UPITS 2026: 'दुनिया में सुनाई दे रही यूपी के विकास की गूंज', इंटरनेशनल ट्रेड शो में बोले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल
ग्रेटर नोएडा यूपीआईटीएस में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यूपी के विकास की गूंज पूरी दुनिया में है। राज्य का निर्यात 2030 तक 5 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और कारोबारी माहौल में आए युगांतरकारी बदलाव की गूंज अब देश की सीमाओं को लांघकर वैश्विक मंचों पर सुनाई दे रही है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एवं मार्ट में आयोजित चौथे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS-2026) के तीसरे दिन आयोजित विशेष सत्र 'लीवरेजिंग इंडियाज फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स फॉर ग्लोबल बिजनेस ग्रोथ' को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने विकास की एक नई और प्रेरक कहानी लिखी है। आज प्रदेश की सकारात्मक प्रशासनिक सोच, उद्योगपतियों का अटूट आत्मविश्वास और आर्थिक सुशासन राज्य की नई अंतरराष्ट्रीय पहचान बन चुके हैं।
केंद्रीय मंत्री ने स्मरण कराया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पावन जयंती के अवसर पर प्रारंभ हुआ यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला आने वाले समय में और अधिक विराट, प्रभावी और फलदायी सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे नेटवर्क, जेवर और अयोध्या सहित नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, विशाल औद्योगिक पार्क तथा डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण जैसे अत्याधुनिक सेक्टरों में आ रहा भारी निवेश बदलते उत्तर प्रदेश की सशक्त तस्वीर पेश कर रहा है।
2030 तक ₹5 लाख करोड़ के निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
पीयूष गोयल ने कहा कि नोएडा के पास तेजी से स्थापित हो रही आधुनिक रोबोटिक्स विनिर्माण फैक्ट्री इस तथ्य का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश अब केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि हाईटेक और भविष्योन्मुखी तकनीकों का भी नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि राज्य के विकास का अगला चरण अंतरराष्ट्रीय व्यापार, भारी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI), आधुनिक सेवाओं और पर्यटन से सीधे जुड़ने जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक उत्तर प्रदेश के कुल निर्यात को 5 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य प्रदेश के बढ़ते आर्थिक सामर्थ्य और नीतिगत स्पष्टता का परिचायक है। केंद्र सरकार भारत द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के जरिए भारतीय उत्पादों के लिए विदेशी बाजार खोल रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के उद्यमियों, निर्यातकों और युवा स्टार्ट-अप्स से आह्वान किया कि वे इन व्यापार समझौतों का भरपूर लाभ उठाएं और वैश्विक मानकों के अनुरूप गुणवत्ता व नवाचार लाकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने स्थानीय ब्रांड्स की धाक जमाएं।
2017 से पहले का यूपी: निराशा, पलायन और विश्वास का गहरा संकट
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने वर्ष 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय प्रदेश में कानून-व्यवस्था की बदहाली और भ्रष्टाचार के कारण उद्यमियों में घोर निराशा थी। कोई भी बड़ा औद्योगिक घराना उत्तर प्रदेश में पूंजी लगाने का साहस नहीं जुटा पाता था, जबकि अंतरराष्ट्रीय निवेश की कल्पना करना भी असंभव था।
उन्होंने कहा कि उस दौर में संगठित अपराध, रंगदारी और असुरक्षा के माहौल के चलते प्रतिभाओं और पूंजी का बड़े पैमाने पर अन्य राज्यों की ओर पलायन होता था। उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों की पंक्ति में गिना जाता था। ऐसे विपरीत वातावरण में सेमीकंडक्टर पार्क या रक्षा उपकरणों के निर्माण की बात सोचना भी दूर की कौड़ी थी।
जन-आकांक्षाओं से बना 2017 का संकल्प पत्र और वित्तीय चुनौतियां
पीयूष गोयल ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी का लोक कल्याण संकल्प पत्र तैयार करने के अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि उस समय पार्टी कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव और चौपालों में जाकर युवाओं, महिलाओं, किसानों और व्यापारियों से सीधे संवाद कर उनके सुझाव संकलित किए थे।
उस समय जनता की अपेक्षाएं अत्यंत व्यापक थीं, लेकिन राज्य का खजाना खाली था और वित्तीय संसाधनों पर गहरा दबाव बना हुआ था। सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और प्रशासनिक खर्चों के बाद विकास योजनाओं के लिए नाममात्र की धनराशि बचती थी। इसके बावजूद सरकार ने दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन का संकल्प लिया।
पारदर्शी व्यवस्था से राजस्व में रिकॉर्ड उछाल, घाटे से सरप्लस बजट तक का सफर
केंद्रीय मंत्री ने आंकड़ों के जरिए स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी व्यवस्था से राज्य के राजस्व संग्रह में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2016-17 में राज्य का आबकारी राजस्व जहां बेहद सीमित था, वहीं पारदर्शी आबकारी नीतियों और कड़े प्रवर्तन के चलते आज इसमें लगभग पांच गुना वृद्धि दर्ज की जा चुकी है।
इसी तरह खनन क्षेत्र का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2016-17 में मौरंग, बालू और गिट्टी जैसे खनिजों से राज्य को केवल 1,548 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता था, जो अब सुदृढ़ डिजिटल ई-टेंडरिंग और निगरानी प्रणाली के कारण कई गुना बढ़ चुका है। जमीन वही है, लेकिन स्टांप एवं निबंधन शुल्क संग्रह में अभूतपूर्व उछाल आया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जहां पूर्ववर्ती सरकारों के समय प्रदेश को निरंतर वित्तीय संकट और राजस्व घाटे (Revenue Deficit) का सामना करना पड़ता था, वहीं आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश एक 'रेवेन्यू सरप्लस' राज्य बन चुका है, जिससे आने वाली पीढ़ियों पर कर्ज का अनावश्यक बोझ नहीं पड़ेगा।
एफटीए और यूपीआईटीएस: वैश्विक बाजारों तक सीधी पहुंच
पीयूष गोयल ने दोहराया कि यूपीआईटीएस केवल एक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह राज्य के लघु व मध्यम उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने का क्रांतिकारी माध्यम है। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और खरीदारों की निरंतर उपस्थिति यह सिद्ध करती है कि दुनिया अब उत्तर प्रदेश को निवेश और व्यापार के सबसे सुरक्षित व प्रतिस्पर्धी गंतव्य के रूप में देख रही है।
इस महत्वपूर्ण विशेष सत्र में उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री भूपेंद्र चौधरी, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल सुशील, उद्योग आयुक्त के. विजयेंद्र पांडियन तथा विशेष सचिव एमएसएमई शिशिर सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और देश-विदेश के प्रमुख उद्योगपति उपस्थित रहे।
What's Your Reaction?