Bharat Taxi Launch: सीएम योगी ने किया 'भारत टैक्सी' और 'कृषक समृद्धि योजना' का शुभारंभ, चालकों को मिला शेयर प्रमाणपत्र और बीमा
लखनऊ में सीएम योगी आदित्यनाथ ने भारत टैक्सी और कृषक समृद्धि योजना का शुभारंभ किया। सारथियों को शेयर प्रमाणपत्र, किसानों को ऋण चेक और प्रमुख संस्थाओं से एमओयू संपन्न हुए।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सहकारिता, परिवहन और कृषि क्षेत्र के सशक्तीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल की गरिमामयी उपस्थिति में 'भारत टैक्सी' सेवा और 'मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना' का औपचारिक एवं भव्य शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से जुड़े चालकों (सारथियों), किसानों तथा विभिन्न सहकारी संस्थाओं को बड़े पैमाने पर लाभान्वित किया गया।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'भारत टैक्सी' योजना से जुड़ने वाले शुरुआती पांच चालकों सुमनदीप कौर, अमित कुमार अग्रवाल, अमरीश सोनकर, शशांक पांडेय और पंकज कुमार वर्मा को अपने हाथों से आधिकारिक शेयर प्रमाणपत्र प्रदान किए। साथ ही, कृषि क्षेत्र को वित्तीय संबल देने वाली कृषक समृद्धि योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को ऋण के चेक वितरित किए गए।
कृषक समृद्धि योजना के लाभार्थियों को मिला ऋण चेक
अन्नदाता किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने और दीर्घकालिक कृषि ऋणों को सुलभ बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना के अंतर्गत मंगलवार को प्रमुख किसानों को ऋण स्वीकृत किए गए। योजना के तहत अनिल कुमार सिंह को 6 लाख रुपये, अंकुश कुमार को 5 लाख रुपये, अवधेश कुमार को 4 लाख 50 हजार रुपये, बाबूलाल राजपूत को 3 लाख रुपये और संजय कुमार को 2 लाख रुपये का ऋण चेक सौंपा गया।
इस अवसर पर सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जेपीएस राठौर ने उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम (Warehousing Corporation) की ओर से निगम के लाभांश के रूप में 2 करोड़ 69 लाख रुपये का चेक मुख्यमंत्री को सुपुर्द किया, जो राज्य के सहकारी उपक्रमों की सुधरती वित्तीय सेहत का प्रमाण है।
प्रमुख संस्थाओं और भारत टैक्सी के मध्य ऐतिहासिक एमओयू
कार्यक्रम का एक अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण भारत टैक्सी प्लेटफॉर्म और राज्य की प्रमुख परिवहन एवं सुरक्षा संस्थाओं के बीच हुए समझौतों (MoUs) का आदान-प्रदान रहा। भारत टैक्सी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉ. हिमांशु ने मंच पर तीन प्रमुख संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ औपचारिक अनुबंध किए:
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अडानी एयरपोर्ट (लखनऊ): एयरपोर्ट परिसर में यात्रियों को सुगम और पारदर्शी कैब सेवा उपलब्ध कराने के लिए चीफ कमर्शियल ऑफिसर शिव मोहन सिंह के साथ समझौता हुआ।
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उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC): मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों की इंटर-मॉडल कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए प्रबंध निदेशक सुशील कुमार के साथ एमओयू का आदान-प्रदान किया गया।
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यातायात एवं सड़क सुरक्षा (लखनऊ): शहर में सार्वजनिक परिवहन सुरक्षा और नियम अनुपालन को बढ़ावा देने के लिए डीआईजी ट्रैफिक अरविंद कुमार मौर्य के साथ समन्वय समझौता संपन्न हुआ।
सहकारिता विभाग के पुनरुत्थान पर वक्ताओं के विचार
समारोह को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि सहकारिता आंदोलन कभी समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की रीढ़ हुआ करता था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों में यह विभाग अपनी मूल और जनहितकारी भावना से भटक गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में सहकारी बैंकों और समितियों को वित्तीय रूप से पुनर्जीवित किया गया है, जिसका सीधा लाभ किसानों और मध्यम वर्ग को मिल रहा है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे 'भारत टैक्सी' को अपनाएं और इसके ब्रांड एंबेसडर बनकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करें।
केंद्रीय सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल ने अपने संबोधन में कहा कि लखनऊ के साथ-साथ गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज में भी भारत टैक्सी की सेवाएं एक साथ शुरू हो रही हैं। उन्होंने बताया कि इस अभिनव डिजिटल को-ऑपरेटिव मोबिलिटी मॉडल के माध्यम से देश के 15 शहरों में अब तक ड्राइवर भाइयों-बहनों के खातों में 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बिना किसी बिचौलिए के सीधे पहुंच चुकी है। उत्तर प्रदेश में अकेले लगभग 40 हजार चालकों ने इस प्लेटफॉर्म पर अपना पंजीकरण करा लिया है, जो इस योजना की जनस्वीकार्यता को दर्शाता है।
सहकारिता और मोबिलिटी का नया क्षितिज
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत टैक्सी और कृषक समृद्धि योजना का यह एकीकृत मॉडल उत्तर प्रदेश के आर्थिक परिदृश्य में मील का पत्थर साबित होगा। एक तरफ जहां चालकों को जीरो कमीशन और पांच लाख रुपये का दुर्घटना व स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा कवच मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ किसानों को बेहद कम ब्याज दर (6 प्रतिशत वार्षिक) पर दीर्घकालिक ऋण मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में पूंजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार के इन प्रयासों से यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक व्यवस्थाओं से निकलकर डिजिटल, पारदर्शी और जन-केंद्रित सहकारिता के नए युग में प्रवेश कर चुका है।
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