Hardoi News: हरदोई के चार ब्लॉकों में 19 नवंबर से चलेगा फाइलेरिया उन्मूलन अभियान, घर-घर पहुंचकर खिलाई जाएगी दवा
राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जनपद के चार ब्लॉकों कोथावां, सांडी, बिलग्राम और अहिरोरी में 19 नवंबर से
हरदोई: राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जनपद के चार ब्लॉकों कोथावां, सांडी, बिलग्राम और अहिरोरी में 19 नवंबर से 7 दिसंबर तक सामूहिक दवा सेवन (आईडीए) अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर पात्र लोगों को फाइलेरिया रोधी दवाएं आइवरमेक्टिन, डाईइथाइल कार्बामजीन और एल्बेंडाजोल अपने सामने खिलाएंगे। अभियान का विशेष फोकस उन लोगों तक पहुंचने पर रहेगा, जिन्होंने अब तक कभी फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन नहीं किया है (Never Taken)।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविन्द सचान ने बताया कि देश से फाइलेरिया उन्मूलन के प्रयासों के तहत हरदोई सहित प्रदेश के 16 जनपदों के 53 प्लानिंग यूनिट में यह अभियान चलाया जाएगा। फाइलेरिया को आम बोलचाल की भाषा में हाथीपांव भी कहते हैं। जनपद के कोथावां, सांडी, बिलग्राम और अहिरोरी ब्लॉक में जून में आयोजित नाइट ब्लड सर्वे के दौरान निर्धारित मानक पूरे नहीं हो सके थे। इसलिए इन क्षेत्रों में अभियान के दौरान अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंचने और दवा सेवन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अभियान की सफलता में समुदाय की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। इस बार उन लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिन्होंने अब तक कभी दवा नहीं खाई है। ऐसे लोगों तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ सहयोगी संस्थाएं सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर) और प्रोजेक्ट कंसर्न जागरूकता गतिविधियां कर रही हैं। इसके अलावा दिवाली पर घर लौटने वाले लोगों तक भी पहुंच बनाई जाएगी, ताकि उन्हें उसी समय दवा सेवन कराया जा सके और अभियान शुरू होने का इंतजार न करना पड़े।
जनपद में फाइलेरिया के कुल 4,106 मरीज हैं। इनमें अहिरोरी ब्लॉक में 274, सांडी में 148, कोथावां में 310 और बिलग्राम में 184 मरीज हैं।
नोडल अधिकारी डॉ. सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि अभियान को लेकर लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिला टास्क फोर्स की अब तक दो बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। दूसरी बैठक मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) नेहा ब्याडवाल की अध्यक्षता में संपन्न हुई है। दवाओं सहित आवश्यक लॉजिस्टिक की उपलब्धता है और आशा कार्यकर्ताओं तथा दवा प्रदाताओं का प्रशिक्षण चल रहा है। हमारा प्रयास है कि शत-प्रतिशत पात्र आबादी दवा का सेवन करे, क्योंकि एक व्यक्ति भी छूटा तो सुरक्षा चक्र टूट सकता है।
उन्होंने बताया कि फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारी है। संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद जब यह मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो फाइलेरिया के सूक्ष्म परजीवी उसके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। ये परजीवी शरीर में 5 से 15 साल तक रह सकते हैं और इस दौरान लसिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे हाथ-पैर या जननांगों में असामान्य सूजन हो सकती है। बीमारी से बचाव के लिए अभियान के दौरान पात्र लोगों को दवा का सेवन करना जरूरी है।
दो वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को छोड़कर सभी पात्र लोगों को दवा का सेवन करना है। आशा कार्यकर्ता दवा घर पर देकर नहीं आएंगी, बल्कि अपने सामने ही पात्र व्यक्ति को दवा खिलाएंगी। दवा सेवन के बाद कुछ लोगों को चक्कर, उल्टी या अन्य हल्की प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क करें। किसी भी तरह की परेशानी होने पर चिकित्सकीय सहायता ली जा सकती है। इसके लिए प्रत्येक ब्लॉक में रैपिड रिस्पॉन्स टीम भी तैनात रहेगी।
जिला मलेरिया अधिकारी जीतेंद्र कुमार ने बताया कि अभियान में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और पाथ तकनीकी सहयोग कर रहे हैं, जबकि पीसीआई संस्था सामुदायिक जागरूकता गतिविधियां संचालित कर रही है। सीफॉर संस्था सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) -पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म (पीएसपी) के माध्यम से लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा सेवन के लिए जागरूक कर रही है। इसमें फाइलेरिया से प्रभावित लोग अपने अनुभव साझा कर समुदाय के लोगों को बीमारी की गंभीरता और बचाव के लिए दवा सेवन का महत्व समझा रहे हैं।
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