UP Judiciary News: मुजफ्फरनगर में जज रवि दिवाकर का बड़ा फैसला, 4 माह में 22 दोषियों को सुनाई फांसी की सजा
मुजफ्फरनगर के फास्ट ट्रैक कोर्ट जज रवि दिवाकर ने 4 माह में 22 अपराधियों को मृत्युदंड सुनाया है। ज्ञानवापी सर्वे आदेश से चर्चा में आए जज अब तक 35 दोषियों को फांसी दे चुके हैं।
मुजफ्फरनगर में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज रवि दिवाकर के कड़े फैसले, 4 माह में 22 दोषियों को सुनाई मृत्युदंड की सजा
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट में तैनात अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि दिवाकर अपने कड़े और त्वरित न्यायिक फैसलों को लेकर चर्चा में हैं। मुजफ्फरनगर में पदभार संभालने के बाद उन्होंने महज चार महीनों के भीतर लगभग 10 विभिन्न गंभीर आपराधिक प्रकरणों की सुनवाई पूरी करते हुए 22 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है।
रवि दिवाकर इससे पहले वाराणसी में सिविल जज पद पर रहते हुए ज्ञानवापी परिसर का वीडियोग्राफी सर्वेक्षण कराने का आदेश देकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। उस ऐतिहासिक आदेश के उपरांत उन्हें कई माध्यमों से धमकियां भी मिली थीं। इसके बाद बरेली में अपनी तैनाती के दौरान भी उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए 13 दोषियों को फांसी की सजा दी थी। मुजफ्फरनगर के ताजा मामलों को मिलाकर वे अपने पूरे न्यायिक सफर में अब तक कुल 35 गंभीर अपराधियों को मृत्युदंड की सजा सुना चुके हैं।
भारतीय कानून और न्याय व्यवस्था के स्थापित नियमों के मुताबिक, किसी भी जिला या सत्र अदालत द्वारा दी गई मृत्युदंड की सजा को अंतिम रूप से लागू करने से पहले उच्च न्यायालय से अनुमोदन प्राप्त होना अनिवार्य होता है। जघन्य अपराधों पर लगातार कठोर रुख अपनाने और मुकदमों का समयबद्ध निस्तारण करने के कारण उनकी अदालत के फैसले लगातार ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
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