Hardoi Pihani Shiv Mandir: पिहानी के इन 5 प्रसिद्ध शिव मंदिरों में सावन पर उमड़ी भीड़, जानें 300 साल पुराने शिवालय का महत्व
हरदोई के पिहानी कस्बे में सावन के महीने में धार्मिक माहौल देखते ही बनता है। भूरेश्वर महादेव, बाबा मंशा नाथ और 300 वर्ष पुराने गायत्री प्रज्ञा पीठ शिवालय में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक कर रहे हैं।
- पिहानी में सावन सोमवार की विशेष धूम: भूरेश्वर महादेव से लेकर गायत्री प्रज्ञा पीठ तक गूंजे बम-बम भोले के जयकारे
- हरदोई का यह कस्बा बना सावन में शिवभक्ति का बड़ा केंद्र, 300 साल पुराने शिवालय में उमड़ रहे श्रद्धालु
- Pihani News: पिहानी के प्राचीन शिव मंदिरों में सावन की विशेष पूजा-अर्चना, सुबह से ही लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले का ऐतिहासिक पिहानी कस्बा इन दिनों पूरी तरह शिवभक्ति के रंग में रंगा नजर आ रहा है। सावन के पवित्र महीने की शुरुआत होते ही पिहानी और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों के शिव मंदिरों में तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी है। कस्बे के प्रमुख शिवालयों जैसे भूरेश्वर महादेव, बाबा मंशा नाथ, लक्कड़ नाथ, महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर मंदिर में हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे हैं। इसके साथ ही गायत्री प्रज्ञा पीठ परिसर में स्थित लगभग 300 वर्ष पुराना शिवालय भी सावन के दिनों में विशेष आध्यात्मिक अनुष्ठानों और जलाभिषेक का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
पिहानी क्षेत्र में सावन के प्रत्येक सोमवार को विशेष धार्मिक आयोजनों का सिलसिला जारी रहता है। कस्बे का भूरेश्वर महादेव मंदिर स्थानीय निवासियों के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है, जहाँ सावन में श्रद्धालु तड़के से ही लाइन में लगकर जल, दूध, बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करते हैं। इसी प्रकार बाबा मंशा नाथ मंदिर में भी भक्तों का मानना है कि यहाँ सावन में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। लक्कड़ नाथ मंदिर, महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर मंदिरों में भी दिनभर भजन-कीर्तन और जलाभिषेक का दौर चलता रहता है, जिससे पूरे कस्बे में एक उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है। पिहानी के धार्मिक इतिहास में गायत्री प्रज्ञा पीठ परिसर का शिवालय एक विशेष स्थान रखता है। स्थानीय अभिलेखों और समाचार स्रोतों के अनुसार यह शिवालय लगभग तीन शताब्दियों (300 वर्ष) पुराना है। यह परिसर अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा, यज्ञ और निरंतर मंत्र-जाप की परंपरा के लिए जाना जाता है। सावन माह में यहाँ का वातावरण और अधिक पवित्र हो जाता है। ऐतिहासिक संदर्भों के मुताबिक, 15 फरवरी 2013 को इस प्रज्ञा पीठ पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिव परिवार की मूर्तियों की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी और महामृत्युंजय यज्ञ का आयोजन हुआ था। तब से यहाँ सावन के दिनों में विशेष साधना शिविर और रुद्राभिषेक आयोजित किए जाते हैं।
महाकाल और ओंकारेश्वर स्वरूपों की विशेष आराधना
पिहानी कस्बे में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों के मंदिर एक ही क्लस्टर के रूप में स्थापित हैं। महाकालेश्वर मंदिर में जहाँ भगवान शिव के महाकाल स्वरूप की विशेष भस्म आरती और पूजा होती है, वहीं ओंकारेश्वर मंदिर में विधि-विधान से जलाभिषेक किया जाता है। स्थानीय शिवभक्त एक ही दिन में पिहानी के इन सभी प्रमुख मंदिरों के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। यही कारण है कि पिहानी को स्थानीय स्तर पर 'शिवनगरी' की तरह देखा जाने लगा है।
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