यूपी में मधुमक्खी पालन से बढ़ रही किसानों की आमदनी: 40 फीसदी अनुदान के साथ तीन केंद्रों पर 76 युवाओं को मिला प्रशिक्षण
उत्तर प्रदेश में किसानों और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 3 केंद्रों पर मधुमक्खी पालन का 90 दिवसीय प्रशिक्षण जारी। इकाई लगाने पर 40% अनुदान दे रही सरकार।
लखनऊ। प्रदेश में ग्रामीण आर्थिकी को गति देने और किसानों व शिक्षित युवाओं को स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से शासन ने मधुमक्खी पालन व्यवसाय को बढ़ावा देने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में राज्य के तीन बड़े औद्यानिक प्रशिक्षण केंद्रों में कुल 76 शिक्षार्थियों को नब्बे दिनों का व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे आधुनिक विधियों में पारंगत होकर सफल कृषि उद्यमी के रूप में स्थापित हो सकें।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, बस्ती औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में पंद्रह, सहारनपुर केंद्र में उनतीस तथा राजकीय मौनपालन प्रशिक्षण केंद्र प्रयागराज में बत्तीस शिक्षार्थियों को वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन के गुर सिखाए जा रहे हैं। उद्यान निदेशक भानु प्रकाश राम ने बताया कि विभाग द्वारा संचालित योजना के तहत नए उद्यमियों को संबल प्रदान करने के लिए मधुमक्खी पालन इकाई की कुल लागत पर चालीस प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत चयनित प्रत्येक लाभार्थी को पचास मधुमक्खी कालोनियों और लकड़ी के बक्सों से युक्त पूरी यूनिट दी जाती है, जिसमें शहद निष्कर्षण और रख-रखाव के समस्त आवश्यक यंत्र भी शामिल रहते हैं।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से ग्रामीण अंचलों में रोजगार के नए रास्ते खुलने के साथ-साथ पर्यावरण और खेती को भी सीधा लाभ मिलेगा। उन्नत तकनीक और वित्तीय सहयोग के माध्यम से किसान शुद्ध शहद, मोम और अन्य सह-उत्पादों का उत्पादन कर अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही खेतों के आसपास मधुमक्खियों की सक्रियता बढ़ने से प्राकृतिक परागण की गति तेज होती है, जिससे फसलों और बागवानी की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाती है।
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