हाथरस औद्योगिक क्षेत्र में 14 किलोवाट का अवैध घरेलू बिजली कनेक्शन, डीवीवीएनएल प्रबंध निदेशक को भेजा विधिक ज्ञापन

हाथरस के अलीगढ़ रोड औद्योगिक क्षेत्र में 14 किलोवाट के घरेलू बिजली कनेक्शन को लेकर विवाद। RTI से जानकारी छिपाने और फर्जीवाड़े का आरोप, FIR की मांग।

Aug 5, 2026 - 23:26
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हाथरस औद्योगिक क्षेत्र में 14 किलोवाट का अवैध घरेलू बिजली कनेक्शन, डीवीवीएनएल प्रबंध निदेशक को भेजा विधिक ज्ञापन

हाथरस के अलीगढ़ रोड स्थित औद्योगिक आस्थान में 14 किलोवाट का घरेलू विद्युत कनेक्शन जारी किए जाने के मामले में गंभीर अनियमितताओं और घोटाले के आरोप सामने आए हैं। सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजीव वार्ष्णेय ने इस पूरे प्रकरण को विभागीय साठगांठ, फर्जीवाड़ा और राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाला मामला बताते हुए दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) के प्रबंध निदेशक को विधिक ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में मामले की स्वतंत्र विजिलेंस जांच कराने और दोषी अधिकारियों व उपभोक्ता के खिलाफ मामला दर्ज कराने की मांग की गई है।

एसोसिएशन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्र स्थित प्लॉट संख्या C-20/21 पर नियमों को दरकिनार कर घरेलू श्रेणी का बिजली कनेक्शन जारी कर दिया गया। विभागीय नियमों के मुताबिक औद्योगिक आस्थान की भूमि पर केवल औद्योगिक या व्यावसायिक श्रेणी का कनेक्शन ही दिया जा सकता है। आरोप है कि बाहरी क्षेत्र की भू-रजिस्ट्री का सहारा लेकर और बिना किसी समुचित भौतिक सत्यापन के यह कनेक्शन मंजूर किया गया। इसके अलावा, उपजिलाधिकारी सदर द्वारा संबंधित परिसर के खिलाफ पूर्व में पारित ध्वस्तीकरण आदेश के बावजूद यह विद्युत संयोजन अब तक काटा नहीं गया है।

प्रकरण की विस्तृत जानकारी हासिल करने के लिए एसोसिएशन की ओर से जुलाई माह में ऑनलाइन आरटीआई दाखिल की गई थी। इसमें भू-रजिस्ट्री सत्यापन, भौतिक सत्यापन रिपोर्ट, ऑडिट रिपोर्ट और जिम्मेदार अधिकारियों के विवरण सहित सात प्रमुख बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी गई थीं। आरोप है कि विद्युत नगरीय वितरण खंड के जनसूचना अधिकारी ने सूचना अधिकार कानून की धारा 8(1)(घ) और 8(1)(ञ) का हवाला देते हुए जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया।

एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजीव वार्ष्णेय का कहना है कि जनहित, धोखाधड़ी और राजस्व हानि से जुड़े मामले में व्यावसायिक गोपनीयता या व्यक्तिगत निजता का हवाला देना गलत है। उन्होंने आरटीआई कानून का हवाला देते हुए सर्वोपरि जनहित की स्थिति में पूरी जानकारी दिए जाने की मांग की है। भेजे गए ज्ञापन में भारतीय न्याय संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और विद्युत अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत जांच का अनुरोध किया गया है।

एसोसिएशन ने डीवीवीएनएल प्रबंधन से मांग उठाई है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कनेक्शन मंजूर करने वाले तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता, उपखंड अधिकारी, कंप्यूटर ऑपरेटर और संबंधित उपभोक्ता के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही विवादित कनेक्शन को तत्काल काटकर बकाया राजस्व की वसूली की जाए। हालांकि, इन सभी आरोपों पर अब तक बिजली निगम अथवा संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सक्षम स्तर पर होने वाली जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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