Hardoi: जैविक खेती परियोजना की सीडीओ नेहा ब्याडवाल ने की समीक्षा, 1,000 हेक्टेयर में विकसित हो रहे 50 क्लस्टर
मुख्य विकास अधिकारी नेहा ब्याडवाल की अध्यक्षता में जैविक खेती परियोजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
Hardoi: मुख्य विकास अधिकारी नेहा ब्याडवाल की अध्यक्षता में जैविक खेती परियोजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद में संचालित जैविक खेती परियोजना की प्रगति, कृषकों की सहभागिता, जैविक फसलों के उत्पादन, प्रशिक्षण एवं जैविक निवेशों की उपलब्धता सहित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में अवगत कराया गया कि जनपद के बिलग्राम, माधौगंज एवं मल्लावां विकासखंडों के 19 राजस्व ग्रामों में जैविक खेती परियोजना संचालित की जा रही है। परियोजना के अंतर्गत 1,690 कृषक जुड़े हुए हैं तथा लगभग 1,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 50 क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। कृषकों को जैविक खेती की तकनीकों के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ-साथ एक्सपोजर विजिट भी कराई जा रही हैं, जिससे कृषक जैविक कृषि की उन्नत एवं व्यवहारिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन एवं आय में वृद्धि कर सकें।
मुख्य विकास अधिकारी ने परियोजना की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जैविक खेती को केवल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए जैविक उत्पादों की गुणवत्ता, प्रमाणन, विपणन एवं कृषकों को बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कृषकों को जैविक खेती के लिए आवश्यक तकनीकी जानकारी एवं संसाधन समय से उपलब्ध कराए जाएं तथा परियोजना के प्रत्येक क्लस्टर में निर्धारित गतिविधियों की नियमित निगरानी की जाए। बैठक में जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, पंचगव्य एवं नीमास्त्र आदि जैविक निवेशों की तैयारी एवं उपयोग की भी समीक्षा की गई। मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिए कि जैविक निवेशों की तैयारी में निर्धारित मानकों एवं गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए तथा कृषकों को इनके उपयोग की सही विधि के संबंध में आवश्यक प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि परियोजना के अंतर्गत संचालित सभी गतिविधियों की समयबद्ध समीक्षा एवं स्थलीय सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। कृषकों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करते हुए उन्हें जैविक खेती से होने वाले लाभों के प्रति जागरूक किया जाए। साथ ही, अधिक से अधिक कृषकों को जैविक खेती से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार एवं जागरूकता गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए गए। मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि जैविक खेती पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मृदा की उर्वरता बनाए रखने और कृषकों की आय में वृद्धि की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। अतः संबंधित विभाग आपसी समन्वय से परियोजना को प्रभावी एवं परिणामपरक ढंग से संचालित करें तथा शासन की मंशा के अनुरूप इसका लाभ अधिकाधिक कृषकों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें। बैठक में डॉ. राजेश कुमार, उपनिदेशक कृषि, सुभाष चंद्र, जिला उद्यान अधिकारी, डॉ. राजीव कुमार वर्मा, परियोजना समन्वयक सहित अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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