Hardoi: कस्तूरबा गांधी विद्यालय की छात्राओं की हस्तनिर्मित राखियों से सजा रक्षाबंधन, डीएम व सीडीओ ने की सराहना
रक्षाबंधन के पावन अवसर पर पिहानी ब्लॉक के नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा अपने हाथों से तैयार की गई हस्तनिर्मित राखियों ने पर्व
हरदोई। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर पिहानी ब्लॉक के नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा अपने हाथों से तैयार की गई हस्तनिर्मित राखियों ने पर्व की खुशियों को खास बना दिया। बच्चों ने मेहनत, लगन और उत्साह के साथ सुंदर राखियां तैयार कीं। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं ने इन राखियों को जिलाधिकारी अनुनय झा एवं मुख्य विकास अधिकारी के हाथों में बांधकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राएँ आकांक्षा (कक्षा 8), शोभा (कक्षा 7). खुशी (कक्षा 9), मान्या (कक्षा 7) एवं अर्चना (कक्षा 6) उपस्थित रहीं। छात्राओं ने पिहानी ब्लॉक के बच्चों द्वारा अपने हाथों से तैयार की गई राखियाँ अधिकारियों को पहनाई। बच्चों द्वारा तैयार की गई इन राखियों को देखकर जिलाधिकारी अनुनय झा ने उनकी रचनात्मकता, मेहनत और भावनात्मक जुड़ाव की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि नन्हे बच्चों द्वारा स्वयं राखियाँ तैयार करना उनकी प्रतिभा, कल्पनाशीलता और सीखने की ललक को दर्शाता है। इस आत्मीय पहल से जिलाधिकारी प्रसन्नतापूर्वक छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। मुख्य विकास अधिकारी महोदया ने भी बच्चों की इस सुंदर पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति जुड़ाव को मजबूत करती है।
इस अवसर पर जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी ने छात्राओं का उत्साह बढ़ाते हुए उन्हें चॉकलेट एवं उपहार प्रदान किए। जिलाधिकारी ने बच्चों के प्रति विशेष स्नेह व्यक्त करते हुए अपने हाथों से बच्चों को मिठाई खिलाई। इस आत्मीय क्षण से बच्चियों के चेहरे खुशी से खिल उठे और पूरा वातावरण स्नेह एवं अपनत्व से भर गया। कार्यक्रम में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, प्रभात मिश्र, डीसी, संतोष कुमार, एसआरजी, शशांक मिश्रा, शिवेंद्र सिंह बघेल सहित अन्य अधिकारी, शिक्षक एवं विद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय कछौना एवं टड़ियावां ब्लॉक के नन्हे-मुन्ने बच्चों की मेहनत से तैयार हुई हस्तनिर्मित राखियों और कस्तूरबा की छात्राओं द्वारा उन्हें जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी तक पहुंचाकर पहनाने की यह पहल रक्षाबंधन के पर्व पर स्नेह, सम्मान, संस्कार और बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा का सुंदर संगम बन गई।
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