Pilibhit News: भविष्य के वन्यजीव योद्धाओं की पाठशाला- पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में एक्वाटिक वाइल्डलाइफ स्कूल का आगाज़
20 से 25 मार्च तक चलने वाला यह छह दिवसीय कार्यक्रम जलीय जीवों के संरक्षण से जुड़ी गहन जानकारी और व्यावहारिक कौशल प्रदान करने पर केंद्रित है। कार्यक्रम का उ...
नेपाल, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के 16 प्रतिभागी शामिल हुए हैं, जिनमें वन्यजीव शोधकर्ता, संरक्षणविद् और छात्र शामिल हैं
Report: कुँवर निर्भय सिंह, आईएनए पीलीभीत- उत्तर प्रदेश
By INA News Pilibhit.
पीलीभीत: स्कूल ऑफ़ एक्वाटिक वाइल्डलाइफ बायोलॉजी एंड कंज़र्वेशन का 8वां संस्करण पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में प्रारंभ हुआ। यह कार्यक्रम टीएसए फाउंडेशन इंडिया (TSAFI), उत्तर प्रदेश वन विभाग और पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया है, जिसमें अंबिका मिश्रा का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने कार्यक्रम को प्रायोजित कर संरक्षण प्रयासों को सशक्त बनाया।
20 से 25 मार्च तक चलने वाला यह छह दिवसीय कार्यक्रम जलीय जीवों के संरक्षण से जुड़ी गहन जानकारी और व्यावहारिक कौशल प्रदान करने पर केंद्रित है। कार्यक्रम का उद्घाटन शेर सिंह चौधरी, कमांडिंग ऑफिसर, 49वीं बटालियन, सशस्त्र सीमा बल (SSB) द्वारा किया गया।
इस अवसर पर मनीष सिंह, डिप्टी फील्ड डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिज़र्व, और भारत कुमार डीके, डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर, भी उपस्थित रहे। इस वर्ष कार्यक्रम में नेपाल, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के 16 प्रतिभागी शामिल हुए हैं, जिनमें वन्यजीव शोधकर्ता, संरक्षणविद् और छात्र शामिल हैं।
कार्यक्रम के पहले दिन परिचय सत्र आयोजित किया गया, जिसके बाद डॉ. शैलेन्द्र सिंह, निदेशक, TSAFI, द्वारा कछुआ जनगणना तकनीक पर एक इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों को फील्ड में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ, जिससे उन्हें जलीय जीव मॉनिटरिंग में दक्षता हासिल करने का अवसर मिला।
इसके अलावा, डॉ. अरुणिमा सिंह ने कछुआ पारिस्थितिकी और जीवविज्ञान पर एक ज्ञानवर्धक सत्र लिया, जिसमें कछुओं के व्यवहार और संरक्षण संबंधी आवश्यकताओं पर चर्चा की गई।
वहीं, श्रीपर्णा दत्त ने गोमती उद्गम तीर्थ स्थल माधोटांडा फ्रेशवॉटर टर्टल के कैप्चर-मार्क-रीकैप्चर तकनीक पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। अगले पांच दिनों तक कार्यक्रम में जल्य जीवों की निगरानी, आवास प्रबंधन और संरक्षण रणनीतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया जाएगा।
यह पहल सीमापार संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने और नवोदित वन्यजीव जीवविज्ञानियों और संरक्षणविदों की क्षमता को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। गोमती ट्रस्ट के निर्भय सिंह और योगेश्वर सिंह ने भी विद्यार्थीओं को संबोधित किया।
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