Lok Sabha Speaker Om Birla Appeal: "सदन चलने दें, चर्चा हो...", पक्ष-विपक्ष के सांसदों से बोले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला
लोकसभा में जारी गतिरोध के बीच स्पीकर ओम बिरला ने पक्ष-विपक्ष से सदन सुचारू चलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संवाद से ही हर मुद्दे का हल संभव है।
- Om Birla On Parliament Deadlock: ओम बिरला की सांसदों से भावुक अपील, कहा- देश में अच्छा संदेश जाए, सदन की मर्यादा बनाए रखें
- "सदन चलने दें, चर्चा होने दें"... लगातार हंगामे के बीच ओम बिरला ने जोड़े हाथ, सांसदों से बोले- देश में जाना चाहिए सकारात्मक संदेश
- Lok Sabha News: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की सांसदों से अपील- सदन में हंगामा छोड़ चर्चा में लें भाग
संसद के मानसून सत्र के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर पक्ष और विपक्ष के बीच जारी भारी गतिरोध के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दोनों पक्षों से बेहद गंभीर अपील की है। नई दिल्ली स्थित संसद भवन में लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही जैसे ही नारेबाजी और तख्तियां लहराने का सिलसिला शुरू हुआ, स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों से शांत रहने और अपनी सीटों पर बैठने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सदन देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और यहां हंगामा करने के बजाय जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए ताकि पूरे देश में एक सकारात्मक संदेश जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवाद और चर्चा ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं और हर संवेदनशील मुद्दे पर सरकार व विपक्ष मिलकर विचार-विमर्श कर सकते हैं।
संसद के वर्तमान सत्र में पिछले कई दिनों से लगातार विभिन्न विषयों को लेकर गतिरोध बना हुआ है। मंगलवार को जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्षी दलों के कई सदस्य तख्तियां लेकर वेल में आ गए और नारेबाजी करने लगे।
हंगामे के कारण प्रश्नकाल और शून्यकाल का महत्वपूर्ण समय लगातार बाधित हो रहा है। स्थिति को संभालने और सदन का कामकाज पटरी पर लाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मोर्चा संभाला और नारेबाजी कर रहे सदस्यों को समझाते हुए मर्यादित आचरण करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि देश की जनता ने सांसदों को अपने मुद्दों की आवाज उठाने और नियम-कानून बनाने के लिए चुनकर भेजा है, न कि तख्तियां दिखाने और कार्यवाही ठप करने के लिए।
सदन की कार्यवाही पूर्वाह्न 11 बजे शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी। कार्यसूची के अनुसार जब प्रश्नकाल की शुरुआत की जा रही थी, तब शोर-शराबा इतना बढ़ गया कि मंत्रियों के उत्तर स्पष्ट सुनाई नहीं दे रहे थे।
तनावपूर्ण माहौल के बीच अध्यक्ष ओम बिरला ने बार-बार सदस्यों से अपनी सीटों पर वापस जाने का अनुरोध किया। उन्होंने दोनों पक्षों के वरिष्ठ नेताओं और सचेतकों का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि वेल में आकर नारेबाज़ करना और संसदीय प्रक्रियाओं में व्यवधान डालना परंपराओं के अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि सदस्य शांतिपूर्वक चर्चा में भाग लेंगे तो वे हर महत्वपूर्ण विषय पर बोलने के लिए पर्याप्त समय देने को तैयार हैं। हालांकि, बार-बार की अपील के बावजूद जब व्यवधान जारी रहा, तो अध्यक्ष ने असंतोष जताते हुए सदन की कार्यवाही स्थगित करने की चेतावनी भी दी और कार्य मंत्रणा समिति में आम सहमति बनाने के प्रयास शुरू किए।
लोकसभा अध्यक्ष की अपील के बाद संसदीय कार्य मंत्री और सरकार के प्रतिनिधियों ने बयान जारी कर कहा कि सरकार हर ज्वलंत मुद्दे पर नियम के तहत चर्चा कराने के लिए तैयार है। सरकार का तर्क है कि विपक्ष केवल राजनीति के तहत सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहा है, जिससे जनता के करों का पैसा और समय दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
दूसरी तरफ, विपक्षी सांसदों का आरोप है कि उन्हें गंभीर मुद्दों, परीक्षाओं में धांधली और कानून व्यवस्था जैसे विषयों पर स्थगन प्रस्ताव के तहत तुरंत चर्चा की अनुमति नहीं दी जा रही है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सीधे और त्वरित चर्चा कराने का आश्वासन नहीं देती, तब तक वे विरोध दर्ज कराते रहेंगे।
सदन में लगातार जारी इस गतिरोध और अध्यक्ष की बेबस अपील का सीधा असर संसदीय कामकाज पर पड़ रहा है। जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधेयक बिना विस्तृत बहस के पास हो रहे हैं या फिर टल रहे हैं।
जनता से जुड़े सवाल जो प्रश्नकाल में पूछे जाने थे, वे हंगामे की भेंट चढ़ रहे हैं। इसके साथ ही, बार-बार सदन स्थगित होने से देश के करदाताओं के पैसों के नुकसान पर भी जनसाधारण में बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संसदीय मर्यादा और संवाद की परंपरा कमजोर होगी, तो इसका असर पूरे देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर नकारात्मक रूप से पड़ेगा।
गतिरोध को समाप्त करने और सदन को सुचारू रूप से चलाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पक्ष और विपक्ष के floor leaders (दल के नेताओं) की एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में यह तय करने का प्रयास किया जाएगा कि किन विषयों पर किस नियम के तहत चर्चा कराई जाए ताकि प्रश्नकाल और विधायी कामकाज बिना किसी बाधा के पूरा हो सके।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विपक्षी दल अपने विरोध के तरीके में ढील देंगे और क्या सरकार उनकी मांगों के अनुरूप चर्चा का समय तय करेगी ताकि सत्र के शेष दिनों में सार्थक बहस देखने को मिल सके।
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