Noida-Ganga Expressway Link: नोएडा-ग्रेटर नोएडा से गंगा एक्सप्रेसवे तक का सफर होगा आसान, 105 मीटर चौड़ी सड़क का प्लान तैयार
नोएडा और ग्रेटर नोएडा से गंगा एक्सप्रेसवे की दूरी घटाने के लिए 105 मीटर चौड़ी लिंक रोड का नया प्लान तैयार हुआ है। जानिए इस कॉरिडोर से कैसे बदलेगी कनेक्टिविटी।
- Ganga Expressway Link Road: नोएडा-ग्रेटर नोएडा से गंगा एक्सप्रेसवे की दूरी होगी कम, 105 मीटर चौड़े नए लिंक कॉरिडोर का खाका तैयार
- नोएडा से सीधे जुड़ेगा गंगा एक्सप्रेसवे: 105 मीटर चौड़ी सड़क की विस्तृत कार्ययोजना तैयार, सफर में घटेंगे घंटे
- नोएडा-ग्रेटर नोएडा को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए 105 मीटर चौड़ी सड़क का मास्टर प्लान तैयार, कनेक्टिविटी को लगेंगे पंख
उत्तर प्रदेश औद्योगिक और ढांचागत विकास प्राधिकरण तथा संबंधित क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के नोएडा और ग्रेटर नोएडा को गंगा एक्सप्रेसवे से सीधी कनेक्टिविटी देने के लिए 105 मीटर चौड़ी सड़क का महत्वाकांक्षी प्लान तैयार किया है। इस नए लिंक मार्ग का निर्माण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इन प्रमुख औद्योगिक शहरों और प्रयागराज तक जाने वाले गंगा एक्सप्रेसवे के बीच यात्रा समय को उल्लेखनीय रूप से घटाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इस कॉरिडोर के जरिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के वाहन चालकों को हापुड़, मेरठ या बुलंदशहर के अंदरूनी संकरे रास्तों से निकलने की मजबूरी खत्म होगी। परियोजना का खाका तैयार होने के बाद अब संबंधित एजेंसियां भूमि चिह्नांकन और डीपीआर की मंजूरी की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही हैं।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नोएडा और ग्रेटर नोएडा को प्रदेश की सबसे बड़ी सड़क ढांचागत परियोजनाओं में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक और तकनीकी कदम उठाया गया है। विकास प्राधिकरणों और एक्सप्रेसवे निर्माण एजेंसी ने मिलकर 105 मीटर चौड़े एक नए लिंक कॉरिडोर की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया है।
इस लिंक रोड का मुख्य उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर से आने वाले भारी और हल्के वाहनों को बिना किसी जाम के सीधे गंगा एक्सप्रेसवे के नेटवर्क पर पहुंचाना है। इस चौड़े कॉरिडोर के निर्माण से न केवल वाहनों की गति निर्बाध रहेगी बल्कि आने वाले दशकों के भारी यातायात भार को भी यह मार्ग आसानी से संभालने में सक्षम होगा।
गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाती है। इस मार्ग की शुरुआत और मध्यवर्ती हिस्सों का लाभ नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास विकसित हो रहे औद्योगिक संकुलों को सुगमता से नहीं मिल पा रहा था। यात्रियों और मालवाहक वाहनों को वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्गों या जिला मार्गों के संकरे कस्बाई इलाकों से गुजरना पड़ता है, जिससे समय और ईंधन दोनों का भारी नुकसान होता है।
इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए संबंधित विकास प्राधिकरणों के नगर नियोजकों ने व्यापक सर्वे कराया। सर्वे के बाद ग्रेटर नोएडा के अंतिम छोर और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र से एक समर्पित 105 मीटर चौड़ा लिंक मार्ग तैयार करने का खाका खींचा गया। यह मार्ग बुलंदशहर सीमा से होते हुए सीधे गंगा एक्सप्रेसवे के निकटतम इंटरचेंज पर जाकर मिलेगा।
योजना के तहत सड़क के दोनों ओर हरित पट्टी, सर्विस लेन, भारी ट्रकों के लिए अलग कॉरिडोर और अत्याधुनिक टोलिंग सिस्टम की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इस लिंक के जुड़ने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विनिर्माण हब सीधे मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बाजारों से तेज गति से जुड़ सकेंगे।
परियोजना से जुड़े वरिष्ठ नगर नियोजकों और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह 105 मीटर चौड़ा मार्ग भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र में जिस गति से आवासीय कॉलोनियां, आईटी पार्क, डाटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स हब बन रहे हैं, उसे देखते हुए एक्सप्रेसवे स्तर की सीधी कनेक्टिविटी बेहद जरूरी हो चुकी थी।
क्षेत्रीय ट्रांसपोर्टर्स और उद्योग संघों ने इस योजना का पुरजोर स्वागत किया है। उद्यमियों का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट और औद्योगिक सेक्टरों से पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा बिहार की सीमा तक माल ढुलाई में लगने वाला समय इस लिंक रोड के बनने से कई घंटे कम हो जाएगा, जिससे स्थानीय उत्पादों की लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी।
इस नए सड़क संपर्क का सबसे बड़ा फायदा दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दैनिक यात्रियों को मिलेगा। वर्तमान में गंगा एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए जो समय संकरे रास्तों पर व्यर्थ होता था, वह पूरी तरह बच जाएगा।
इसके अतिरिक्त इस 105 मीटर चौड़े मार्ग के दोनों ओर जमीन की मांग में उछाल आना तय माना जा रहा है। मार्ग के किनारे नए आवासीय सेक्टर, वेयरहाउसिंग पार्क और कमर्शियल हब विकसित होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। रियल एस्टेट बाजार के जानकारों के अनुसार यह परियोजना ग्रेटर नोएडा के बाहरी क्षेत्रों और आसपास के कस्बों में निवेश के नए दरवाजे खोलेगी और रोजगार के व्यापक अवसर पैदा करेगी।
कार्ययोजना तैयार होने के बाद अब संबंधित विभाग संयुक्त रूप से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को शासन स्तर पर प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं। इसके साथ ही मार्ग के संरेखण (अलाइनमेंट) के दायरे में आने वाली भूमि के अधिग्रहण और सर्वे का कार्य शुरू किया जाएगा। पर्यावरण और वन विभाग से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने के उपरांत निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया आमंत्रित की जाएगी। लक्ष्य रखा गया है कि गंगा एक्सप्रेसवे के पूर्ण संचालन से पहले इस लिंक मार्ग का निर्माण कार्य भी तय समय सीमा के भीतर पूरा करा लिया जाए।
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