार जब 10 अक्टूबर का प्रस्तावित प्रदर्शन समय बीत गया और खतरा टल गया, तो अदालत के पास शांति बनाए रखने का मुचलका लेकर उन्हें रिहा करने के अलावा कोई अन्य कानूनी आधार नहीं था।
दिल्ली में सामान्य स्थिति की ओर कदम
CJP नेताओं और यूट्यूबर ध्रुव राठी की रिहाई के साथ ही मध्य दिल्ली और नई दिल्ली क्षेत्र में सुरक्षा पाबंदियों को तेजी से हटाया जा रहा है।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राजीव चौक, कश्मीरी गेट और केंद्रीय सचिवालय सहित बंद किए गए 45 से अधिक स्टेशनों के गेट्स को आम यात्रियों के लिए खोल दिया है। वहीं, उत्तर रेलवे द्वारा निरस्त की गई 170 लोकल और पैसेंजर ट्रेनों के परिचालन को भी रविवार शाम तक पटरी पर लाने की तैयारी है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शहर में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और सभी प्रमुख स्थानों पर शांति बनी हुई है।
What's Your Reaction?