लखनऊ में 'सनातन विरोधी रावण' पोस्टर पर गरमाई सियासत, अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा तीखा निशाना
लखनऊ में विपक्षी नेताओं को रावण के रूप में दर्शाने वाले पोस्टरों पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे भगवान राम का चित्र छिपाने और ध्यान भटकाने की साजिश करार दिया।
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के प्रमुख चौराहों पर लगे एक विवादित पोस्टर ने राज्य के सियासी पारे को चढ़ा दिया है। शहर के हजरतगंज, गोमती नगर और कपूरथला जैसे इलाकों में 'सनातन रक्षा संगठन' की ओर से लगाए गए इन होर्डिंग्स में विपक्षी नेताओं सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों को प्रतीकात्मक रूप से रावण के दस सिरों के रूप में दर्शाया गया है। इस होर्डिंग पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे सत्ताधारी दल की राजनीतिक हताशा और मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है।
सपा प्रमुख ने सोशल मीडिया पर इस मामले को उठाते हुए कहा कि इस तरह के पोस्टर लगाने के पीछे वास्तविक मंशा किसी का चरित्र हनन करने से ज्यादा नीचे लगे भगवान राम के पोस्टर को छिपाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या के रामलला मंदिर से जुड़े निर्माण और वित्तीय मामलों को लेकर जनता के बीच जो सवाल उठ रहे हैं, सरकार उससे बचने का रास्ता तलाश रही है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पूर्व में राजधानी लखनऊ में धार्मिक ग्रंथों के संदर्भ में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रशासन ने जिस तरह का रुख अपनाया था, वह जनभावनाओं के विपरीत था।
अखिलेश यादव ने आगामी त्योहारों का हवाला देते हुए चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि आस्थावान श्रद्धालु केवल पारंपरिक रावण दहन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि धार्मिक स्थानों पर चढ़ावे, चंदे और दान में अनियमितता करने वालों के खिलाफ भी जनता के मन में गहरा आक्रोश है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को प्रायोजित बताते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर बिना प्रशासनिक अनुमति के ऐसे भ्रामक बैनर लगाया जाना कानून-व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
दूसरी तरफ, यह पोस्टर सामने आने के बाद हजरतगंज और आसपास के इलाकों में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और कई स्थानों पर इन होर्डिंग्स को हटाने की मांग की। पुलिस और नगर निगम प्रशासन ने शहर के संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गश्त बढ़ा दी है और विवादित प्रचार सामग्री को लेकर कानूनी पहलुओं की जांच की जा रही है।
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