Hardoi News: संडीला के ऐतिहासिक महावीर झंडा मेले में कवि सम्मेलन, 11 रचनाकारों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

हरदोई के संडीला स्थित गल्ला मंडी में ऐतिहासिक श्री महावीर झंडा मेला के चौथे दिन विराट कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। 11 प्रमुख कवियों ने प्रस्तुतियां दीं और पत्रकारों का सम्मान किया गया।

By INA News Desk
Sep 25, 2026 - 20:59
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Hardoi News: संडीला के ऐतिहासिक महावीर झंडा मेले में कवि सम्मेलन, 11 रचनाकारों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

रिपोर्टर : मुकेश सिंह सोमवंशी

संडीला/हरदोई। संडीला नगर के ऐतिहासिक श्री महावीर झंडा मेला के चौथे दिन गल्ला मंडी में विराट कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। मेला अध्यक्ष शैलेश अग्निहोत्री उर्फ गुड्डू भैया के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे 11 कवियों ने हास्य, व्यंग्य, वीर रस, ओज, भक्ति, श्रृंगार और अवधी रस की प्रस्तुतियों से देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। कार्यक्रम के दौरान तालियों और ठहाकों से गल्ला मंडी गूंजती रही।

पत्रकारों और कवियों का हुआ भव्य सम्मान

कवि सम्मेलन के दौरान क्षेत्र की पत्रकारिता के माध्यम से जनसमस्याओं और सामाजिक सरोकारों को सामने रखने वाले पत्रकारों तथा साहित्य और काव्य के क्षेत्र में योगदान देने वाले कवियों का सम्मान एवं स्वागत किया गया। इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों का भी अभिनंदन किया गया।

मेले को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मेला कमेटी के पदाधिकारियों और कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के दौरान मौजूद लोगों ने तालियों के साथ सम्मानित व्यक्तियों का उत्साह बढ़ाया।

लटूरी लट्ठ ने चुटीले अंदाज में संभाला मंच

कवि सम्मेलन का प्रभावी मंच संचालन प्रसिद्ध संचालक श्री लटूरी लट्ठ, हण्डला ने किया। अपने चुटीले, प्रभावी और काव्यात्मक अंदाज से उन्होंने कार्यक्रम में लगातार ऊर्जा बनाए रखी और सभी कवियों की प्रस्तुतियों को एक सूत्र में पिरोते हुए श्रोताओं को देर तक जोड़े रखा।

नीरज पाण्डेय ने संघर्ष और संकल्प का जगाया जज्बा

नीरज पाण्डेय रायबरेली ने संघर्ष, संकल्प और मंजिल हासिल करने के जज्बे को अपनी ओजपूर्ण कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया।

«“कसम जब तक हमें मंजिल तलक पहुँचा नहीं देंगे।
थका को पाँव तक आने का हम मौका नहीं देंगे।।”

उनकी प्रस्तुति पर श्रोताओं ने तालियों से उत्साहवर्धन किया।

सौरभ शुक्ल की रामभक्ति से भक्तिमय हुआ माहौल

सौरभ शुक्ल बैसवारा ने रामभक्ति और प्रभु के प्रति समर्पण से ओतप्रोत रचना प्रस्तुत की। हनुमान जी की भक्ति के साथ गिलहरी जैसे छोटे जीवन को भी प्रभु सेवा में लगाने की भावना को उन्होंने कविता में अभिव्यक्त किया।

«“चाहत है उपकारी में तन हो जाये,
सब कुछ मेरा राम रतन धन हो जाये।
हनुमत जैसा भक्त हमारा कहाँ भला,
किन्तु गिलहरी जैसा जीवन हो जाये।।”

प्रस्तुति पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं।

प्रदीप महाजन ने शिक्षक जीवन पर किया हास्य-व्यंग्य

प्रदीप महाजन हास्य कवि, वाराणसी ने शिक्षक जीवन और शिक्षकों पर बढ़ती जिम्मेदारियों को हास्य-व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। उनकी कविता पर श्रोताओं के बीच जमकर ठहाके गूंजे।

«“हम थे गुरु परन्तु कर्मचारी बन गए,
सौ दो सौ को सिखाने में मदारी बन गए।
हमको भी एम.डी.एम. का टबना है पड़ता ध्यान,
पाठन पठन को छोड़कर भण्डारी बन गए।।”

डॉ. कमलकांत तिवारी के वीर रस ने भरा जोश

डॉ. कमलकांत तिवारी वीर रस कवि, बरेली ने मां भारती के सम्मान, देश की शान और राष्ट्रीय एकता का संदेश देती ओजपूर्ण कविता प्रस्तुत की।

«“माँ भारती के शीश को कटने नहीं देंगे,
सम्मान अपनी शान का घटने नहीं देंगे।
सौगन्ध खाओ खाज मेरे प्यारे दोस्तों,
मजहब के नाम देश को बँटने नहीं देंगे।।”

कविता पर श्रोताओं ने तालियों से कवि का उत्साह बढ़ाया।

रवि चतुर्वेदी ने राजनीति पर साधा हास्य-व्यंग्य

रवि चतुर्वेदी हास्य कवि, सतना ने राजनीति और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर हास्य-व्यंग्य की प्रस्तुति दी। उनकी कविता में न्याय, सुख और जनप्रतिनिधियों को लेकर व्यंग्यात्मक सवाल उठाए गए।

«“न्याय न दे जो विधि होने का क्या मतलब।
सुख न दे जो निधि होने का क्या मतलब।।
राजनीति में गए और फिर बिके नहीं।
ऐसे जनप्रतिनिधि होने का क्या मतलब।।”

उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब सराहा।

कामता माहल ने चुटीले अंदाज से गुदगुदाया

कामता माहल हास्य कवि, रीवां ने अपने चुटीले अंदाज और हास्य रचनाओं से कवि सम्मेलन में हंसी का रंग भर दिया। उनकी प्रस्तुति का श्रोताओं ने खूब आनंद लिया और तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।

मधुप श्रीवास्तव ‘नरकंकाल’ ने ग्रामीण समस्याओं पर किया व्यंग्य

मधुप श्रीवास्तव ‘नरकंकाल’ ने ग्रामीण जीवन और आमजन की समस्याओं को हास्य-व्यंग्य के अंदाज में प्रस्तुत किया। नाली, सड़क, खड़ंजा और मकान जैसी रोजमर्रा की समस्याओं को उन्होंने कन्हैया से गुहार के रूप में कविता में पिरोया।

«“मैं तो तेरे ही भरोसे परधान कन्हैया मोरी पार करो,
नाली सड़क खड़ंजा मइया नीकी खूब कराई।
कच्ची कोठरी गिरधर हमरी कही रही ढह जाई,
हमका दे देत जो मकान, नैया मेरी पार करो।।”

ग्रामीण जीवन की समस्याओं को हास्य के माध्यम से प्रस्तुत करने पर श्रोताओं ने खूब आनंद लिया।

डॉ. शिप्रा की श्रृंगार रस की रचना ने बांधा समां

डॉ. शिप्रा श्रृंगार कवयित्री, गोंडा ने प्रेम, विरह और यादों से जुड़ी भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की। पुराने खत और मोहब्बत की यादों को उन्होंने अपनी रचना में अभिव्यक्त किया।

«“तेरी याद दिल से भुलाने लगी हूँ,
लिये खत तेरे अब जलाने लगी हूँ।
मोहब्बत में तेरे कई गीत लिखे,
उन्हें आज कल गुनगुनाने लगी हूँ।।”

उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति को भी श्रोताओं की सराहना मिली।

प्रियंका द्विवेदी ने धार्मिक भावनाओं से जोड़ा

प्रियंका द्विवेदी संडीला ने धार्मिक एवं भावपूर्ण रचना प्रस्तुत की। उनकी कविता में जानकी और सिया-राम के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति देखने को मिली।

«“बात लिखी हुई गुंजों में काम की,
हर प्रतीक्षा में अग्रिम रही जानकी,
भेदा नखों ने लेकिन ये, परिणाम ये,
हैं सिया के पिया और सिया राम की।।”

स्थानीय कवयित्री की प्रस्तुति पर भी श्रोताओं ने तालियों से उत्साह बढ़ाया।

शायरी श्रेया ने माधव से संवाद के जरिए बांधा समां

शायरी श्रेया लखनऊ ने माधव से संवाद के रूप में भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की। उनकी रचना में सपनों और अपनों को लेकर भावनात्मक सवाल-जवाब देखने को मिला।

«“मैंने माधव से कहा,
सामने सब सपने हैं,
जवाब था अगर
अपने हैं सामने क्यों हैं।।”

इन भावपूर्ण पंक्तियों ने श्रोताओं को सोचने पर मजबूर किया।

हास्य, व्यंग्य, वीर और भक्ति से सजा काव्य का मंच

श्री महावीर झंडा मेला के चौथे दिन आयोजित विराट कवि सम्मेलन में काव्य के अलग-अलग रंग देखने को मिले। कहीं हास्य-व्यंग्य पर ठहाके गूंजे तो कहीं वीर रस और ओजपूर्ण प्रस्तुतियों पर तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई दी। भक्ति, श्रृंगार और अवधी रचनाओं ने भी कार्यक्रम में विविधता बनाए रखी।

मेला अध्यक्ष शैलेश अग्निहोत्री उर्फ गुड्डू भैया के संयोजन में आयोजित कवि सम्मेलन में बड़ी संख्या में नगरवासी, ग्रामीण क्षेत्र के लोग, साहित्य प्रेमी, पत्रकार, कवि, वरिष्ठ नागरिक तथा मेला कमेटी से जुड़े पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।

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