Special Article: चुनाव आयोग के विरुद्ध अभियान, लोकतंत्र के विरुद्ध षड्यंत्र है 

सात राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों तथा केंद्र सरकार द्वारा एक देश - एक चुनाव तथा परिसीमन की तैयारियों के मध्य संपूर्ण विपक्ष चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

By INA News Desk
Sep 28, 2026 - 19:15
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Special Article: चुनाव आयोग के विरुद्ध अभियान, लोकतंत्र के विरुद्ध षड्यंत्र है 

लेखक: मृत्युंजय दीक्षित

सात राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों तथा केंद्र सरकार द्वारा एक देश - एक चुनाव तथा परिसीमन की तैयारियों के मध्य संपूर्ण विपक्ष चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध लामबंद होकर उग्र रूप से हमलावर है। चुनाव आयुक्तों के मध्य एसआईआर व अन्य मुद्दों पर विगत  10 माह में लिए गए निर्णयों को लेकर उनमें परस्पर मतभेद को लेकर  इंयिन एक्सप्रेस अंग्रेजी समाचार पत्र  में एक रिपेार्ट प्रकाशित हुई। रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग में 10 महीने में 14 बार दो चुनाव आयुक्तों  ने ज्ञानेश कुमार को असहमति का पत्र लिखा, बस इसी असहमति को  विवाद का नाम देकर इंडी ब्लॉक के दल इतना आगे बढ़ चुके हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाने के लिए तैयार हैं। विरोध का पागलपन यहाँ तक बढ़ गया है कि कुछ लोग उन्हें फांसी देने तथा गोली तक मारने के बयान दे रहे हैं। इंडी ब्लॉक के दल यह भी मांग कर रहे हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाकर एसआईआर प्रक्रिया को रद्द किया जाए और दोबारा चुनाव कराये जाएं। इस विवाद में आप की प्रॉक्सी सहयोगी सीजेपी भी कूद पड़ी है और जंतर-मंतर 2.0 की धमकी दे रही है। 
कांग्रेस नेता राहुल गांधी  ने अपनी पत्रकार वार्ता मे एक पोस्टर चिपकाया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित उद्योगपति गौतम अडानी की भी तस्वीरे थी। राहुल गांधी ने इन सभी को ग़द्दार कहा है। अब तक 94 चुनाव हार चुके राहुल गांधी को कहना है कि वह चुनाव हारे नही उन्हें साजिश के तहत हराया जाता रहा। राहुल गांधी व विपक्ष का आरोप है कि 2024 के चुनावों के बाद हरियाणा, दिल्ली और  महाराष्ट्र के चुनावों मे वोट चोरी हुईं जबकि कि बिहार और बंगाल में एसआईआर के माध्यम से विपक्ष को चुनाव हरवा दिया गया।  कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन किए हैं। पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर भी पहुंच गया है और बॉम्बे हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर दी गई है। 
वर्ष 2014 से लेकर अभी  राहुल गांधी  के नेतृत्व में कांग्रेस ने लगभग हर चुनाव में पराजय का मुंह देखा है। 2024 के बाद हुए चुनावों  हरियाणा, दिल्ली, बिहार और महाराष्ट्र में भी कांग्रेस और इंडी गठबंधन का लगभग सफाया हो गया। बिहार से आरम्भ हुए एसआईआर के खिलाफ राहुल तथा तेजस्वी ने यात्रा भी निकाली थी किंतु बिहार की जनता ने विपक्ष को स्पष्ट रूप से हरा दिया था। तब से राहुल गांधी बार बार यह मुद्दा उठाकर देश में संशय और अराजकता का वातावरण बना रहे हैं। 
इंडियन एक्सप्रेस समाचार पत्र लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व व केंद्र सरकार के खिलाफ तथ्यहीन समाचार  प्रकाशित कर रहा है। चुनाव आयोग में मतभेद को लेकर प्रकाशित समाचार उसी अभियान का एक अंग है। इससे पूर्व इस अखबार ने एथेनॉल को लेकर झूठी खबरें प्रकाशित की थी। 
इस बीच चुनाव आयोग ने कहा है कि वह एक बहु सदस्यीय संवैधानिक निकाय है। लिखित नोट्स, सुझाव, तकनीकी राय ओैर आंतरिक मतभेद उसकी सामान्य कार्यशैली का हिस्सा हैं। भिन्न मत और अवलोकन किसी भी संस्था में विचार विमर्श का हिस्सा होते हैं किन्तु अंतिम निर्णय पूरे आयोग की सर्वसम्मत या बहुमत से लिए जाते हैं। चुनाव आयोग ने व्यापक रूप से बता दिया है कि सभी फैसले वैधानिक प्रक्रियाओं और सर्वसम्मति के अंतर्गत ही हुए हैं। लोकतंत्र में किसी भी संस्था में आतंरिक मतभेद होना स्वाभाविक ही है किन्तु उन मतभेदों को आधार बनाकर जिस प्रकार की राजनीति की जा रही और जिस शब्दावली का प्रयोग किया जा रहा है जैसे कि फांसी दो, गोली मार दो, सड़क पर घसीटकर पटक कर मारो आदि यह न केवल असंवैधानिक वरन आपराधिक कृत्य है। 
राहुल गांधी आजकल एंटी इनकंबेंसी पर भी अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं कि सभी प्रधानमंत्रियों और राज्य मुख्यमंत्रियों के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी का दौर आया किंतु यह दौर  बीजेपी के लिए क्यों नहीं आ रहा?  इस बात को वो वोट चोरी से जोड़कर भाजपा पर वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं साथ ही वह यह भी आरोप लगा रहे हैं कि सभी संस्थाओं पर भाजपा व संघ का नियंत्रण हो गया। सत्ता में आने के लिए बेचैन कांग्रेस पार्टी ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव -2026 में जिस त्वरित गति से अपने पुराने सहयोगी द्रमुक का साथ छोड़ा और उसकी बिना अनुमति लिए थलपति विजय की सरकारी में सहयोगी बन गई उसमें कांग्रेस की अवसरवादिता को सभी ने देखा है। 
भारतीय जनता पार्टी ने भी कमर कस ली है और विपक्ष को तथ्यों के साथ उत्तर दे रही है। कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और कांग्रेस से उनकी नजदीकियों को लेकर सदा सवाल उठते रहे हैं। कांग्रेस को उन पुराने सवालों का उत्तर तो देना ही पडे़गा। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट चुनाव आयुक्तों के मध्य मतभेद की खबरों को ही उजागर कर रही है और केवल मतभेदों को ही वोट चोरी का सबूत नहीं माना जा सकता है। 
भारत में अभी तक कुल 25 चुनाव आयुक्त नियुक्त हुए हैं और अधिकांश चुनाव आयुक्तों का कांग्रेस के प्रति लगाव रहा है। कई चुनाव आयुक्त बाद में  कांग्रेस द्वारा राज्यसभा सांसद और मंत्री तक बनाए गए। इनमें सबसे चर्चित नाम टी. एन. शेषन का रहा। चुनाव आयोग में दो आयुक्तों की नियुक्ति भी उन्हीं के समय में प्रारंभ हुई थी । तब कहा गया था कि टी. एन. शेषन तानाशाह थे। शेषन ने डॉ. एम.एस. गिल तथा जी वी जी कृष्णमूर्ति की नियुक्ति का कड़ा विरोध किया था और सुप्रीम कोर्ट  तक चले गए गये थे । शेषन का कहना था कि सरकार ने उनकी शक्तियों को कमजोर करने के लिए ही दो आयुक्तों की नियुक्ति की है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि चुनाव आयोग बहुमत के आधार पर ही चलेगा। बाद में वही टी एन शेषन  कांग्रेस में शामिल हो गए थे और गांधीनगर से लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव भी लड़े थे। चुनाव आयुक्त नवीन चावला के लिए स्वयं  सोनिया गांधी अड़ गई थीं । बाद में एम. एस. गिल भी कांग्रेस में शामिल हो गए थे, वह दो बार राज्यसभा में गए और कैबिनेट मंत्री भी बने। जहाँ तक ज्ञानेश कुमार जी की बात है तो तो 2014, 2019 और 2024 के चुनावों के समय वह चुनाव आयुक्त नहीं  थे और उस समय भी  भाजपा लगातार चुनाव  जीत रही थी। 
कांग्रेस व इंडी गठबंधन के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि आज देश के सभी चुनाव हिंसा रहित हो रहे हैं और दोबारा मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। एक समय था जब बैलेट बॉक्स लूट लिए जाते थे और मतगणना केन्द्रों  से विरोधी  दलों के कार्यकर्ताओं का भगा दिया जाता था। कांग्रेस व इंडी गठबंधन के दल किस प्रकार सत्ता का दुरुपयोग कर चुनाव जीतते रहे हैं यह किसी से छुपा नहीं है और न ही जनता इसको भूली है। ऐसे लोग आज ज्ञानेश कुमार पर संदेह व्यक्त कर रहे हैं। 
आज जम्मू कश्मीर से लेकर मणिपुर और बंगाल तक भारी  मतदान होता है और निष्पक्ष चुनाव होते हैं। एसआईआर के माध्यम से मतदाता सूचियों का शुद्वीकरण हो रहा है। वस्तुतः चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तो बहाना है जिसकी आड़ में विपक्षी दल बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों का समर्थन कर रहे हैं। विपक्षी दलों का यह अभियान  देश विरोधी षड्यंत्र है जिसका खुलासा  होना चाहिए। भारत का विपक्ष भारत को बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल बनाना चाहता और चुनाव आयोग के विरुद्ध अभियान उसी का एक हिस्सा मात्र है। 

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