Hardoi News: हरदोई में ‘उत्कर्ष-2026’ के मंच पर एआई जागरूकता कार्यशाला, डॉ. निमिष कपूर ने पत्रकारों और विद्यार्थियों को बताए तकनीक के गुर
आईएनए मीडिया (न्यूज) एवं कमलेश्वर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में वैभव लॉन में आयोजित ‘उत्कर्ष-2026’ समारोह में कृत्रिम
हरदोई। आईएनए मीडिया (न्यूज) एवं कमलेश्वर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में वैभव लॉन में आयोजित ‘उत्कर्ष-2026’ समारोह में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई) को लेकर विशेष जागरूकता संगोष्ठी एवं प्रमाणीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। गूगल न्यूज इनिशिएटिव एवं वाइब्रेंट न्यूज के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में पत्रकारों और विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक की कार्यप्रणाली, डिजिटल माध्यमों में एआई की भूमिका तथा सूचनाओं के तथ्य सत्यापन के महत्व से परिचित कराया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमवती पीके वर्मा एवं विशिष्ट अतिथि निरमा देवी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं संयोजन कमलेश्वर फाउंडेशन की संस्थापक तथा आईएनए मीडिया की एडिटर-इन-चीफ विजयलक्ष्मी सिंह जादौन और फाउंडेशन की को-फाउंडर एवं सचिव अमिता मिश्रा ‘मीतू’ ने किया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य डिजिटल युग में तेजी से विकसित हो रही एआई तकनीक के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसके जिम्मेदार, प्रभावी तथा तथ्यपरक उपयोग को प्रोत्साहित करना रहा।

- डॉ. निमिष कपूर ने समझाई एआई की उपयोगिता और कार्यप्रणाली
कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. निमिष कपूर, सलाहकार संपादक (विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण), ने एआई की कार्यप्रणाली और विभिन्न क्षेत्रों में इसकी बढ़ती उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक तकनीक का ऐसा माध्यम है, जिसका इस्तेमाल सूचनाओं के विश्लेषण, डिजिटल सामग्री तैयार करने, उपलब्ध आंकड़ों को व्यवस्थित करने और विभिन्न कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में किया जा सकता है।

उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में एआई की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि डिजिटल माध्यमों पर समाचारों का संकलन, सामग्री का विश्लेषण और सूचनाओं को व्यवस्थित करने जैसे कार्यों में तकनीकी उपकरण सहायक हो सकते हैं। हालांकि, एआई से प्राप्त जानकारी को बिना जांचे सही मान लेना उचित नहीं है। किसी भी समाचार या सूचना को प्रकाशित करने से पहले उसके तथ्यों, स्रोतों और प्रामाणिकता की पुष्टि करना आवश्यक है।

डॉ. कपूर ने डिजिटल दौर में तकनीक के साथ पत्रकारिता के मूलभूत सिद्धांतों को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने तथ्यपरकता, विश्वसनीयता और जिम्मेदारी को समाचार लेखन का महत्वपूर्ण आधार बताया। एआई का इस्तेमाल करते समय मानवीय विवेक, संदर्भ की समझ और स्वतंत्र तथ्य जांच की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहती है।

- फर्जी और भ्रामक सूचनाओं की पहचान में तथ्य सत्यापन महत्वपूर्ण
कार्यशाला में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से प्रसारित होने वाली सूचनाओं और उनकी विश्वसनीयता से जुड़े विषयों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। वर्तमान समय में इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से बड़ी मात्रा में सामग्री प्रसारित होती है। ऐसे में सही और भ्रामक जानकारी के बीच अंतर करना पत्रकारों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।

संगोष्ठी के दौरान तथ्य सत्यापन की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि किसी भी सूचना को साझा करने या समाचार के रूप में प्रस्तुत करने से पहले उसकी पुष्टि की जानी चाहिए। एआई आधारित उपकरण जानकारी जुटाने और उसका विश्लेषण करने में सहायता कर सकते हैं, लेकिन उनकी ओर से प्रस्तुत परिणामों की स्वतंत्र जांच करना भी जरूरी है।

पत्रकारिता में तकनीक का उपयोग केवल तेजी से सामग्री तैयार करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय, तथ्यपरक और उपयोगी जानकारी पहुंचाने में सहायता करना भी होना चाहिए। इस दृष्टिकोण से कार्यशाला को डिजिटल पत्रकारिता की बदलती जरूरतों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल के रूप में देखा गया।

- विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी रही कार्यशाला
कार्यशाला में विद्यार्थियों को भी एआई की संभावनाओं और डिजिटल तकनीक के व्यावहारिक उपयोग को समझने का अवसर मिला। शिक्षा के क्षेत्र में एआई आधारित उपकरण जानकारी को व्यवस्थित करने, विषयों को समझने और अध्ययन संबंधी कार्यों में सहायक हो सकते हैं। हालांकि, इनके इस्तेमाल के दौरान स्वयं अध्ययन करने, जानकारी की पुष्टि करने और अपनी समझ विकसित करने की आवश्यकता भी महत्वपूर्ण है।
इस प्रकार कार्यशाला का दायरा पत्रकारिता तक सीमित न रहकर शिक्षा और डिजिटल जागरूकता से भी जुड़ा रहा। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को नई तकनीक से परिचित कराने के साथ उसके विवेकपूर्ण इस्तेमाल के प्रति प्रेरित करना था।

- डॉ. शैलजा दुबे ने भी रखे विचार
कार्यक्रम में डॉ. शैलजा दुबे ने तकनीकी जागरूकता के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बदलते तकनीकी परिवेश में नई जानकारियों से अपडेट रहने और तकनीक का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
आयोजकों ने कहा कि ‘उत्कर्ष-2026’ के माध्यम से शिक्षा, पत्रकारिता और आधुनिक तकनीक से जुड़े विषयों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। ऐसे आयोजन प्रतिभागियों को नई तकनीकों को समझने, उनके उपयोग की संभावनाओं को जानने और डिजिटल दुनिया की चुनौतियों के प्रति सजग होने का अवसर प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डॉ. अतुल कपूर, अलका गुप्ता, अनुराधा मिश्रा एवं निरमा देवी उपस्थित रहीं। इस अवसर पर वंदना सिंह, डॉ. सोहनी दीक्षित, नीलू गुप्ता, राधा मिश्रा, सुमन सिंह, भूमिका सिंह, प्रीति वर्मा, डॉ. शीला पाण्डेय, डॉ. ब्रह्मस्वरूप पाण्डेय सहित विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी, प्रधानाचार्य, शिक्षक, अभिभावक, गणमान्य नागरिक और मीडिया प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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