Pan Masala Ad Notice: शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को FDA का नोटिस, विमल इलायची विज्ञापन पर 15 दिन में मांगा जवाब
महाराष्ट्र FDA ने विमल इलायची विज्ञापन को पान मसाले का सरोगेट प्रचार बताते हुए अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
- Shah Rukh Khan, Ajay Devgn & Tiger Shroff: पान मसाला के सरोगेट विज्ञापन पर महाराष्ट्र FDA का कड़ा एक्शन, 15 दिनों में पोस्ट हटाने के निर्देश
- पान मसाला विज्ञापन पर घिरे शाहरुख, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ: महाराष्ट्र FDA ने भेजा कारण बताओ नोटिस, सोशल मीडिया से कंटेंट हटाने के निर्देश
- Bollywood News: विमल इलायची विज्ञापन को लेकर शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को महाराष्ट्र FDA का नोटिस
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के ग्रेटर मुंबई संभाग ने तीनों अभिनेताओं को 'विमल इलायची' के विज्ञापन में भागीदारी को लेकर कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया है। नियामक प्राधिकरण का प्राथमिक तौर पर मानना है कि इलायची के नाम पर किया जा रहा यह प्रचार दरअसल राज्य में प्रतिबंधित पान मसाला और तंबाकू उत्पादों का अप्रत्यक्ष या 'सरोगेट' विज्ञापन है। एफडीए ने इसे 'अंतिम चेतावनी' बताते हुए तीनों सितारों को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स, वेबसाइट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से संबंधित प्रचार सामग्री को तत्काल हटाने और 15 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण व दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया है। तय समय सीमा में संतोषजनक जवाब न मिलने पर विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
- विमल इलायची विज्ञापन पर नियामक प्राधिकरण का चाबुक
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने टेलीविजन, डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे 'विमल इलायची' के विज्ञापन की गहन समीक्षा के बाद यह सख्त विधिक कदम उठाया है। एफडीए के अनुसार, विज्ञापन में प्रयुक्त ट्रेडमार्क 'विमल', उसकी प्रस्तुति शैली, पृष्ठभूमि संगीत और संवाद सीधे तौर पर उस ब्रांड की ओर इशारा करते हैं जो बाजार में मुख्य रूप से गुटखा और पान मसाला से जुड़ा हुआ है।
चूंकि महाराष्ट्र में जनस्वास्थ्य सुरक्षा के मद्देनजर तंबाकू, निकोटीन और सुपारी आधारित खाद्य उत्पादों (पान मसाला) के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर सख्त प्रतिबंध लागू है, ऐसे में एफडीए का मानना है कि इलायची का सहारा लेकर प्रतिबंधित श्रेणी के उत्पादों की ब्रांडिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 (FSS Act) के प्रावधानों और उपभोक्ता संरक्षण नियमों का खुला उल्लंघन माना गया है।
- एफडीए की जांच और नोटिस की प्रमुख शर्तें
महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा आयुक्त द्वारा 13 जुलाई को खाद्य सुरक्षा कानून की धारा 30(2)(a) के तहत राज्य में प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों पर एक वर्ष के लिए जारी निषेधाज्ञा के परिप्रेक्ष्य में यह कार्रवाई की गई है। एफडीए ने विज्ञापन की तकनीकी व कानूनी पड़ताल के बाद तीनों अभिनेताओं शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को 'ब्रांड एंडोर्सर' के रूप में व्यक्तिगत नोटिस जारी किए हैं।
नोटिस में अभिनेताओं से मांगे गए प्रमुख दस्तावेज और विवरण:
एंडोर्समेंट अनुबंध (Contract) की प्रमाणित प्रति और इसके बदले प्राप्त पारिश्रमिक का पूर्ण विवरण।
विज्ञापन अभियान से पहले की गई जांच-पड़ताल (Due Diligence) की विस्तृत रिपोर्ट।
इस बात का दस्तावेजी प्रमाण कि क्या 'विमल इलायची' बाजार में स्वतंत्र रूप से बिकने वाला वास्तविक उत्पाद है या केवल सरोगेट माध्यम।
विज्ञापन का प्रसारण करने वाले सभी टीवी चैनलों, सोशल मीडिया पेजों और डिजिटल हैंडल्स की पूरी सूची।
नोटिस में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि संबंधित सितारे अपने किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से 15 दिनों के भीतर इस विज्ञापन से जुड़ा कंटेंट हटा लें और आगे इसके प्रसारण या संवर्धन में कोई सहयोग न दें।
एफडीए की ग्रेटर मुंबई इकाई ने अपने नोटिस में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 24 और धारा 53 का विशेष रूप से उल्लेख किया है। धारा 24 किसी भी भ्रामक, अनुचित और कानून का उल्लंघन करने वाले खाद्य विज्ञापनों पर रोक लगाती है। वहीं, धारा 53 के तहत किसी भी भ्रामक खाद्य विज्ञापन के प्रकाशन, निर्माण या प्रचार में भागीदार पाए जाने पर संबंधित पक्ष पर 10 लाख रुपये तक का आर्थिक जुर्माना लगाने का कानूनी प्रावधान है।
नियामक अधिकारियों ने साफ किया है कि कानून के तहत मशहूर हस्तियों की यह वैधानिक जिम्मेदारी है कि वे किसी उत्पाद का प्रचार करने से पूर्व उसकी कानूनी वैधता और उपभोक्ता सुरक्षा की भलीभांति पड़ताल करें। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक तीनों अभिनेताओं या उनकी पीआर व लीगल टीमों की ओर से इस नोटिस पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है।
सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और सरोगेट विज्ञापनों पर असर
इस कार्रवाई को भारतीय विज्ञापन जगत और फिल्म उद्योग में सरोगेट विज्ञापनों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा विनियामक कदम माना जा रहा है। लंबे समय से स्वास्थ्य कार्यकर्ता और नागरिक संगठन इस बात की मांग कर रहे थे कि शराब और तंबाकू ब्रांड्स द्वारा इलायची, माउथ फ्रेशनर, सोडा और म्यूजिक सीडी के नाम पर किए जाने वाले 'ब्रांड एक्सटेंशन' विज्ञापनों पर नकेल कसी जाए। एफडीए के इस कड़े रुख से अन्य ए-लिस्ट अभिनेताओं, क्रिकेटरों और इन्फ्लुएंसर्स पर भी ऐसे ब्रांड्स से खुद को अलग करने का दबाव बढ़ेगा। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) और भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) की गाइडलाइंस के तहत भी भ्रामक विज्ञापनों में शामिल एंडोर्सर्स पर तीन साल तक किसी भी उत्पाद के प्रचार पर प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था है।
एफडीए ने तीनों अभिनेताओं को 15 दिनों की समयावधि दी है, जिसके भीतर वे स्वयं या अपने अधिकृत कानूनी प्रतिनिधि के माध्यम से व्यक्तिगत सुनवाई (Personal Hearing) की मांग भी कर सकते हैं। यदि निर्धारित 15 दिनों में कोई उत्तर नहीं आता है अथवा प्रस्तुत जवाब असंतोषजनक पाया जाता है, तो एफडीए बिना किसी पूर्व सूचना के सक्षम न्यायालय में अभियोजन प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इसके साथ ही एफडीए विज्ञापन एजेंसी और संबंधित ब्रांड स्वामी कंपनी के खिलाफ भी आवश्यक कानूनी शिकंजा कसने की प्रक्रिया में है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कानूनी नोटिस के जवाब में अभिनेताओं की ओर से क्या रुख अपनाया जाता है।
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