हाथरस में ध्वस्तीकरण आदेश पर अमल न होने का आरोप, कांग्रेस नेता ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
हाथरस में औद्योगिक क्षेत्र में अवैध निर्माण, सरकारी जमीन पर कब्जे और कर गड़बड़ियों के आरोपों पर कांग्रेस नेता शरद उपाध्याय ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की।
हाथरस। जिले के औद्योगिक और सार्वजनिक स्थलों पर हुए अनधिकृत निर्माणों व कब्जों पर कार्रवाई न होने को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रदेश सचिव शरद उपाध्याय नंदा ने स्थानीय प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाते हुए अवैध निर्माणों पर रोक न लगाने का आरोप लगाया है। उन्होंने सूचना का अधिकार कार्यकर्ता संगठन के जिलाध्यक्ष राजीव वार्ष्णेय द्वारा सामने लाए गए पत्रों और दस्तावेजों के हवाले से कहा कि कई मामलों में औपचारिक आदेश पारित होने के बावजूद धरातल पर प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
शरद उपाध्याय के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्र में बने अवैध निर्माणों के संबंध में उपजिलाधिकारी सदर द्वारा पूर्व में ध्वस्तीकरण का स्पष्ट आदेश जारी किया गया था। आरोप है कि लंबा समय बीत जाने के बाद भी उस आदेश पर पूरी तरह अमल नहीं कराया गया, जिससे प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर संशय पैदा हो रहा है। उन्होंने औद्योगिक भूखंड संख्या बी-9 और बी-10 पर अनधिकृत निर्माण और औद्योगिक इकाइयों के संचालन के संदर्भ में उद्योग विभाग के स्थानीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग रखी।
इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग की परिसंपत्तियों पर अनधिकृत कब्जे का विषय भी उठाया गया। उन्होंने उपलब्ध प्रपत्रों के हवाले से दावा किया कि श्रीजी फार्म हाउस परिसर द्वारा सरकारी सड़क और विभाग की जमीन के करीब दस फीट हिस्से पर कथित अतिक्रमण किया गया है। साथ ही परिसर के ऊपर से गुजर रही 33 केवीए क्षमता की हाईटेंशन बिजली लाइन से कार्यक्रमों के दौरान आम लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ने का अंदेशा जताया गया है। उन्होंने बिजली और निर्माण विभाग से इस खतरे का तकनीकी निरीक्षण कर समाधान करने की मांग की।
प्रशासनिक जांच की मांग के साथ-साथ कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा कथित तौर पर बही-खातों में विसंगतियों और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के माध्यम से कर वंचना करने के बिंदु भी उठाए गए हैं। इसके अतिरिक्त संदिग्ध अग्निकांड दिखाकर बीमा कंपनियों से दावे लेने के आरोपों की पड़ताल वाणिज्य कर और संबंधित बीमा संस्थानों से कराने की मांग की गई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि सभी लगाए गए आरोप प्राप्त अभिलेखों और जनहित से जुड़े तथ्यों पर आधारित हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन और प्रशासन ने इन सभी बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच कर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो वे इन साक्ष्यों को शीर्ष नेतृत्व के समक्ष रखकर जनहित में बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेंगे।
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