नवरात्रि स्पेशल (पहला दिन - माँ शैलपुत्री) : नारी तू नारायणी - गांव की बेटी ने दो वर्षों में दुग्ध व्यवसाय से अर्जित किए 34 लाख

बलिया के बहुआरा गांव की रहने वाली दुर्गेश तिवारी एक साधारण परिवार से हैं। शादी के बाद उनका जीवन पति, दो बेटियों और सास के साथ सीमित दायरे में था। परिवार की आय का मुख्य

Mar 18, 2026 - 21:57
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नवरात्रि स्पेशल (पहला दिन - माँ शैलपुत्री) : नारी तू नारायणी - गांव की बेटी ने दो वर्षों में दुग्ध व्यवसाय से अर्जित किए 34 लाख
नवरात्रि स्पेशल (पहला दिन - माँ शैलपुत्री) : नारी तू नारायणी - गांव की बेटी ने दो वर्षों में दुग्ध व्यवसाय से अर्जित किए 34 लाख

  • नवदुर्गा-नवशक्ति की मिसाल : गांव की बेटियां बनीं गांव की अर्थव्यवस्था की ताकत
  • सीएम योगी के विजन से बदली गांवों की तस्वीर, आजीविका मिशन से आत्मनिर्भर बन रहा प्रदेश
  • 'काशी की लखपति दीदी' की प्रेरणा से गांव की अन्य महिलाएं भी पशुपालन से जुड़कर बन रहीं आत्मनिर्भर
  • सीएम योगी के विजन से अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनीं उत्तर प्रदेश की महिलाएं

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण अब सिर्फ नारा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत बनता जा रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन से गांवों की तस्वीर बदल रही है। आज नवदुर्गा-नवशक्ति की मिसाल बनकर गांव की बेटियां गांव की अर्थव्यवस्था की ताकत बन रही हैं। “नारी तू नारायणी” की भावना को साकार करती बलिया जनपद के बहुआरा गांव की दुर्गेश तिवारी आज उस बदलाव की प्रतीक बन गई हैं, जहां गांव की बेटी अब परिवार ही नहीं, विकसित भारत विकसित उत्तर प्रदेश की रीढ़ बन रही है। मात्र दो वर्षों में दूध व्यवसाय से 34.61 लाख रुपये की आय अर्जित कर दुर्गेश ने ‘काशी की लखपति दीदी’ बनने का गौरव हासिल किया है। उनकी यह सफलता न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए हो रहे सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की जीवंत मिसाल भी है।

संघर्ष की जमीन से सफलता की उड़ान
बलिया के बहुआरा गांव की रहने वाली दुर्गेश तिवारी एक साधारण परिवार से हैं। शादी के बाद उनका जीवन पति, दो बेटियों और सास के साथ सीमित दायरे में था। परिवार की आय का मुख्य स्रोत खेती और 3-4 पशु थे, लेकिन दूध बेचने पर न तो उचित कीमत मिलती थी और न ही समय पर भुगतान। 20–25 रुपये प्रति लीटर के औने-पौने दाम और भुगतान की अनिश्चितता ने उनके सपनों को जैसे रोक दिया था।
दुर्गेश बताती हैं "उस समय घर का खर्च और बेटियों की पढ़ाई की चिंता में नींद उड़ गई थी।

काशी डेयरी से बदली किस्मत
इसी दौरान गांव में काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, वाराणसी की जानकारी मिली। यहां गुणवत्ता आधारित उचित मूल्य और 365 दिन सीधे बैंक खाते में भुगतान की व्यवस्था ने दुर्गेश के जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने सदस्यता लेकर दूध आपूर्ति शुरू की। जहां पहले उनका दूध औने-पौने दाम पर बिकता था, वहीं अब उन्हें सही कीमत मिलने लगी। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने पशुपालन का दायरा बढ़ाकर 20 से अधिक पशु तक कर लिया।

‘लखपति दीदी’ बनने तक का सफर
लगातार मेहनत और सही प्लेटफॉर्म मिलने से दुर्गेश ने दो वर्षों में 34.61 लाख रुपये की आय अर्जित की। इसी उपलब्धि ने उन्हें ‘काशी की लखपति दीदी’ का सम्मान दिलाया।
यह आय केवल आर्थिक मजबूती नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का संकेत भी बनी। दुर्गेश ने अपनी बड़ी बेटी की शादी सम्मानपूर्वक की और छोटी बेटी को पुलिस अधिकारी बनाना चाह रही हैं।

गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
आज दुर्गेश तिवारी पंचदेवी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। उनके नेतृत्व में गांव की अन्य महिलाएं भी पशुपालन और डेयरी व्यवसाय से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
उनका अगला लक्ष्य आधुनिक डेयरी फार्म स्थापित करना और गोबर से जैविक खाद बनाकर अतिरिक्त आय के स्रोत तैयार करना है।

योगी सरकार के विजन से बदलता ग्रामीण परिदृश्य
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में आजीविका मिशन के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में ठोस काम हुआ है। स्वयं सहायता समूहों और डेयरी जैसे रोजगार से महिलाएं अब गांव की अर्थव्यवस्था की प्रमुख शक्ति बन रही हैं।

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