Lucknow : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस में आठ डाटा सेंटर पार्क उत्तर प्रदेश को बढ़ाएंगे आगे

डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने रुचि दिखाई है। एचसीएल, अडानी ग्रुप, एनटीटी डेटा, योट्टा इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टर्लाइट टेक्नोलॉजीज और सिफी टेक्नोलॉ

By INA News Desk
Mar 16, 2026 - 21:07
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Lucknow : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस में आठ डाटा सेंटर पार्क उत्तर प्रदेश को बढ़ाएंगे आगे
Lucknow : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस में आठ डाटा सेंटर पार्क उत्तर प्रदेश को बढ़ाएंगे आगे

  • नोएडा से वाराणसी तक आठ शहरों में विकसित होंगे डेटा सेंटर पार्क
  • लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव, कई बड़ी कंपनियां दिखा रहीं रुचि
  • 900 मेगावाट बिजली आपूर्ति और नई नीति से डेटा सेंटर उद्योग को मिलेगा बल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश को देश का प्रमुख डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हब बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। इसी रणनीति के अंतर्गत प्रदेश में 8 डेटा सेंटर पार्क विकसित किए जाने की योजना तैयार की गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रोद्योगिकी विशेषज्ञों का कहना है कि डेटा सेंटर पार्कों के विकास से उत्तर प्रदेश देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही आने वाले समय में एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के लिए यह एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा।

सरकार की योजना के अनुसार इन डेटा सेंटर पार्कों को नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और आगरा जैसे प्रमुख शहरों में विकसित किया जाएगा। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र में जमीन की पहचान और आवंटन की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है। कुछ कंपनियों को जमीन आवंटित भी की जा चुकी है, जबकि अन्य स्थानों पर भूमि चिन्हांकन और मास्टर प्लान तैयार करने का काम जारी है।

डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने रुचि दिखाई है। एचसीएल, अडानी ग्रुप, एनटीटी डेटा, योट्टा इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टर्लाइट टेक्नोलॉजीज और सिफी टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियां प्रदेश में निवेश की दिशा में आगे आईं हैं। इन कंपनियों की ओर से कुल मिलाकर करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। इनमें से कई परियोजनाओं के लिए समझौता ज्ञापन भी हस्ताक्षरित किए जा चुके हैं और कुछ परियोजनाएं निर्माण की दिशा में अग्रसर हो रहीं हैं। डेटा सेंटर के संचालन के लिए बड़े पैमाने पर बिजली की आवश्यकता होती है। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने लगभग 900 मेगावाट बिजली की मांग को पूरा करने की योजना बनाई है। इसके लिए नए सब स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा और डेटा सेंटर पार्कों को समर्पित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि डेटा सेंटर संचालन को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके।

प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए डेटा सेंटर नीति के अंतर्गत कई प्रोत्साहन भी तय किए हैं। इसमें पूंजीगत सब्सिडी, बिजली शुल्क में रियायत, स्टांप ड्यूटी में छूट और बुनियादी ढांचे के विकास में सरकारी सहयोग शामिल है। इसके अलावा निवेशकों को तेज और पारदर्शी अनुमति प्रक्रिया देने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम भी लागू किया गया है। इन 8 डेटा सेंटर पार्कों के विकसित होने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार सृजित होंगे। लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष रोजगार और बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। अनुमान है कि परियोजनाओं के अधिकांश चरण अगले 3 से 5 वर्षों के भीतर पूरे हो जाएंगे।

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