'ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत...': ब्रिक्स सम्मेलन में भारत पहुंचे मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम ने किशोर कुमार का गाना गाकर जीता दिल
नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने आए मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने किशोर कुमार का क्लासिक गीत 'ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत' गाकर भारतीय संस्कृति के प्रति अपना स्नेह जताया।
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नई दिल्ली ब्रिक्स समिट: कूटनीति के मंच पर दिखी सांस्कृतिक आत्मीयता, मलेशिया के प्रधानमंत्री ने गुनगुनाया बॉलीवुड का क्लासिक गीत
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Anwar Ibrahim Sings Kishore Kumar: भारत यात्रा पर पहुंचे मलेशियाई पीएम का दिखा अनूठा अंदाज, पुराने हिंदी गीतों के प्रति साझा किया लगाव
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ब्रिक्स सम्मेलन 2026: भारत-मलेशिया सांस्कृतिक जुड़ाव का दिखा खूबसूरत रंग, जब पीएम अनवर इब्राहिम ने गाया 1971 की फिल्म का नगमा
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की मेज आमतौर पर गंभीर आर्थिक वार्ताओं, द्विपक्षीय समझौतों और भू-राजनीतिक समीकरणों के लिए जानी जाती है। लेकिन जब गंभीर कूटनीतिक बैठकों के बीच संगीत और सांस्कृतिक आत्मीयता का पुट जुड़ जाए, तो माहौल सहज और आत्मीय बन जाता है। नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत पहुंचे मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर इब्राहिम ने कुछ ऐसा ही दृश्य प्रस्तुत किया। उन्होंने औपचारिक संवाद और चर्चा के बीच महान भारतीय गायक किशोर कुमार का अमर गीत ‘ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत...’ गाकर सभी का दिल जीत लिया।
मलेशियाई प्रधानमंत्री का यह संगीतमय अंदाज न केवल सभा में मौजूद गणमान्य व्यक्तियों के चेहरे पर मुस्कान ले आया, बल्कि इसने एक बार फिर सिद्ध किया कि कला, सिनेमा और संगीत सीमाओं से परे देशों और संस्कृतियों को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम हैं।
1971 का सदाबहार नगमा और मलेशियाई पीएम का जुड़ाव
वर्ष 1971 की क्लासिक फिल्म 'तीन देवियां' में देव आनंद पर फिल्माया गया और संगीतकार एस. डी. बर्मन के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार द्वारा गाया गया गीत ‘ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत...’ आधी सदी से अधिक समय से भारतीय संगीत प्रेमियों के दिलों में रचा-बसा है। जब अनवर इब्राहिम ने इस गीत की पंक्तियों को पूरे सुर और सहज अभिव्यक्ति के साथ प्रस्तुत किया, तो सभागार तालियों से गूंज उठा।
अनवर इब्राहिम का भारतीय सिनेमा और शास्त्रीय संगीत के प्रति लगाव नया नहीं है। दक्षिण-पूर्व एशिया, विशेष रूप से मलेशिया में, भारतीय सिनेमा और गीतों का एक विशाल और पुराना दर्शक वर्ग रहा है। अनवर इब्राहिम इससे पूर्व भी अपनी पिछली भारत यात्राओं और विभिन्न संवाद सत्रों के दौरान भारतीय साहित्य, महाकाव्यों और संगीत के अपने ज्ञान का सार्वजनिक रूप से उल्लेख कर चुके हैं। उन्होंने अक्सर इस बात को स्वीकार किया है कि उनके युवा दिनों में भारतीय गीतों और फिल्मों का दक्षिण-पूर्व एशियाई समाज में व्यापक सांस्कृतिक प्रभाव था।
सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति का असर
अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी शीर्ष राष्ट्राध्यक्ष द्वारा मेज़बान देश की भाषा और लोकप्रिय संस्कृति के प्रति इस प्रकार का सहज सम्मान प्रदर्शित करना 'सॉफ्ट पावर कूटनीति' का उत्कृष्ट उदाहरण है। जब कोई वैश्विक नेता स्थानीय भाषा में अभिवादन करता है या वहां की लोकप्रिय सांस्कृतिक धरोहर को साझा करता है, तो यह केवल औपचारिकता न रहकर जनता-से-जनता के सीधे जुड़ाव (पीपल-टू-पीपल कनेक्ट) में तब्दील हो जाता है।
भारत और मलेशिया के संबंध सदियों पुराने समुद्री व्यापार, साझा ऐतिहासिक स्मृतियों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर आधारित हैं। मलेशिया में एक बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं, जिन्होंने वहां के सामाजिक और आर्थिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में मलेशिया के प्रधानमंत्री द्वारा भारतीय संगीत के प्रति दिखाया गया यह आदर दोनों देशों के ऐतिहासिक और मानवीय संबंधों को एक नई गर्मजोशी प्रदान करता है।
ब्रिक्स सम्मेलन में पार्टनर देश के रूप में मलेशिया की उपस्थिति
उल्लेखनीय है कि मलेशिया ब्रिक्स संगठन के आधिकारिक पार्टनर देशों में शामिल है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन पार्टनर देशों के सत्र में भाग लेते हुए प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की प्राथमिकताओं, संतुलित आर्थिक विकास और समावेशी वैश्विक व्यवस्था की वकालत की।
कूटनीतिक स्तर पर मलेशिया और भारत के बीच सेमीकंडक्टर, डिजिटल अर्थव्यवस्था, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और कृषि उत्पादों के व्यापार में मजबूत साझेदारी मौजूद है। दोनों देश स्थानीय मुद्राओं में आपसी व्यापार को सुगम बनाने की दिशा में भी सक्रियता से काम कर रहे हैं। हालांकि, इन सभी तकनीकी और आर्थिक वार्ताओं के बीच अनवर इब्राहिम द्वारा किशोर कुमार के गीत की प्रस्तुति ने पूरे घटनाक्रम में एक मानवीय और यादगार स्पर्श जोड़ दिया।
सोशल मीडिया पर भी मिल रही सराहना
इस घटना का वीडियो और विवरण सामने आते ही यह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया। इंटरनेट उपयोगकर्ताओं और सिनेमा प्रेमियों ने मलेशियाई प्रधानमंत्री के इस भाव की जमकर प्रशंसा की। कई लोगों ने इसे दो देशों के बीच संबंधों की प्रगाढ़ता और भारतीय संगीत की वैश्विक पहुंच का प्रमाण बताया।
यह क्षण यह भी रेखांकित करता है कि जब दो राष्ट्र संवाद करते हैं, तो केवल आर्थिक आंकड़े ही पर्याप्त नहीं होते; साझा सांस्कृतिक संवेदनाएं और आपसी सम्मान ही वह आधार बनते हैं जो कूटनीति को दीर्घकालिक विश्वास में बदलते हैं। नई दिल्ली में भारत मंडपम के मंच से निकला यह सुरीला संदेश भारत-मलेशिया मित्रता के पन्नों में एक मधुर स्मृति के रूप में दर्ज हो गया है।
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