Lucknow News: गोमती पुस्तक महोत्सव के दूसरे दिन साहित्य और कला का संगम, 1200 से अधिक बच्चों ने दिखाई रचनात्मकता
लखनऊ में गोमती पुस्तक महोत्सव के दूसरे दिन 1200 से अधिक बच्चों ने रचनात्मक गतिविधियों में भाग लिया। वरिष्ठ आईएएस व लेखक पार्थसारथी सेन शर्मा के साथ विशेष साहित्यिक संवाद हुआ।
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गोमती पुस्तक महोत्सव 2026: वरिष्ठ आईएएस पार्थसारथी सेन शर्मा ने साझा किए साहित्यिक अनुभव, एआई और भाषा पर रखा दृष्टिकोण
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गोमती पुस्तक मेला: 'साहित्यिक धरोहरों के वारिस' सत्र में याद किए गए यशपाल, नागर और वर्मा; 'वीरगाथा डायरी' ने बांधा समां
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Lucknow Book Fair: गोमती तट पर सजी किताबों की दुनिया, बच्चों की कार्यशालाओं से लेकर लाइव बैंड तक रहे कई रंगारंग आयोजन
लखनऊ: राजधानी के गोमती तट पर आयोजित गोमती पुस्तक महोत्सव 2026 के दूसरे दिन रविवार, 13 सितंबर को साहित्य, कला, विचार और संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला। सप्ताहांत होने के कारण महोत्सव में पाठकों, युवाओं और परिवारों की भारी भीड़ उमड़ी। दिनभर चले विभिन्न सत्रों में जहां 1,200 से अधिक स्कूली छात्र-छात्राओं ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया, वहीं विचार सत्रों में हिंदी साहित्य के कालजयी रचनाकारों की स्मृति और समकालीन लेखन की चुनौतियों पर सारगर्भित विमर्श हुआ। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं लेखक पार्थसारथी सेन शर्मा के साथ आयोजित विशेष संवाद और शाम को लाइव बैंड की प्रस्तुति दिन के प्रमुख आकर्षण रहे।
1,200 से अधिक विद्यार्थियों ने दिखाई रचनात्मकता
रविवार की सुबह बच्चों के नाम रही। लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों से पहुंचे विद्यार्थियों के लिए कहानी वाचन, चित्रांकन और हस्तकला से जुड़ी अनेक गतिविधियां आयोजित की गईं। कहानीकार प्रियंका सागर ने रंग-बिरंगे प्रॉप्स, पारंपरिक कठपुतलियों और कविताओं के माध्यम से बच्चों को लोककथाओं और कल्पनाशीलता की दुनिया से रूबरू कराया।
इसके बाद नेशनल सेंटर फॉर चिल्ड्रन्स लिटरेचर (NCCL) की टीम द्वारा आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी कल्पनाशक्ति के रंग भरे। क्ले आर्टिस्ट सुग्रीव विश्वकर्मा के निर्देशन में आयोजित मिट्टी कला कार्यशाला (Clay Art Workshop) में छात्र-छात्राओं ने मिट्टी से विभिन्न आकृतियां गढ़ने का हुनर सीखा।
वहीं, राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय (ReP) की ओर से 'बुक कवर डिजाइनिंग' प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों को पुस्तकों के आवरण पृष्ठ तैयार करने की रचनात्मक तकनीक समझाई गई। इस दौरान डिजिटल रीडिंग को बढ़ावा देने के लिए विद्यार्थियों को 7,000 से अधिक निःशुल्क ई-पुस्तकों वाले राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय ऐप और पोर्टल की कार्यप्रणाली से भी परिचित कराया गया।
साहित्यिक धरोहरों के वारिसों ने साझा कीं स्मृतियां
दोपहर के पहले वैचारिक सत्र ‘साहित्यिक धरोहरों के वारिस’ में हिंदी साहित्य के तीन मूर्धन्य स्तंभों उपन्यासकार यशपाल, अमृतलाल नागर और भगवतीचरण वर्मा के रचना संसार और उनके पारिवारिक परिवेश पर आत्मीय संवाद हुआ। सत्र का संचालन दिल्ली की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुनीता ने किया। परिचर्चा में यशपाल की पुत्रवधू मीना यशपाल, अमृतलाल नागर की पौत्री ऋचा नागर और भगवतीचरण वर्मा के पौत्र चंद्रशेखर वर्मा मंच पर उपस्थित रहे।
अमृतलाल नागर के रचना-कर्म को याद करते हुए ऋचा नागर ने कहा कि उनके भीतर बच्चों जैसी सहजता और कहानी कहने का असाधारण कौशल था। उन्होंने रेखांकित किया कि जो सांस्कृतिक और वैचारिक संस्कार परिवारों में विरासत के रूप में मिलते हैं, वे जीवनभर मनुष्य की चेतना का मार्गदर्शन करते हैं।
वहीं, चंद्रशेखर वर्मा ने अपने दादा भगवतीचरण वर्मा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहित्यकारों के परिवारों के लिए उनकी सबसे बड़ी पूंजी उनकी कालजयी कृतियां ही होती हैं। परिचर्चा का मुख्य निष्कर्ष यह रहा कि साहित्यिक विरासत केवल आलमारियों में सजी किताबों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह जीवन-मूल्यों और विचारों के रूप में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में प्रवाहित होती है।
पार्थसारथी सेन शर्मा के साथ 'अनुभव, विचार और संवाद'
महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में उत्तर प्रदेश शासन में बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव तथा चर्चित लेखक पार्थसारथी सेन शर्मा के साथ आयोजित संवाद सत्र रहा। 'अनुभव, विचार और संवाद' विषय पर आयोजित इस सत्र का संचालन चंद्रशेखर वर्मा ने किया।
संवाद के दौरान पार्थसारथी सेन शर्मा की प्रसिद्ध कृतियों जिनमें ‘लव इन लखनऊ’, ‘अंडमान-अंडमानुष सफर का उपन्यासनामा’, ‘लव साइड बाय साइड’, ‘द विकसित भारत क्विज’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘मुसाफिर हूँ यारो’, ‘लखनऊ डायरीज’ और ‘एक कदम हजार अफसाने’ शामिल हैं की रचना प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई।
लखनऊ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्वरूप पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह शहर अपने भीतर कई सदियों का इतिहास और तहजीब संजोए हुए है। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले दो-तीन दशकों में लखनऊ का सामाजिक और भौतिक ताना-बाना तेजी से बदला है। उन्होंने भविष्य में वर्ष 1916 से 2026 तक की समयावधि को केंद्र में रखकर लखनऊ पर एक विस्तृत ऐतिहासिक उपन्यास लिखने की अपनी योजना भी साझा की।
अपनी पुस्तक 'लव इन लखनऊ' की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यह कृति आज की युवा पीढ़ी की भावनात्मक जटिलताओं को ध्यान में रखकर लिखी गई थी। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि आधुनिक दौर में संबंधों की असफलता या भावनात्मक दबाव के चलते युवा अवसाद और आत्मघाती कदमों की ओर बढ़ जाते हैं। ऐसे में मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा साहित्य युवाओं को मानसिक संबल और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण देने का माध्यम बनता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभाव पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक भले ही कितनी भी उन्नत हो जाए, लेकिन वह मानव मन की सूक्ष्म संवेदनाओं और मूल भावनाओं को पूरी तरह व्यक्त नहीं कर सकती। अपनी भाषाई अस्मिता और समाज को सुरक्षित रखने के लिए हमें अपनी भाषाओं और उनके मौलिक साहित्य को निरंतर समृद्ध करना होगा।
'वीरगाथा डायरी' में गूंजे शौर्य के प्रसंग
साहित्यिक संवादों के उपरांत कवि एवं गीतकार डॉ. कृष्ण कुमार सिंह ने अपनी विशेष प्रस्तुति ‘वीरगाथा डायरी’ के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और ऐतिहासिक नायकों को काव्यात्मक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने पृथ्वीराज चौहान और महाराणा प्रताप के शौर्य का वर्णन गद्य और पद्य के तालमेल से किया। चंद्रशेखर आज़ाद के बलिदान पर आधारित छंदबद्ध पंक्तियों को दर्शकों ने खूब सराहा।
प्रस्तुति में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अवध और लखनऊ के योगदान को रेखांकित करते हुए मंगल पांडे, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहब, बेगम हज़रत महल और वीर कुंवर सिंह के संघर्षों को मंच से जीवंत किया गया।
'Delhi Metro' लाइव बैंड से सजी संगीतमय शाम
रविवार की शाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत संगीत के नाम रही। पांच सदस्यीय लाइव बैंड ‘Delhi Metro’ ने मंच संभाला और हिंदी व अंग्रेजी के सदाबहार क्लासिक गीतों को समकालीन फ्यूजन शैली में प्रस्तुत किया। आधुनिक वाद्ययंत्रों के संयोजन और ऊर्जावान प्रस्तुति ने वहां मौजूद युवाओं और साहित्य प्रेमियों को देर शाम तक बांधे रखा।
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