Saharanpur: ‘क्लीन चिट’ पर मंडलायुक्त का बड़ा प्रहार, रिपोर्ट वापस लेकर दोबारा जांच के आदेश से मचा हड़कंप

परिवहन विभाग में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े चर्चित मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। एआरटीओ (प्रशासन) मानवेन्द्र

Aug 10, 2026 - 12:11
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Saharanpur: ‘क्लीन चिट’ पर मंडलायुक्त का बड़ा प्रहार, रिपोर्ट वापस लेकर दोबारा जांच के आदेश से मचा हड़कंप
  • क्लीन चिट' पर मंडलायुक्त का बड़ा प्रहार
  • जल्दबाजी में तैयार रिपोर्ट वापस, दोबारा जांच के आदेश से मचा हड़कंप
  • एआरटीओ मानवेन्द्र प्रताप सिंह व आरआई रोहित कुमार सिंह को राहत देने वाली रिपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल

सहारनपुर। परिवहन विभाग में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े चर्चित मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। एआरटीओ (प्रशासन) मानवेन्द्र प्रताप सिंह एवं आरआई रोहित कुमार सिंह को राहत देने वाली जांच रिपोर्ट पर मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार ने गंभीर आपत्ति दर्ज करते हुए उसे वापस कर दिया है। मंडलायुक्त ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता का पक्ष सुने बिना तथा उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों का समुचित परीक्षण किए बिना प्रस्तुत की गई जांच रिपोर्ट स्वीकार नहीं की जा सकती।

       मुख्य बिंदु:
सूत्रों के अनुसार शासन के निर्देश पर गठित जांच समिति ने बेहद कम समय में जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी थी, जिसमें एआरटीओ (प्रशासन) मानवेन्द्र प्रताप सिंह एवं आरआई रोहित कुमार सिंह को आरोपों से मुक्त बताया गया। लेकिन मंडलायुक्त द्वारा रिपोर्ट का परीक्षण किए जाने पर जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
बताया जा रहा है कि जांच के दौरान शिकायतकर्ता मोहम्मद रागिब को न तो बुलाया गया और न ही उनका पक्ष दर्ज किया गया। इसी कारण मंडलायुक्त ने रिपोर्ट वापस करते हुए निर्देश दिए कि शिकायतकर्ता की सुनवाई कर, उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों की बिंदुवार जांच के बाद नई रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
'जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति' का आरोप
शिकायतकर्ता मोहम्मद रागिब का आरोप है कि पिछले लगभग छह महीने से मामला लगातार लंबित है, लेकिन अब तक न तो किसी जिम्मेदार अधिकारी पर प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की गई। उनका कहना है कि जांच केवल खानापूर्ति बनकर रह गई और जल्दबाजी में रिपोर्ट तैयार कर अधिकारियों को क्लीन चिट देने का प्रयास किया गया।
शिकायतकर्ता ने यह भी मांग उठाई है कि केवल आरोपित अधिकारियों की ही नहीं, बल्कि जांच करने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि पहली जांच निष्पक्ष होती तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आते और शिकायतकर्ता का पक्ष भी दर्ज किया जाता।
शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तथा दिल्ली स्तर तक विभिन्न सक्षम प्राधिकारियों को भेज रखी है। उनका कहना है कि यह पूरी लड़ाई व्यक्तिगत नहीं बल्कि जनहित में लड़ी जा रही है, ताकि परिवहन विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार उजागर हो सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि वरिष्ठ अधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना के विभाग में अपनी टीम के साथ औचक निरीक्षण करें तो विभाग में सक्रिय कथित दलालों और बाहरी व्यक्तियों की भूमिका भी सामने आ सकती है। शिकायतकर्ता का दावा है कि विभाग में कुछ लोग खुलेआम सक्रिय हैं और यदि निष्पक्ष कार्रवाई की जाए तो ऐसे कई लोगों को एक साथ पकड़ा जा सकता है। उन्होंने मांग की है कि विभाग में सक्रिय सभी कथित दलालों, उनसे जुड़े व्यक्तियों तथा पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए, जिससे आम जनता को राहत मिल सके और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
इतनी शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, आखिर किसका संरक्षण?'
शिकायतकर्ता मोहम्मद रागिब का कहना है कि उन्होंने परिवहन विभाग में कथित भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं से संबंधित अनेक शिकायतें दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ उत्तर प्रदेश शासन, विभिन्न मंत्रियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तथा दिल्ली स्तर तक भेजी हैं। इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायतकर्ता का दावा है कि विभाग में यह चर्चा आम है कि कुछ अधिकारी यह कहते हैं कि "पता नहीं कितने शिकायतकर्ता आते हैं, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।" शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि वास्तव में ऐसी मानसिकता है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है और इससे आम जनता का प्रशासनिक व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कुछ अधिकारियों का मनोबल इतना बढ़ा हुआ क्यों दिखाई देता है और उन्हें किसका संरक्षण प्राप्त है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं और उनके कार्यकाल में अनेक भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा चुकी है। उनका कहना है कि अब इस मामले में भी जनता की निगाह शासन और प्रशासन पर टिकी हुई है कि क्या दोबारा होने वाली जांच निष्पक्ष होगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी अधिकारियों, विभाग में सक्रिय कथित दलालों तथा पूरे नेटवर्क के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
अब सबकी निगाह दोबारा होने वाली जांच पर
मंडलायुक्त द्वारा जांच रिपोर्ट वापस किए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अब नई जांच में शिकायतकर्ता का पक्ष दर्ज किया जाएगा और उपलब्ध दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर नई रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी, क्या शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और क्या परिवहन विभाग में कथित भ्रष्टाचार, अधिकारियों की भूमिका तथा विभाग में सक्रिय बताए जा रहे दलालों के नेटवर्क पर भी कार्रवाई होगी। इन सभी सवालों के जवाब अब दोबारा होने वाली जांच और शासन के आगामी निर्णय पर निर्भर करेंगे।

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