लखनऊ: नकली ओइंटमेंट के अवैध कारोबार में दो आरोपियों की अग्रिम जमानत खारिज, कोर्ट ने माना गंभीर अपराध
लखनऊ सत्र अदालत ने नकली थ्रोम्बोफोब ओइंटमेंट की खरीद-बिक्री के आरोपी सनी और ऋषभ कश्यप की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की। फर्जी बिलिंग का भी लगा आरोप।
नकली और अमानक दवाओं के अवैध क्रय-विक्रय और भंडारण से जुड़े एक गंभीर प्रकरण में लखनऊ की सत्र अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सत्र न्यायाधीश मलखान सिंह की अदालत ने मामले की गंभीरता और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए आरोपी सनी कश्यप और ऋषभ कश्यप की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से की गई जांच के आधार पर दर्ज मुकदमे में इन दोनों आरोपियों पर नकली थ्रोम्बोफोब ओइंटमेंट की खरीद-फरोख्त, भंडारण और अवैध वितरण में संलिप्त रहने के आरोप हैं।
अभियोजन के अनुसार जाइडस हेल्थकेयर लिमिटेड की ओर से दी गई शिकायत के बाद शिव शक्ति फार्मा के परिसर में संयुक्त जांच की गई थी। इस जांच के दौरान थ्रोम्बोफोब ओइंटमेंट के बैच संख्या 1403999 और 1404222 की दवाएं पूरी तरह संदिग्ध पाई गई थीं। विभागीय जांच और मूल निर्माता कंपनी द्वारा किए गए सत्यापन में यह पुष्टि हुई कि संबंधित बैच की दवाएं पूरी तरह नकली थीं। जांच अधिकारियों ने करीब 24 हजार पीस नकली दवा की आपूर्ति, खरीद और वापसी से जुड़े संदिग्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी विस्तृत जांच की थी।
डीजीसी क्रिमिनल राकेश पांडे ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए नकली दवाओं के खिलाफ प्रदेश की जीरो टॉलरेंस नीति का पक्ष अदालत के सामने रखा। उन्होंने दलील दी कि आरोपियों ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर नकली दवाओं का बड़ा नेटवर्क संचालित किया और फर्जी बिलों के माध्यम से इन वित्तीय लेन-देन को छिपाने की सुनियोजित कोशिश की। अदालत ने कहा कि प्रकरण आम जनता के जीवन और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण अत्यंत संवेदनशील है और जांच के इस महत्वपूर्ण चरण में आरोपियों को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
Also Click : Hardoi: सरकारी रास्ते पर हैंडपंप लगाकर आवागमन बाधित करने का आरोप, ग्रामीणों ने एसडीएम से लगाई गुहार
What's Your Reaction?







