यूपीआई शुल्क पर हाथरस में व्यापारियों का फूटा गुस्सा: दो हजार से अधिक के भुगतान पर चार्ज का कड़ा विरोध

हाथरस में 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एमडीआर शुल्क लगाने पर भड़के व्यापारी। व्यापार मंडल ने आरबीआई से शुल्क वापस लेने की मांग की।

By INA News Desk
Sep 17, 2026 - 23:30
28 Views
यूपीआई शुल्क पर हाथरस में व्यापारियों का फूटा गुस्सा: दो हजार से अधिक के भुगतान पर चार्ज का कड़ा विरोध
Advertisement
Advertisement

हाथरस। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अब व्यापारिक लेन-देन पर अतिरिक्त अधिभार लगाने की कवायद को लेकर खुदरा व थोक कारोबारियों में गहरा आक्रोश फैल गया है। दो हजार रुपये से अधिक के व्यावसायिक यूपीआई भुगतानों पर शून्य दशमलव चार प्रतिशत एमडीआर शुल्क लागू किए जाने के प्रस्ताव पर संयुक्त उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन के पदाधिकारियों ने बैंकों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि पहले नकदी रहित लेनदेन को प्रोत्साहित किया गया और अब उसी डिजिटल माध्यम पर अतिरिक्त वित्तीय भार थोपकर व्यापारियों का आर्थिक उत्पीड़न किया जा रहा है।

व्यापार मंडल के संस्थापक सदस्यों राजीव वार्ष्णेय, विपिन वार्ष्णेय और कन्हैया वार्ष्णेय ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि दुकान का किराया, भारी बिजली बिल, वाणिज्यिक कर, कर्मचारियों के वेतन और लगातार बढ़ती महंगाई से जूझ रहे छोटे व मध्यम दुकानदारों पर नए शुल्कों का बोझ डालना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्ग कोई स्वचालित नकदी मशीन नहीं है कि बैंकिंग प्रणाली अपने मुनाफे के लिए हर नए वित्तीय बोझ को उनके कंधों पर डाल दे। पहले कारोबारियों को डिजिटल लेनदेन अपनाने के लिए प्रेरित किया गया और अब उसी प्रक्रिया को खर्चीला बनाकर उनकी आय सीमित की जा रही है।

जिलाध्यक्ष जयपाल सिंह चौहान ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि व्यापारी दिन-रात परिश्रम करके उपभोक्ताओं से सरकारी राजस्व एकत्र कर राजकोष में जमा कराता है। इसके बावजूद अपनी ही बिक्री की धनराशि प्राप्त करने के लिए उससे प्रतिशत के आधार पर शुल्क वसूलना अनुचित है। जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीरज वार्ष्णेय ने कहा कि देखने में शून्य दशमलव चार प्रतिशत की दर मामूली लग सकती है, किंतु निरंतर होने वाले दैनिक कारोबार में यह कटौती व्यापारी के कुल लाभांश पर गंभीर प्रभाव डालेगी। व्यापार मंडल ने केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक से मांग की है कि छोटे व मध्यम वर्ग के व्यापारियों को राहत देते हुए एक निश्चित वार्षिक कारोबार सीमा तक यूपीआई लेन-देन को पूर्णतः शुल्क मुक्त रखा जाए। पदाधिकारियों ने दो टूक कहा कि आधुनिक तकनीक का समर्थन किया जाएगा, परंतु व्यापारियों पर अनुचित वित्तीय दबाव कतई स्वीकार नहीं होगा।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

Advertisement
Advertisement